वृंदावन में भागवत आचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री का हुआ नागरिक अभिनंदन, धार्मिक सेवा के लिए किया सम्मानित

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

वृंदावन/मथुरा: ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार तथा समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय भागवत आचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री का नागरिक अभिनंदन किया गया। भगवान श्री परशुराम शोभायात्रा समिति, मथुरा एवं ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जनजागरूकता समिति, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें अभिनंदन पत्र भेंट किया गया और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया।

डॉ. मनोज मोहन शास्त्री पिछले करीब 30 वर्षों से श्रीनाथ वृंदावन में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करते आ रहे हैं। इसके अलावा वह विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके इसी योगदान को देखते हुए दोनों समितियों की ओर से उनका नागरिक अभिनंदन किया गया।

धार्मिक सेवा और समाजसेवा के लिए सम्मान

समारोह के दौरान वक्ताओं ने डॉ. मनोज मोहन शास्त्री के धार्मिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से ब्रज की धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक संदेश को देश-विदेश तक पहुंचाने का कार्य किया है।

इस अवसर पर भगवान परशुराम शोभायात्रा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित रामगोपाल शर्मा ने कहा कि डॉ. मनोज मोहन शास्त्री अपनी कथा के माध्यम से देश और विदेश में ब्रज की महिमा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ब्रज क्षेत्र में आयोजित होने वाले विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से सहभागिता करते हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं के माध्यम से समाज में संस्कार, सेवा और सांस्कृतिक चेतना का संदेश पहुंचाने में डॉ. मनोज मोहन शास्त्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ब्रज की संस्कृति को आगे बढ़ाने में योगदान

समिति के संस्थापक अध्यक्ष विनोद दीक्षित ने कहा कि डॉ. मनोज मोहन शास्त्री उनकी टीम के प्रदेश संरक्षक होने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि डॉ. शास्त्री समय-समय पर समाजसेवा से जुड़े कार्यों में अपना योगदान देते रहते हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सरोकारों में उनकी सक्रियता को देखते हुए समाज की ओर से उनका नागरिक अभिनंदन किया गया।

विनोद दीक्षित ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान उसकी परंपराओं और सामाजिक सहभागिता से मजबूत होती है। ऐसे में धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय लोगों का सम्मान नई पीढ़ी को भी सेवा और संस्कृति के प्रति प्रेरित करता है।

‘ब्रज की धरोहर हैं डॉ. मनोज मोहन शास्त्री’

समिति के राष्ट्रीय महामंत्री बंसीलाल शर्मा ने डॉ. मनोज मोहन शास्त्री को ब्रज की धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने हमेशा ब्रज की संस्कृति, धर्म और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से धार्मिक संदेश लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ डॉ. शास्त्री ब्रज की आध्यात्मिक पहचान को भी व्यापक स्तर पर सामने रखने का कार्य कर रहे हैं।

बंसीलाल शर्मा के अनुसार, ब्रज केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले लोगों का सम्मान समाज के लिए प्रेरणादायक है।

30 वर्षों से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

डॉ. मनोज मोहन शास्त्री के सम्मान का एक प्रमुख कारण श्रीनाथ वृंदावन में करीब तीन दशकों से लगातार श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करना भी रहा। लंबे समय से कथा आयोजन के माध्यम से उन्होंने धार्मिक गतिविधियों को निरंतरता प्रदान की है।

श्रीमद्भागवत कथा भारतीय धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसके माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, धर्म और जीवन मूल्यों से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व माना जाता है।

डॉ. शास्त्री द्वारा लंबे समय से कथा आयोजन किए जाने के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और धर्मप्रेमी लोग इससे जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही ब्रज की धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने में भी इस तरह के आयोजनों की भूमिका रही है।

सम्मान से अभिभूत हुए डॉ. मनोज मोहन शास्त्री

नागरिक अभिनंदन के दौरान सम्मानित किए जाने के बाद डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की ओर से मिला सम्मान उनके लिए प्रेरणा का विषय है।

उन्होंने उपस्थित लोगों को अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना निरंतर जारी रहना चाहिए।

सम्मान समारोह में मौजूद रहे गणमान्य लोग

कार्यक्रम में ब्रज क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें संजय हरियाणा, हरीश शर्मा, ललित पंडित, अजय शर्मा और के.के. शर्मा सहित अन्य लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने डॉ. मनोज मोहन शास्त्री के धार्मिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की। साथ ही, उनके लंबे समय से किए जा रहे धार्मिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।

समारोह में सम्मान के रूप में उन्हें अभिनंदन पत्र प्रदान किया गया। इसके अलावा दुपट्टा पहनाकर उनका स्वागत किया गया। सम्मान समारोह के दौरान ब्रज की धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सहभागिता को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय भूमिका

डॉ. मनोज मोहन शास्त्री का धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों में भी जुड़ाव रहा है। आयोजकों के अनुसार, वह समय-समय पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता निभाते हैं।

इसी वजह से उनके सम्मान को केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित न मानते हुए सामाजिक योगदान से भी जोड़कर देखा गया। आयोजकों का कहना है कि समाज में सेवा, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

ब्रज की संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर जोर

वृंदावन में आयोजित यह नागरिक अभिनंदन समारोह ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रहा। वक्ताओं ने ब्रज की परंपराओं के संरक्षण और उनके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

समारोह के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में लंबे समय से योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने से समाज में सेवा की भावना को बढ़ावा मिलता है।

इस प्रकार, डॉ. मनोज मोहन शास्त्री का नागरिक अभिनंदन उनके करीब 30 वर्षों के श्रीमद्भागवत कथा आयोजन, ब्रज की संस्कृति के प्रचार-प्रसार और सामाजिक गतिविधियों में योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके प्रयासों को आगे भी जारी रखने की शुभकामनाएं दीं।

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