दिव्या मिश्रा मर्डर केस: परिवार ने 1.5 करोड़ की एलिमनी के दावे को बताया गलत, हथियारों पर उठाए सवाल

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Digital UP News Desk

लखनऊ: दिव्या मिश्रा मर्डर केस को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे कई दावों के बीच अब उनके परिवार ने 1.5 करोड़ रुपये की एलिमनी मांग से जुड़े दावे को खारिज किया है। परिवार का कहना है कि दिव्या मिश्रा की ओर से मांगे गए स्त्रीधन को गलत तरीके से गुजारा भत्ता यानी एलिमनी के रूप में पेश किया जा रहा है।

दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने इस मामले में कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से यह सवाल किया कि बैंक कर्मचारी रहे मानस वाजपेयी के पास इतने हथियार कहां से आए।

1.5 करोड़ रुपये की एलिमनी मांग से परिवार का इनकार

दिव्या मिश्रा की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा था कि दिव्या ने अपने पति मानस वाजपेयी से तलाक की प्रक्रिया के दौरान 1.5 करोड़ रुपये की एलिमनी की मांग की थी।

परिवार के मुताबिक, इस रकम को एलिमनी बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। प्रज्ञा मिश्रा ने स्पष्ट किया कि स्त्रीधन और स्थायी गुजारा भत्ता यानी एलिमनी दो अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं। उनके अनुसार, महिला का स्त्रीधन उसके अधिकार से जुड़ा होता है, जबकि एलिमनी तलाक या वैवाहिक विवाद की परिस्थितियों में मिलने वाली अलग प्रकार की कानूनी राहत हो सकती है।

परिवार का यह भी कहना है कि दिव्या और मानस के बीच तलाक की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में थी और मामला काउंसलिंग तक ही पहुंचा था। ऐसे में 1.5 करोड़ रुपये की एलिमनी तय होने या मांगे जाने की बात को परिवार ने भ्रामक बताया है।

परिवार ने दस्तावेजी सबूतों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की

प्रज्ञा मिश्रा के मुताबिक, कार्यवाही में मांगे गए स्त्रीधन की वास्तविक रकम कितनी थी, इसकी सटीक जानकारी परिवार के पास भी नहीं है। साथ ही, परिवार ने 1.5 करोड़ रुपये की रकम को लेकर कोई दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया है।

परिवार का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी रकम को एलिमनी के तौर पर प्रचारित करने से पहले उसके संदर्भ और कानूनी स्वरूप को समझना जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट दावों पर भरोसा न करें और मामले की जांच पूरी होने का इंतजार करें।

20 अगस्त को सामने आया था सनसनीखेज मामला

दिव्या मिश्रा मर्डर केस 20 अगस्त को सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बैंक अधिकारी दिव्या मिश्रा की उनके पति मानस वाजपेयी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद मानस ने अपनी बहन और फिर खुद की भी जान ले ली थी।

घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की। जांच का दायरा केवल वारदात तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस इससे पहले के घटनाक्रम, वैवाहिक विवाद, आर्थिक लेन-देन और दोनों के बीच चल रही कानूनी प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले पति-पत्नी के बीच किस तरह के विवाद चल रहे थे और उनका स्वरूप क्या था। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि किसी आर्थिक या पारिवारिक विवाद का घटना से कोई संबंध था या नहीं।

हथियारों को लेकर दिव्या की बहन ने उठाया सवाल

इस मामले में एक अहम सवाल मानस वाजपेयी के पास मौजूद हथियारों को लेकर भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, मानस के आवास से दो पिस्तौल और एक देसी कट्टा बरामद किया गया है।

दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने इसी बिंदु पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि मानस बैंक कर्मचारी था, तो उसके पास इतने हथियार कहां से आए। परिवार यह जानना चाहता है कि इन हथियारों की व्यवस्था कैसे हुई और क्या उनके पास इन्हें रखने या इस्तेमाल करने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज था।

हालांकि, हथियारों से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। इसलिए इस स्तर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच से खुलेंगे कई राज

पुलिस ने बरामद हथियारों को जांच के लिए फॉरेंसिक और बैलिस्टिक विशेषज्ञों के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। बैलिस्टिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बरामद हथियारों में से किसका इस्तेमाल वारदात में हुआ था।

इसके अलावा, पुलिस हथियारों की स्थिति, उनसे जुड़े संभावित साक्ष्य और अन्य फॉरेंसिक सामग्री का भी परीक्षण कर रही है। जांच एजेंसियों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और बरामद हथियारों के बीच क्या संबंध है।

इस जांच के नतीजे मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, पुलिस अन्य डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है।

वैवाहिक विवाद और लेन-देन की भी जांच

दिव्या मिश्रा और मानस वाजपेयी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद की परिस्थितियों को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों के बीच विवाद कब से चल रहा था और क्या तलाक की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का आर्थिक विवाद सामने आया था।

इसके साथ ही बैंकिंग और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है। परिवार की ओर से 1.5 करोड़ रुपये की एलिमनी के दावे को खारिज किए जाने के बाद इस मुद्दे पर भी तथ्यात्मक जानकारी जुटाना जांच का हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, जब तक पुलिस की जांच पूरी नहीं होती, तब तक सोशल मीडिया पर सामने आने वाले दावों को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया के दावों पर परिवार की आपत्ति

दिव्या मिश्रा के परिवार ने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही सूचनाओं को लेकर आपत्ति जताई है। परिवार का कहना है कि गंभीर आपराधिक मामले में किसी भी तथ्य को बिना पुष्टि के साझा करने से पीड़ित परिवार की परेशानी बढ़ सकती है।

परिवार ने स्त्रीधन और एलिमनी के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा है कि दोनों को एक ही मानना उचित नहीं है। उनका कहना है कि दिव्या के मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया को उसके वास्तविक संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद तस्वीर होगी साफ

फिलहाल दिव्या मिश्रा मर्डर केस में पुलिस कई स्तरों पर जांच कर रही है। हथियारों की फॉरेंसिक जांच, वैवाहिक विवाद की पड़ताल, आर्थिक लेन-देन और घटना से पहले की परिस्थितियों को जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां समझने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं, दिव्या के परिवार की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब भी जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा। विशेष रूप से मानस के पास हथियारों की उपलब्धता और उनके स्रोत की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, दिव्या मिश्रा मर्डर केस में 1.5 करोड़ रुपये की कथित एलिमनी को लेकर परिवार ने सोशल मीडिया के दावों को गलत बताया है। दूसरी ओर, हथियारों की बरामदगी और उनके स्रोत को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं। अब पुलिस की फॉरेंसिक और अन्य जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं और वारदात से जुड़े तमाम सवालों के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।

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