कानपुर में बारावफात पर जुलूस-ए-मोहम्मदी की तैयारियां तेज, 26 अगस्त को परेड चौराहे से होगा रवाना

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रिपोर्ट- सुहैल अंसारी 

कानपुर। बारावफात के पर्व को लेकर कानपुर में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में जमीयत उलेमा कानपुर की ओर से जमीयत बिल्डिंग, राजाबी रोड में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में जुलूस-ए-मोहम्मदी की तैयारियों और आयोजन की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी गई। पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष जुलूस-ए-मोहम्मदी आगामी 26 अगस्त को परेड चौराहे से झंडा दिखाकर रवाना किया जाएगा।

प्रेस वार्ता में जमीयत उलेमा हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी ने जुलूस-ए-मोहम्मदी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह जुलूस केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी सौहार्द का भी प्रतीक रहा है। उन्होंने लोगों से बारावफात के अवसर पर शांति और अनुशासन के साथ आयोजन में शामिल होने की अपील की।

जुलूस के इतिहास पर दी जानकारी

मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी ने प्रेस वार्ता में जुलूस-ए-मोहम्मदी के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। उनके अनुसार, उस दौर में शहर के लोगों पर कार्रवाई की गई थी, जिसके विरोध में जुलूस निकाला गया। उन्होंने बताया कि उस समय जुलूस मेस्टन रोड से शुरू होकर परेड ग्राउंड तक पहुंचा था।

उन्होंने कहा कि समय के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी एक बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन के रूप में विकसित होता गया। इसमें अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल होते रहे हैं। यही वजह है कि कानपुर में इस आयोजन को सामाजिक एकता और भाईचारे के संदेश से भी जोड़कर देखा जाता है।

लाखों लोगों के शामिल होने का दावा

प्रेस वार्ता में बताया गया कि जुलूस-ए-मोहम्मदी में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। आयोजकों के मुताबिक, यह एशिया के बड़े जुलूसों में शामिल है और इसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। आयोजन को लेकर विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं, ताकि जुलूस निर्धारित मार्ग से शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ सके।

आयोजकों ने कहा कि जुलूस में शामिल होने वाले लोगों से व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासन की ओर से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की जाएगी। इसके साथ ही आयोजन के दौरान यातायात और आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी आवश्यक व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही गई।

26 अगस्त  को परेड चौराहे से होगा रवाना

जमीयत उलेमा की ओर से बताया गया कि इस वर्ष जुलूस-ए-मोहम्मदी 26 अगस्त  को परेड चौराहे से रवाना किया जाएगा। जुलूस को झंडा दिखाकर रवाना किए जाने की तैयारी है। इसके लिए आयोजकों की ओर से संबंधित लोगों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय बनाया जा रहा है।

आयोजकों का कहना है कि जुलूस के दौरान धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश प्रमुखता से दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में शामिल हों, लेकिन साथ ही अनुशासन और शांति बनाए रखें।

धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक संदेश

बारावफात मुस्लिम समुदाय के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। इस अवसर पर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन, उनके संदेश और मानवता के प्रति उनके विचारों को याद किया जाता है। इसी क्रम में जुलूस-ए-मोहम्मदी का आयोजन भी श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाता है।

कानपुर में लंबे समय से आयोजित होने वाला यह जुलूस शहर की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। आयोजकों के अनुसार, जुलूस के माध्यम से लोगों को शांति, सद्भाव, सेवा और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया जाता है।

व्यवस्था को लेकर समन्वय पर जोर

बड़े स्तर पर होने वाले आयोजन को देखते हुए व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए यातायात व्यवस्था, सुरक्षा, साफ-सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर संबंधित विभागों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।

जमीयत उलेमा के पदाधिकारियों ने कहा कि आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी पक्षों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और आयोजन के दौरान आपसी भाईचारा बनाए रखें।

शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने की अपील

प्रेस वार्ता में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कानपुर की पहचान लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए रही है। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद और सौहार्द को बढ़ावा देने का अवसर मिलता है। जुलूस-ए-मोहम्मदी को भी इसी भावना के साथ आयोजित किए जाने की बात कही गई।

आयोजकों ने कहा कि जुलूस के दौरान ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे किसी की धार्मिक भावना आहत हो या आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़े। इसके लिए लोगों से संयम और जिम्मेदारी के साथ आयोजन में शामिल होने की अपील की गई।

तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू

16 सितंबर को प्रस्तावित जुलूस को लेकर अब तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आयोजकों की ओर से जुलूस में शामिल होने वाले लोगों के साथ संपर्क और समन्वय बढ़ाया जा रहा है। साथ ही आयोजन की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा की जा रही है।

जमीयत उलेमा कानपुर की प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया गया कि जुलूस-ए-मोहम्मदी को शांतिपूर्ण वातावरण में आयोजित करना प्राथमिकता है। इसके लिए सभी से सहयोग की अपेक्षा की गई है।

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