कांग्रेस 2029 में सत्ता में आई तो स्कूलों में अनिवार्य होगी ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’, 2029 मे सरकार बनवाएं
Digital UP News Desk
लखनऊ: कांग्रेस के विचार विभाग के चेयरमैन और पूर्व सैन्य अधिकारी प्रवीण डावर ने जवाहरलाल नेहरू की चर्चित पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ (भारत की खोज) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वर्ष 2029 में केंद्र में सरकार बनाती है, तो देश के सभी स्कूलों में इस पुस्तक को पढ़ाना अनिवार्य किया जाएगा। डावर ने यह बात नेहरू के विचारों और आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के संदर्भ में कही।
प्रवीण डावर के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू के विचारों और उनके विजन का आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की आईटी सेल और उससे जुड़े सोशल मीडिया तंत्र की ओर से नेहरू के बारे में लगातार भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है। ऐसे में कांग्रेस अब सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं, खासकर Gen Z, तक नेहरू के विचार और ऐतिहासिक तथ्यों को पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ के अंश
प्रवीण डावर ने कहा कि बीजेपी की ओर से नेहरू को लेकर फैलाए जा रहे कथित झूठ का जवाब तथ्यों और मूल स्रोतों के माध्यम से दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ के चुनिंदा अंश साझा किए जाएंगे।
कांग्रेस का उद्देश्य इस अभियान के जरिए युवा पीढ़ी को नेहरू के लेखन और उनके विचारों से परिचित कराना है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा दौर में सोशल मीडिया युवाओं तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। इसलिए नेहरू से संबंधित सामग्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई जा रही है।
डावर ने यह भी कहा कि नेहरू के विचारों को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत के इतिहास, संस्कृति और विविधता को समझने के लिए नेहरू की पुस्तक एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखी जा सकती है।
2029 को लेकर कांग्रेस की रणनीति पर भी चर्चा
प्रवीण डावर का बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब राजनीतिक दल आगामी वर्षों के लिए अपनी विचारधारा और संगठनात्मक रणनीति को लेकर अभियान चला रहे हैं। हालांकि, वर्ष 2029 में केंद्र में किस दल की सरकार बनेगी, यह भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। डावर ने अपने बयान में कांग्रेस के सत्ता में आने की स्थिति में ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को स्कूलों में अनिवार्य रूप से पढ़ाने की बात कही है।
उनके बयान ने शिक्षा और इतिहास की पुस्तकों को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस को भी एक नया मुद्दा दिया है। भारत में स्कूल पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और पुस्तकों को शामिल किए जाने को लेकर समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के विचार सामने आते रहे हैं।
जेल में रहते हुए नेहरू ने लिखी थी किताब
‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ जवाहरलाल नेहरू की सबसे चर्चित पुस्तकों में शामिल है। यह पुस्तक उन्होंने भारत की आजादी से पहले लिखी थी। उस समय नेहरू अहमदनगर किले में नजरबंद थे। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उन्होंने इस पुस्तक का लेखन अप्रैल से सितंबर 1944 के बीच किया था।
यह पुस्तक पहली बार वर्ष 1946 में प्रकाशित हुई। नेहरू ने इसे मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा था। बाद में इसका हिंदी समेत कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ। समय के साथ यह पुस्तक भारत के इतिहास और सभ्यता को समझने वाली चर्चित कृतियों में शामिल हो गई।
पुस्तक में नेहरू ने भारत के अतीत को केवल राजनीतिक घटनाओं के माध्यम से देखने के बजाय उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को भी समझने का प्रयास किया है। यही वजह है कि इसे आधुनिक भारत के इतिहास और विचारों को समझने के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिना जाता है।
सिंधु घाटी सभ्यता से स्वतंत्रता आंदोलन तक का वर्णन
‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में भारत के इतिहास की लंबी यात्रा का उल्लेख मिलता है। नेहरू ने सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वैदिक काल, उपनिषदों और भारतीय दर्शन की विभिन्न धाराओं पर चर्चा की है। इसके साथ ही उन्होंने भारत में विकसित हुई अलग-अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं के आपसी संबंधों को भी समझाने की कोशिश की।
इसके अलावा पुस्तक में मौर्य और गुप्त काल जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दौर का वर्णन किया गया है। मध्यकालीन भारत, विभिन्न साम्राज्यों और संस्कृतियों के बीच हुए संपर्क का भी इसमें उल्लेख है। नेहरू ने भारत के इतिहास को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की, जिसमें अलग-अलग समुदायों, परंपराओं और विचारधाराओं के बीच लगातार संवाद और परिवर्तन होता रहा।
इसके बाद पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा औपनिवेशिक काल और ब्रिटिश शासन से जुड़ा है। नेहरू ने ब्रिटिश शासन के प्रभाव, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों तथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विकास पर विस्तार से विचार किया है।
युवा पीढ़ी तक नेहरू के विचार पहुंचाने की तैयारी
कांग्रेस नेता प्रवीण डावर के अनुसार, पार्टी अब नेहरू के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगी। विशेष रूप से Gen Z को ध्यान में रखते हुए डिजिटल माध्यमों पर ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ के अंश और उससे जुड़ी सामग्री साझा करने की योजना है।
दरअसल, आज की युवा पीढ़ी के लिए इतिहास और राजनीति से जुड़ी जानकारी का एक बड़ा माध्यम सोशल मीडिया है। ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि नेहरू के लेखन को सोशल मीडिया की भाषा और प्रारूप में युवाओं तक पहुंचाया जाए।
हालांकि, इस अभियान का असर कितना व्यापक होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। वहीं, नेहरू की विरासत और उनके योगदान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी लंबे समय से सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
इतिहास की समझ को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस
भारत में इतिहास लेखन और स्कूली पाठ्यक्रम हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं इतिहास की घटनाओं और व्यक्तित्वों को अलग-अलग नजरिए से देखती हैं। ऐसे में ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को स्कूलों में अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी शिक्षा और इतिहास के राजनीतिक विमर्श से जुड़ सकता है।
प्रवीण डावर का बयान इसी व्यापक बहस के बीच आया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि कांग्रेस यदि 2029 में केंद्र की सत्ता में आती है, तो सभी स्कूलों में नेहरू की इस पुस्तक को पढ़ाना अनिवार्य किया जाएगा।
फिलहाल यह एक राजनीतिक घोषणा है और इसके लागू होने की स्थिति भविष्य में बनने वाली सरकार तथा उसकी शिक्षा नीति पर निर्भर करेगी। इसके बावजूद, डावर के बयान ने नेहरू की पुस्तक और उनके विचारों को एक बार फिर राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है

