कुशीनगर में गंडक नदी के किनारे नेपाल की बाढ़ के निशान, बहकर पहुंचे गैस सिलिंडर और घरेलू सामान

WhatsApp Image 2026-08-28 at 4.41.02 PM

Digital UP News Desk

नेपाल में आई भारी बाढ़ का असर अब भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र में गंडक नदी के किनारे बृहस्पतिवार सुबह पानी के साथ बहकर आए घरेलू सामान मिलने से लोगों में चिंता बढ़ गई।

छितौनी तटबंध के भैसहा, मदनपुर, हनुमानगंज, लक्ष्मीपुर पड़रहवां और माघी भगवानपुर के पास ग्रामीणों ने नदी किनारे लकड़ियों के बीच गैस सिलिंडर, टायर, मोबिल का ड्रम, अलमारी और घर-गृहस्थी का अन्य सामान देखा। ग्रामीणों ने नदी किनारे पहुंचकर इन सामानों को बाहर निकाला।

नदी के साथ बहकर पहुंचे इन सामानों ने नेपाल में आई बाढ़ की गंभीरता की ओर इशारा किया है। हालांकि, इन वस्तुओं के वास्तविक स्रोत और बाढ़ में इनके बहने की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार नदी में लकड़ियों और घरेलू सामान का इस तरह पहुंचना असामान्य स्थिति को दर्शाता है।

नदी किनारे जमा हुईं लकड़ियां और घरेलू वस्तुएं

गंडक नदी में पानी के तेज बहाव के साथ बड़ी मात्रा में लकड़ियां और मलबा भी पहुंचा है। नदी किनारे कई स्थानों पर लकड़ियों का ढेर दिखाई दिया। ग्रामीण इन्हें जलावन के लिए बाहर निकाल रहे हैं। इसके अलावा जगह-जगह टूटे हुए घरेलू सामान और अन्य वस्तुएं भी बिखरी मिलीं।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारे मिले सामान को देखकर नेपाल के प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवारों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके मुताबिक, बाढ़ के दौरान लोगों को अचानक सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा होगा। यही वजह है कि नदी के बहाव के साथ घरेलू उपयोग की वस्तुएं दूर तक पहुंच गईं।

महराजगंज में भी बाढ़ की आशंका से ग्रामीणों में चिंता

नेपाल में आई बाढ़ के बाद त्रिशूला नदी के रास्ते गंडक नदी में पानी और मलबा आने से महराजगंज जिले के सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा गांवों में भी चिंता बढ़ गई। बुधवार शाम से इन गांवों की हजारों की आबादी के बीच बाढ़ की आशंका को लेकर चर्चा तेज हो गई।

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। इसके बाद कई परिवार बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ बाजार टोला स्थित ऊंचे स्थान पर पहुंच गए। लोगों ने रात वहीं रहकर नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर नजर रखी। हालांकि, बृहस्पतिवार सुबह जलस्तर में कमी आने की सूचना के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

सोहगीबरवा निवासी ब्रह्मानंद ने बताया कि त्रिशूला नदी में बाढ़ की सूचना के बाद गांव में चिंता का माहौल बन गया था। एहतियात के तौर पर वह अपने परिवार के साथ बाजार टोला स्थित सुरक्षित स्थान पर चले गए और रात वहीं गुजारी। सुबह पानी कम होने की जानकारी मिलने के बाद वह घर की ओर लौटे, लेकिन नदी के जलस्तर को लेकर सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

नदी के हालात की जानकारी लेते रहे

वहीं, विजय प्रताप सिंह ने बताया कि नेपाल में बाढ़ से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई थी। इसी वजह से कई लोग शाम होते-होते परिवार के साथ ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए।

शिकारपुर निवासी सोनू गुप्ता के अनुसार, प्रशासन का अलर्ट मिलने के बाद ग्रामीणों ने जरूरी सामान और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था। बाजार टोला में बड़ी संख्या में लोग एकत्र रहे और लगातार नदी के हालात की जानकारी लेते रहे।

