कानपुर में 15 वर्ष से फरार ₹50 हजार का इनामी अपराधी गिरफ्तार, छह फर्जी पहचान से छिपा था, जानिए कौन है ?

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रिपोर्ट- सर्वेश सोनू शर्मा 

कानपुर: कानपुर पुलिस को शातिर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है। थाना बर्रा से वांछित और ₹50 हजार के इनामी अभियुक्त को पुलिस टीम ने करीब 15 वर्षों बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से अपनी असली पहचान छिपाकर अलग-अलग नाम और पतों का इस्तेमाल कर रहा था। उसके खिलाफ फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी से जुड़े करीब 17 अभियोग दर्ज बताए गए हैं।

पुलिस की इस कार्रवाई में तकनीकी संसाधनों और फेस रिकग्निशन तकनीक की अहम भूमिका रही। जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया। इसके बाद उसकी पहचान की पुष्टि करते हुए पुलिस टीम ने उसे रामा देवी चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

करीब 15 वर्षों से पुलिस को थी तलाश

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अभियुक्त लंबे समय से फरार चल रहा था। वह अपनी पहचान बदलकर पुलिस की नजर से बचने का प्रयास कर रहा था। इस दौरान उसने अलग-अलग नाम और पते अपनाए। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी छह अलग-अलग नाम और पतों पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।

ऐसे में उसकी वास्तविक पहचान तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, पुलिस टीम ने तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसके साथ ही फेस रिकग्निशन तकनीक की मदद से संदिग्ध व्यक्ति की पहचान का मिलान किया गया। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

फर्जी दस्तावेजों से बदलता रहा पहचान

जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नाम और पते इस्तेमाल किए। बताया जा रहा है कि वह फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था।

पुलिस के लिए ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि आरोपी की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड अलग-अलग नामों में सामने आते हैं। इसलिए केवल पारंपरिक पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर उसकी तलाश करना मुश्किल हो सकता है। इस मामले में तकनीकी जांच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस टीम ने उपलब्ध जानकारी का तकनीकी विश्लेषण किया और संदिग्ध की पहचान को पुराने रिकॉर्ड से जोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद फेस रिकग्निशन के माध्यम से उसकी पहचान की पुष्टि की गई। परिणामस्वरूप पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही।

वर्ष 2009 से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह से जुड़ने का आरोप

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त वर्ष 2009 से लोन दिलाने के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह से जुड़ा हुआ था। आरोप है कि गिरोह लोगों को लोन दिलाने का भरोसा देकर उनके साथ धोखाधड़ी करता था। इस दौरान लोगों से विभिन्न प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के नाम पर धनराशि लेने की बात भी जांच में सामने आई है।

हालांकि, मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और उसकी गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड को भी खंगालना शुरू कर दिया है।

इसके अलावा, पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने लंबे समय तक किन-किन स्थानों पर रहकर अपनी पहचान छिपाई और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। जांच के दौरान उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए नाम, पते और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।

करीब 17 मुकदमों का रिकॉर्ड

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध फर्जीवाड़ा एवं धोखाधड़ी के करीब 17 अभियोग पंजीकृत हैं। इनमें से कई मामले लोगों को लोन दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी से जुड़े बताए जा रहे हैं।

इतने मामलों में वांछित होने के बावजूद आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी को पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब उसके आपराधिक इतिहास से जुड़े रिकॉर्ड को एकत्र कर रही है, ताकि पुराने मामलों में भी आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

तकनीक बनी गिरफ्तारी का अहम आधार

इस गिरफ्तारी में पुलिस की तकनीकी क्षमता एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में सामने आई है। वर्तमान समय में अपराधियों की पहचान और तलाश में तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। फेस रिकग्निशन जैसी तकनीक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान को उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाने में पुलिस की मदद करती है।

इस मामले में भी तकनीकी जानकारी और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के बीच तालमेल स्थापित कर पुलिस ने आरोपी तक पहुंच बनाई। इसके बाद रामा देवी चौराहे के पास उसकी मौजूदगी की जानकारी मिलने पर टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि लंबे समय से फरार आरोपियों की तलाश में तकनीकी जांच के साथ-साथ पुराने रिकॉर्ड का विश्लेषण कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

छह अलग-अलग पहचान के जरिए बचता रहा आरोपी

पुलिस जांच में आरोपी द्वारा छह अलग-अलग नाम और पते इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। अलग-अलग पहचान के कारण उसके पुराने रिकॉर्ड को वर्तमान गतिविधियों से जोड़ना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुलिस टीम ने तकनीकी माध्यमों से उसकी वास्तविक पहचान का पता लगाया।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन फर्जी पहचान और दस्तावेजों को तैयार करने में आरोपी को किसी अन्य व्यक्ति या समूह की मदद मिली थी या नहीं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

रामा देवी चौराहे के पास हुई गिरफ्तारी

पुलिस टीम ने आरोपी को रामा देवी चौराहे के पास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुराने मामलों और उसकी गतिविधियों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी जुटाई जा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार और वांछित आरोपियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विशेष रूप से ऐसे आरोपियों की तलाश की जा रही है जो लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर हैं और अपनी पहचान छिपाकर रह रहे हैं।

पुलिस उपायुक्त दक्षिण श्री दीपेंद्र नाथ चौधरी ने इस कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी। उनके अनुसार, पुलिस टीम ने तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से वांछित आरोपी की पहचान सुनिश्चित की और उसे गिरफ्तार किया।पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ करीब 17 मामले दर्ज हैं और वह छह अलग-अलग नाम-पते के आधार पर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।

 

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