मुरादाबाद जेल में रक्षाबंधन पर भावुक हुआ माहौल, 860 बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी
रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद
मुरादाबाद: भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में मुरादाबाद की जिला कारागार में भी रक्षाबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बड़ी संख्या में बहनें पहुंचीं। इस दौरान जेल परिसर में भावनाओं का मिला-जुला माहौल देखने को मिला। एक ओर बहनों के चेहरों पर अपने भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर राखी सजाने की खुशी थी, तो दूसरी ओर भाई के जेल में होने का मलाल भी उनके भावुक चेहरों पर साफ दिखाई दिया।
रक्षाबंधन के अवसर पर जिला कारागार प्रशासन की ओर से मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। बहनों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जेल परिसर में टेंट लगाया गया, ताकि उन्हें धूप से राहत मिल सके। इसके साथ ही पीने के पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई।
सुबह से ही जेल के बाहर लगी बहनों की कतार
रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही मुरादाबाद जिला कारागार के बाहर बहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए महिलाएं निर्धारित समय पर जेल पहुंचीं। कई बहनें अपने साथ मिठाई और खान-पान की सामग्री भी लेकर आई थीं। जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत इन सभी सामग्रियों की जांच की। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अनुमत सामग्री को जेल के अंदर भेजा गया।
इस दौरान कई महिलाएं अपने भाइयों से मिलने को लेकर उत्साहित नजर आईं। वहीं, कुछ बहनों की आंखों में भावुकता भी दिखाई दी। उनके लिए रक्षाबंधन का यह दिन खुशी के साथ-साथ भावनाओं से भरा हुआ था। उनका कहना था कि भाई की कलाई पर राखी बांधना उनके लिए इस त्योहार की सबसे बड़ी खुशी है, लेकिन अगर भाई जेल से बाहर होता तो यह खुशी और भी अधिक होती।
राखी बांधते समय छलकीं भावनाएं
जिला कारागार में भाइयों से मिलने पहुंची बहनों के लिए यह अवसर बेहद भावुक करने वाला रहा। वर्षों से चली आ रही भाई-बहन के प्रेम की परंपरा को निभाने के लिए बहनें जेल परिसर तक पहुंचीं। जब उन्होंने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी तो माहौल भावनात्मक हो गया।
रक्षाबंधन सिर्फ एक धार्मिक या सामाजिक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन परिवार के सदस्य एक-दूसरे के साथ समय बिताने और अपने रिश्तों को मजबूत करने का प्रयास करते हैं। जिला कारागार में बंद कैदियों के लिए भी यह दिन अपने परिवार से जुड़ने और बहनों का स्नेह महसूस करने का अवसर लेकर आया।
हालांकि, जेल में मनाया गया यह रक्षाबंधन सामान्य परिस्थितियों से अलग था। बहनों को अपने भाइयों से मिलने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ा। इसके बावजूद उनके उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी।
जेल प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
बड़ी संख्या में बहनों के जेल पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला कारागार प्रशासन ने पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली थीं। सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। जेल परिसर में टेंट की व्यवस्था की गई, जिससे तेज धूप के बीच बहनों को परेशानी न हो। इसके अलावा पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई।
जेल प्रशासन की ओर से आने वाली बहनों द्वारा लाई गई मिठाई और अन्य खान-पान की सामग्री की जांच की गई। सुरक्षा व्यवस्था के तहत जांच के बाद ही निर्धारित सामग्री को अंदर ले जाने की अनुमति दी गई। इससे एक ओर जेल की सुरक्षा व्यवस्था बनी रही, वहीं दूसरी ओर बहनों को अपने भाइयों के साथ त्योहार मनाने का अवसर भी मिला।
करीब 860 बहनें पहुंचेंगी जेल
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर जिला कारागार में करीब 860 बहनों के अपने भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर राखी बांधने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इसके लिए सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक विशेष व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बहनों के आने को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। सुरक्षा के साथ-साथ मुलाकात की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर भी ध्यान दिया गया है।
खुशी के साथ मन में रही कसक
जेल में राखी बांधने पहुंची बहनों के चेहरे पर अपने भाइयों से मिलने की खुशी साफ दिखाई दी। हालांकि, इस खुशी के बीच उनके मन में एक कसक भी थी। कई बहनों के लिए यह रक्षाबंधन इसलिए अलग था क्योंकि उनका भाई इस समय जेल में है।
रक्षाबंधन के मौके पर बहनें आमतौर पर अपने भाइयों के घर जाकर राखी बांधती हैं और परिवार के साथ त्योहार मनाती हैं। लेकिन जेल में बंद भाइयों की बहनों को इसके लिए जिला कारागार पहुंचना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपने रिश्ते की परंपरा को निभाया और भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।
इस दौरान बहनों ने अपने भाइयों की कुशलता जानी और उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं दीं। वहीं, भाइयों ने भी अपनी बहनों के प्रति स्नेह जताया। इस मुलाकात ने कुछ समय के लिए जेल की चारदीवारी के बीच पारिवारिक माहौल बना दिया।
त्योहार ने दिलाई परिवार की याद
रक्षाबंधन का पर्व परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार है। ऐसे में जेल में बंद लोगों के लिए यह अवसर अपने परिवार की याद को और गहरा कर देता है। बहनों की मौजूदगी और उनके हाथों से बंधी राखी ने भाइयों के लिए इस दिन को खास बना दिया।
मुरादाबाद जिला कारागार में भी यही भावनाएं देखने को मिलीं। बहनों ने तमाम औपचारिकताओं और सुरक्षा जांच के बीच अपने भाइयों तक पहुंचकर राखी बांधी। वहीं, जेल प्रशासन ने भी इस दौरान व्यवस्था बनाए रखने के साथ बहनों की सुविधा का ध्यान रखा।
कुल मिलाकर, रक्षाबंधन के अवसर पर मुरादाबाद जिला कारागार में दिनभर भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक तस्वीर देखने को मिली। करीब 860 बहनों के पहुंचने की व्यवस्था के बीच जेल प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा दोनों को प्राथमिकता दी। बहनों के चेहरों पर मुस्कान थी, लेकिन उनके मन में अपने भाइयों के जल्द सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद भी दिखाई दी।

