कानपुर नगर निगम में अवैध वसूली और ठेकों में अनियमितता पर बड़ी कार्रवाई, ₹100 करोड़ के टेंडर निरस्त
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर। नगर निगम में कथित अवैध वसूली, डराने-धमकाने और ठेका प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट कानपुर नगर श्री रघुबीर लाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस प्रकरण में अब तक कुल छह अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं। वहीं, दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अभियुक्त गोविंद शर्मा अभी फरार है। पुलिस के अनुसार उसकी लोकेशन राजस्थान में मिली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। जांच के दौरान नगर निगम के ठेकों को प्रभावित करने, ठेकेदारों पर दबाव बनाने तथा अवैध वसूली से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है।
छह अभियोग दर्ज, दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक नगर निगम में ठेका प्रक्रिया और कथित अवैध वसूली से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब तक छह अलग-अलग अभियोग दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही फरार अभियुक्त गोविंद शर्मा की तलाश जारी है।
पुलिस आयुक्त के अनुसार गोविंद शर्मा की लोकेशन राजस्थान में मिली है। ऐसे में पुलिस की टीमें उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयास कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि फरार अभियुक्त को जल्द गिरफ्तार कर मामले की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, पुलिस की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि मामले में सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य की जांच दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो और दोषी पाए जाने वालों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
ठेका प्रक्रिया में बदलाव, अब ऑनलाइन होगी ई-टेंडरिंग
प्रकरण की जांच के दौरान ठेकों को प्रभावित करने और ठेकेदारों पर दबाव बनाने के आरोपों से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद नगर निगम की पुरानी ठेका प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुरानी ठेका प्रक्रिया को समाप्त कर अब लंबित और आगामी कार्यों के लिए ऑनलाइन ई-टेंडरिंग व्यवस्था अपनाई जाएगी।
इस कदम का उद्देश्य ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी भी प्रकार के अनुचित प्रभाव की संभावना को कम करना है। ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से निविदाओं को अधिक पारदर्शी तरीके से संचालित करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा, ठेका प्रक्रिया में शामिल विभिन्न स्तरों पर निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
करीब ₹100 करोड़ के टेंडर होंगे निरस्त
प्रेसवार्ता में पुलिस आयुक्त ने बताया कि नगर निगम से जुड़े लगभग 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए जा रहे हैं। इन टेंडरों की जल्द ही रिटेंडरिंग की कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले को मामले में प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अब लंबित और आगामी कार्यों के लिए नई प्रक्रिया के तहत निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। इससे ठेकेदारों को समान अवसर मिलने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
दरअसल, किसी भी सरकारी निकाय में ठेका प्रक्रिया का सीधा संबंध सार्वजनिक धन और विकास कार्यों से होता है। इसलिए ऐसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन ई-टेंडरिंग को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
सात फर्मों को किया गया ब्लैकलिस्ट
मामले की जांच केवल अभियुक्तों तक सीमित नहीं है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां इस प्रकरण से जुड़ी फर्मों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं। जांच के दौरान लगभग सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितताओं में किन-किन फर्मों की भूमिका रही और उनके बीच किस प्रकार के वित्तीय लेन-देन हुए। इसके लिए बैंक खातों तथा अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि ठेकों से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति या संस्था को अनुचित लाभ तो नहीं पहुंचाया गया। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या अन्य किसी प्रकार की कानूनी गड़बड़ी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच
पुलिस आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की जांच से भी इनकार नहीं किया जाएगा। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इससे स्पष्ट है कि जांच का दायरा केवल बाहरी व्यक्तियों या फर्मों तक सीमित नहीं रखा गया है। संबंधित विभागों में निर्णय लेने की प्रक्रिया और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
हालांकि, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी। इससे जांच में निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई
पुलिस आयुक्त श्री रघुबीर लाल ने कहा कि पूरे मामले में माननीय मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार, अवैध वसूली या सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
वहीं, मामले में पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। पुरानी ठेका प्रक्रिया को समाप्त कर ऑनलाइन ई-टेंडरिंग लागू करने का निर्णय इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस की प्राथमिकता फरार अभियुक्त गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी के साथ-साथ मामले से जुड़े वित्तीय और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच पूरी करना है। दूसरी ओर, नगर निगम स्तर पर निरस्त किए गए लगभग 100 करोड़ रुपये के टेंडरों की रिटेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके अलावा, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य व्यक्तियों, फर्मों या अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

