अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं की निगरानी मजबूत, DBT और सामाजिक लेखापरीक्षा से बढ़ेगी पारदर्शिता

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति समुदाय के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निधियों के समय पर उपयोग और लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को और मजबूत करने पर जोर दिया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से योजनाओं की नियमित समीक्षा, डिजिटल निधि प्रबंधन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और सामाजिक लेखापरीक्षा जैसे उपायों के माध्यम से निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इन पहलों का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों के विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति, सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण, आजीविका के अवसरों में वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना है। इसके लिए केंद्र सरकार विभिन्न स्तरों पर कई योजनाएं संचालित कर रही है और इनके क्रियान्वयन में राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

2021-22 से 2025-26 के बीच कई प्रमुख योजनाओं को मिला समर्थन

वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान अनुसूचित जाति समुदाय के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता से जुड़ी कई प्रमुख योजनाओं के लिए धनराशि आवंटित की गई। इनमें अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय फेलोशिप, राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति और उच्च स्तरीय शिक्षा से संबंधित सहायता प्रमुख हैं।

इसके अलावा, विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देने के लिए मुफ्त कोचिंग कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के माध्यम से शुरुआती स्तर पर शिक्षा को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय), लक्षित क्षेत्रों के हाई स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा योजना ‘श्रेष्ठा’, अनुसूचित जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी समर्थन दिया गया है। इन योजनाओं का व्यापक उद्देश्य शिक्षा से लेकर रोजगार और उद्यमिता तक अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अवसरों का विस्तार करना है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय

इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार की ओर से जारी धनराशि का उपयोग संबंधित योजना के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाता है। इसके लिए प्रस्तावों की पूर्णता, उपयोगिता प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है।

जहां लागू होता है, वहां निधि प्रबंधन से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था एसएनए-स्पर्श में पंजीकरण तथा निर्धारित वित्तीय मानदंडों के अनुपालन को भी महत्व दिया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी धन के उपयोग को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है।

इसके साथ ही, निधि जारी करने की प्रक्रिया को आवश्यक दस्तावेजों और निर्धारित शर्तों से जोड़ा गया है, ताकि धनराशि का उपयोग योजनाओं के वास्तविक उद्देश्यों के लिए किया जा सके। इससे एक ओर वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी ओर योजनाओं की प्रगति पर नजर रखना भी आसान होता है।

नियमित समीक्षा से कमियों की पहचान

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय योजनाओं के खर्च और क्रियान्वयन की नियमित आंतरिक समीक्षा करता है। इसके माध्यम से यह देखा जाता है कि आवंटित धनराशि का उपयोग किस गति से हो रहा है और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्य कितनी प्रभावी तरीके से पूरे किए जा रहे हैं।

इसके अलावा, योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने के लिए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और सामाजिक लेखापरीक्षा भी कराई जाती है। इन प्रक्रियाओं से योजना के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलती है।

मंत्रालय की ओर से मासिक और त्रैमासिक व्यय लक्ष्यों की भी समीक्षा की जाती है। यदि किसी स्तर पर अपेक्षित गति से धनराशि का उपयोग नहीं हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय करके सुधारात्मक उपायों पर काम किया जाता है।

छात्रवृत्ति में DBT से पारदर्शिता

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी DBT को महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया है। इसके तहत पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में सहायता राशि सीधे पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

DBT व्यवस्था का एक प्रमुख लाभ यह है कि लाभार्थी तक सहायता सीधे पहुंचती है। इससे न केवल प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है, बल्कि भुगतान में संभावित देरी को कम करने और पात्र लाभार्थियों को बेहतर तरीके से लक्षित करने में भी मदद मिलती है।

शैक्षिक सहायता योजनाओं में समय पर वित्तीय सहायता मिलने से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग मिलता है। विशेष रूप से उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी योजनाएं विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी

योजनाओं की प्रगति पर निगरानी केवल दस्तावेजी समीक्षा तक सीमित नहीं है। मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन शिविर, क्षेत्रीय बैठकें और राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाती है।

इसी तरह, नियमित परामर्श के माध्यम से जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का प्रयास किया जाता है। राज्यों के साथ लगातार संपर्क से योजना से संबंधित प्रक्रियाओं और लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

जागरूकता अभियान पर भी जोर

सरकार ने योजनाओं की जानकारी पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता और संपर्क अभियानों को भी महत्वपूर्ण माना है। इसके लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन, सोशल मीडिया अभियान तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित संपर्क का सहारा लिया जा रहा है।

इन अभियानों का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार करना नहीं है, बल्कि पात्र लोगों को आवेदन और प्रस्ताव प्रस्तुत करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना भी है। नतीजतन, अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है।

डिजिटल व्यवस्था से वित्तीय प्रबंधन को मजबूती

सरकार कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में डिजिटल प्रणालियों के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। डिजिटल निधि-प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से धनराशि के प्रवाह और उपयोग की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं, नियमित मूल्यांकन और व्यय की समीक्षा से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पर फोकस

सरकार की इन योजनाओं का व्यापक लक्ष्य अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। छात्रवृत्ति और फेलोशिप से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की दिशा में प्रोत्साहन मिलता है, जबकि कौशल विकास तथा वेंचर कैपिटल जैसी पहलें आर्थिक अवसरों का विस्तार करने पर केंद्रित हैं।

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