इटावा के शीतला देवी नर्सिंग होम में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

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रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान

इटावा: महेरा चुंगी स्थित निजी शीतला देवी नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान ऑपरेशन के बाद 30 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अस्पताल के पंजीकरण और नवीनीकरण को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग में पूर्व में पंजीकरण था, लेकिन इस वर्ष उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नवीनीकरण के बिना अस्पताल में ऑपरेशन किस चिकित्सक या सर्जन द्वारा किया गया।

जानकारी के मुताबिक, महिला शालू (30) को प्रसव के लिए महेरा चुंगी स्थित शीतला देवी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, गर्भावस्था करीब सात माह 15 दिन की थी। अस्पताल में प्रसव के लिए ऑपरेशन किया गया, जिसके दौरान दो बच्चों का जन्म हुआ। ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी और कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि महिला की हालत ऑपरेशन के बाद गंभीर हुई थी तो उसे समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। हालांकि, महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या रही, इसका स्पष्ट पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित चिकित्सकीय जांच के बाद ही चल सकेगा।

अस्पताल के नवीनीकरण को लेकर उठे सवाल

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अस्पताल के पंजीकरण और नवीनीकरण को लेकर सामने आया है। परिजनों का दावा है कि शीतला देवी नर्सिंग होम का स्वास्थ्य विभाग में पूर्व में पंजीकरण हुआ था, लेकिन इस वर्ष उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। ऐसे में यह जांच का विषय है कि यदि अस्पताल का पंजीकरण नवीनीकृत नहीं था तो वहां मरीजों का इलाज और प्रसव संबंधी ऑपरेशन किस आधार पर किए जा रहे थे।

परिजनों ने यह भी सवाल उठाया है कि महिला का ऑपरेशन किस सर्जन ने किया था और संबंधित चिकित्सक की अस्पताल में भूमिका क्या थी। साथ ही यह भी जांच की मांग की गई है कि ऑपरेशन के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्थाएं और मानक पूरे किए गए थे या नहीं।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल का पंजीकरण किस स्थिति में था और वहां उपचार की अनुमति से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

परिजनों के पहुंचने पर स्टाफ के फरार होने का आरोप

महिला की मौत के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उनके पहुंचने के बाद अस्पताल का स्टाफ मौके से चला गया। इससे परिवार के लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मामले की जानकारी और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की।

घटना के बाद परिजनों ने मामले की सूचना थाना कोतवाली पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर महिला की मौत के कारणों की जांच आगे बढ़ेगी।

जांच के बाद सामने आएगी मौत की वजह

महिला की मौत के मामले में फिलहाल दो प्रमुख पहलू जांच के केंद्र में हैं। पहला, ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। दूसरा, अस्पताल के पंजीकरण और नवीनीकरण की स्थिति क्या थी और यदि नवीनीकरण लंबित था तो अस्पताल में उपचार एवं ऑपरेशन किस आधार पर किए जा रहे थे।

इसके अलावा, ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक की योग्यता, अस्पताल में उनकी नियुक्ति अथवा संबद्धता और उपचार से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच आवश्यक होगी। यदि जांच में किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

परिवार ने की कार्रवाई की मांग

महिला के पति और अन्य परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात का जवाब मिलना चाहिए कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत क्यों बिगड़ी और उसे उचित उपचार क्यों नहीं मिल सका। इसके साथ ही परिवार ने अस्पताल के पंजीकरण और नवीनीकरण की स्थिति की भी जांच कराने की मांग की है।

परिजनों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के दस्तावेजों की जांच करे और यह पता लगाए कि घटना के समय अस्पताल को मरीजों के उपचार और ऑपरेशन की अनुमति थी या नहीं। साथ ही, ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक और उपचार में शामिल मेडिकल स्टाफ की भूमिका की भी जांच की जाए।

स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी नजर

इस पूरे मामले में अब स्वास्थ्य विभाग की भूमिका अहम हो गई है। यदि अस्पताल के पंजीकरण और नवीनीकरण को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं, महिला की मौत के कारणों को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण साक्ष्य होगी।

फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। महिला की मौत को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।

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