बरेली में साड़ी वितरण कार्यक्रम में मची भगदड़, एक महिला की मौत, कई लोग घायल
Digital UP News Desk
बरेली: रक्षाबंधन से पहले बरेली क्लब मेला मैदान में आयोजित साड़ी वितरण कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ जुटने के बाद अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कार्यक्रम के दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने और बारिश होने के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में एक महिला की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें उपचार के लिए मिशन अस्पताल ले जाया गया। बाद में उनकी मौत की जानकारी सामने आई। हादसे में कई अन्य लोगों के घायल होने की भी बात कही जा रही है।
यह कार्यक्रम बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम और उनके बेटे पार्थ गौतम फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को साड़ी वितरित करना बताया गया। हालांकि, आयोजन स्थल पर अपेक्षा से अधिक संख्या में महिलाओं के पहुंचने के कारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
साड़ी लेने के दौरान बढ़ा भीड़ का दबाव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम में सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचने लगी थीं। जैसे-जैसे साड़ी वितरण शुरू हुआ, महिलाओं की संख्या और भीड़ का दबाव बढ़ता गया। इसी दौरान बारिश होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। साड़ी प्राप्त करने की कोशिश में भीड़ एक स्थान पर अधिक एकत्रित हो गई, जिससे धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने लगी।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के लिए बनाए गए पंडाल में अचानक अफरा-तफरी मच गई। कई महिलाएं घबराकर वहां से निकलने की कोशिश करने लगीं। मौके पर बड़ी संख्या में चप्पलें छूट गईं, जिससे कार्यक्रम स्थल पर मची अव्यवस्था का अंदाजा लगाया गया। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की आधिकारिक जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
45 वर्षीय मधु सिंह की तबीयत बिगड़ी
हादसे के दौरान पुराना शहर क्षेत्र के चंद्रगुप्तपुरम, थाना बारादरी निवासी मधु सिंह की तबीयत बिगड़ गई। उनकी उम्र करीब 45 वर्ष बताई जा रही है। उन्हें तत्काल उपचार के लिए मिशन अस्पताल ले जाया गया। बाद में उनकी मौत की सूचना सामने आई।
घटना के बाद मधु सिंह के परिवार में मातम छा गया। शुरुआती दौर में देर रात तक उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। हालांकि, परिजनों की ओर से उनकी मौत की जानकारी दी गई।
मधु सिंह के भांजे और भाजपा पूर्वी मंडल अध्यक्ष राजा तोमर के अनुसार, वह सुबह करीब 10 बजे अपनी मामी को कार्यक्रम स्थल पर छोड़कर स्कूल ऑटो चलाने चले गए थे। उन्होंने बताया कि मधु सिंह के साथ मोहल्ले की कुछ अन्य महिलाएं भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंची थीं।
परिवार को मिले थे 15 पास
राजा तोमर के अनुसार, महापौर की ओर से उनके परिवार को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब 15 पास मिले थे। इन्हीं में से एक पास लेकर मधु सिंह कार्यक्रम स्थल पर पहुंची थीं। परिवार का कहना है कि उन्होंने कार्यक्रम में प्रवेश पास के माध्यम से किया था।
मधु सिंह के पति भगवान सिंह के सेना से सेवानिवृत्त होने की बात भी परिजनों की ओर से कही गई है। परिवार के अनुसार, मधु सिंह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सामान्य रूप से घर से निकली थीं, लेकिन बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली।
अस्पताल में जानकारी मिलने में देरी का आरोप
घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल में जानकारी मिलने में कथित देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। मृतका की परिजन लता देवी का आरोप है कि मधु सिंह को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद परिवार लगातार उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मांगता रहा, लेकिन उन्हें तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों का कहना है कि वे अस्पताल के स्टाफ से मधु सिंह की हालत के बारे में पूछते रहे, लेकिन उन्हें उनकी स्थिति को लेकर स्पष्ट जवाब देर से मिला। परिवार के अनुसार, शाम तक उन्हें महिला की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी हो सकी।
हालांकि, अस्पताल की ओर से इस संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई गई और परिजनों को सूचना देने में वास्तव में कोई देरी हुई या नहीं, यह जांच का विषय है। इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
मिलिट्री अस्पताल ले जाने का विकल्प नहीं मिल पाने का दावा
राजा तोमर का कहना है कि यदि परिवार को मधु सिंह की गंभीर स्थिति की जानकारी समय रहते मिल जाती, तो उन्हें पास के मिलिट्री अस्पताल ले जाने पर विचार किया जा सकता था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें समय पर स्थिति की जानकारी नहीं मिली, जिसके कारण उपचार के दूसरे विकल्प पर तत्काल निर्णय लेने का अवसर नहीं मिल सका।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। महिला की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और घटना के दौरान उनकी तबीयत किस वजह से बिगड़ी, यह चिकित्सकीय रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
बारिश ने बढ़ाई मुश्किल
कार्यक्रम के दौरान बारिश ने भी व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी। बड़ी संख्या में महिलाएं पहले से ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थीं। ऐसे में बारिश शुरू होने के बाद लोग सुरक्षित स्थान तलाशने लगे। दूसरी ओर, साड़ी वितरण के लिए भीड़ का दबाव बना हुआ था।
परिस्थितियां एक साथ बदलने के कारण आयोजन स्थल पर लोगों को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समय के लिए पंडाल में घबराहट का माहौल बन गया और महिलाएं वहां से बाहर निकलने लगीं।
ऐसे आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास के अलग-अलग रास्ते, पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इस घटना के बाद कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम में जुटी भीड़ के अनुपात में सुरक्षा संबंधी पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में कितनी थी और आयोजकों की ओर से कौन-कौन से इंतजाम किए गए थे, इसकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों या आयोजन समिति के आधिकारिक बयान से होना बाकी है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्यक्रम में पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या का अनुमान पहले से लगाया गया था या नहीं और भीड़ बढ़ने की स्थिति में उसे नियंत्रित करने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था तैयार थी।
प्रशासन की जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
इस घटना के बाद प्रशासन के सामने कार्यक्रम की व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और चिकित्सा सहायता से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही, महिला की मौत के चिकित्सकीय कारण की पुष्टि भी जरूरी है।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं, यदि मौत का कारण कोई अन्य चिकित्सकीय स्थिति पाई जाती है, तो उस तथ्य को भी सार्वजनिक किया जाना जरूरी होगा।
फिलहाल, घटना ने रक्षाबंधन से पहले आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र करने वाले आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा को प्राथमिकता देना जरूरी है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों की अधिक संख्या वाले कार्यक्रमों में प्रवेश, निकास और भीड़ नियंत्रण की प्रभावी योजना पहले से तैयार होनी चाहिए।
मधु सिंह की मौत से उनके परिवार में शोक का माहौल है। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुभव और परिजनों के आरोपों के बीच अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आधिकारिक रिपोर्ट पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कार्यक्रम के दौरान वास्तव में किन परिस्थितियों में भीड़ का दबाव बढ़ा और महिला की तबीयत बिगड़ने के पीछे क्या कारण रहा।