बाजार टोला निवासी परशुराम ने बताया कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ की खबरों के कारण ग्रामीणों को पूरी रात सतर्क रहना पड़ा। परिवार की सुरक्षा को लेकर लोग लगातार जलस्तर की जानकारी लेते रहे।

करीब 12 गांवों में रातभर नदी के जलस्तर पर नजर

गंडक नदी के किनारे बसे निचलौल क्षेत्र के कई गांवों में भी बाढ़ की आशंका को देखते हुए ग्रामीण पूरी रात सतर्क रहे। कनमिशवा, भेड़िहारी, गेड़हवा, गोसाईपुर, बड़ेया, डोमा, कलनही, गुलरभार और चंदा समेत करीब 12 गांवों में लोगों ने नदी के जलस्तर पर नजर बनाए रखी।

ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता परिवार और मवेशियों की सुरक्षा रही। प्रशासन की ओर से भी निचले और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

डीएम और एसपी ने तटवर्ती इलाकों का किया निरीक्षण

स्थिति का जायजा लेने के लिए बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने नारायणी-गंडक नदी के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सोहगीबरवा पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें नदी के जलस्तर को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि नदी के जलस्तर और बहाव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय रखा गया है।

अधूरे पुल और संपर्क मार्ग की समस्या उठाई

निरीक्षण के दौरान सोहगीबरवा के ग्रामीणों ने रोहुआ नाला के पास जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गांव की पुरानी समस्या भी उठाई। ग्रामीण पशुराम, गोविंद, शिवशरण और सोनू ने अधूरे पुल तथा क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग का मुद्दा प्रशासन के सामने रखा।

ग्रामीणों ने बताया कि रोहुआ नाला पर बना अधूरा पुल और खराब संपर्क मार्ग गांव के आवागमन में बड़ी बाधा है। बारिश के मौसम में नाले का पानी बढ़ने पर समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने स्थायी समाधान के लिए पुल और संपर्क मार्ग का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की।

गंडक नदी में पानी के बहाव में उतार-चढ़ाव

नेपाल के भोटे कोशी और त्रिशूला नदी में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी के बहाव में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। फिलहाल तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन प्रशासन ने एहतियातन निगरानी बढ़ा दी है।

नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में प्रशासनिक टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। एसएसबी, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर भी सतर्कता बरती जा रही है। ग्रामीणों से नदी के करीब जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में कमी

नेपाल में बाढ़ की स्थिति का असर सीमा क्षेत्र के पर्यटन कारोबार पर भी पड़ा है। कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, बृहस्पतिवार को नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 80 प्रतिशत तक कमी देखी गई।

सोनौली-भैरहवा सीमा पर पर्यटक वाहनों और यात्रियों की आवाजाही भी कम रही। सोनौली से भैरहवा, लुंबिनी, पोखरा और काठमांडो सहित अन्य पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले कई यात्रियों ने हालात सामान्य होने तक यात्रा टालना बेहतर समझा।

स्थानीय पर्यटन और सीमा व्यापार से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, नेपाल में स्थिति सामान्य होने तक पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित रह सकती है। हालांकि, बाढ़ का असर कम होने और यात्रा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद सीमा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां फिर बढ़ने की उम्मीद है।

कंट्रोल रूम में हर दो घंटे पर जलस्तर की निगरानी

नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गंडक और नारायणी नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। कलक्ट्रेट में स्थापित कंट्रोल रूम से खड्डा और तमकुहीराज तहसील के तटीय तथा निचले संवेदनशील गांवों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

आपदा प्रबंधन समेत छह प्रमुख विभागों के अधिकारी और कर्मचारी कंट्रोल रूम में तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्य, पुलिस, पशुपालन, पंचायती राज और राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी सतर्क रखा गया है।

निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है

वाल्मीकि नगर बैराज से छोड़े जा रहे पानी और गंडक नदी के जलस्तर की जानकारी हर दो घंटे में ली जा रही है। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों को डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव की समय रहते जानकारी जुटाना और जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई करना है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन की ओर से जारी सूचना को प्राथमिकता दें।

You may have missed