कानपुर नौबस्ता थाने में युवक के टॉयलेट क्लीनर पीने का मामला, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्ट- विवेक कृष्ण दीक्षित
कानपुर। कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र में एक युवक के थाने में टॉयलेट क्लीनर पीने के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद युवक की हालत लगातार गंभीर बनी हुई है और वह हैलट अस्पताल के आईसीयू में उपचाराधीन बताया जा रहा है। वहीं, युवक के परिजनों ने मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने युवक के साथ थाने में कथित तौर पर मारपीट और प्रताड़ना की तथा उसे जबरन कोई ज्वलनशील पदार्थ पिलाया गया। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से बताया गया है कि युवक ने थाने में बाथरूम जाने का बहाना बनाया और वहां जाकर टॉयलेट क्लीनर पी लिया। ऐसे में पुलिस और परिजनों के आरोपों के बीच घटना की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रेम प्रसंग को लेकर थाने पहुंचा था मामला
मिली जानकारी के अनुसार, 19 अगस्त को नौबस्ता थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती से कथित प्रेम प्रसंग को लेकर शिकायत सामने आई थी। इसी मामले में पुलिस ने आशीष द्विवेदी (40) उर्फ पुल्ली पंडित को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था।
परिजनों के अनुसार, आशीष और संबंधित युवती के बीच पहले से बातचीत होती थी। युवती की शादी होने के बाद भी दोनों के संपर्क में रहने की बात सामने आई थी। आरोप है कि जब युवती के पति और ससुर को इस संबंध में जानकारी हुई तो उन्होंने नौबस्ता थाने में शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने आशीष को थाने बुलाया।
परिवार का दावा है कि इसी शिकायत के सिलसिले में आशीष को पुलिस थाने लेकर गई थी। कुछ समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ने की सूचना परिजनों को मिली। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस का दावा- बाथरूम में जाकर युवक ने पीया टॉयलेट क्लीनर
इस मामले में पुलिस की ओर से बताया गया है कि आशीष को शिकायत के संबंध में थाने लाया गया था। पुलिस के अनुसार, युवक ने बाथरूम जाने की बात कही और वहां जाकर कथित तौर पर टॉयलेट क्लीनर पी लिया।
पुलिस के इस दावे के बाद घटना को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि थाने के भीतर युवक की तबीयत किस परिस्थिति में बिगड़ी और घटना के समय वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी। वहीं, परिजनों के आरोपों को देखते हुए यह भी जरूरी है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए।
परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
आशीष के भाई का आरोप है कि युवती के पति और ससुर की शिकायत के बाद पुलिस ने उसके भाई के साथ कथित तौर पर ज्यादती की। परिवार का दावा है कि आशीष को थाने में प्रताड़ित किया गया और उसे जबरन कोई ज्वलनशील पदार्थ पिलाने का प्रयास किया गया।
परिजनों ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में पुलिस या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों को अभी आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का सामने आना आवश्यक है।
हैलट के आईसीयू में चल रहा इलाज
घटना के बाद आशीष को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक उसकी हालत गंभीर है और वह हैलट अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। परिवार लगातार उसके बेहतर इलाज और न्याय की मांग कर रहा है।
युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल रिपोर्ट भी इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डॉक्टरों की रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि युवक ने वास्तव में कौन सा पदार्थ ग्रहण किया था और उसके शरीर पर उसका क्या प्रभाव पड़ा। इसके साथ ही, यदि किसी प्रकार की चोट या अन्य शारीरिक नुकसान की बात सामने आती है तो उसका भी चिकित्सकीय रिकॉर्ड जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
नौबस्ता थाने से जुड़े इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर है। एक तरफ पुलिस का कहना है कि युवक ने बाथरूम में जाकर टॉयलेट क्लीनर पी लिया, जबकि दूसरी तरफ परिजन पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
ऐसी स्थिति में निष्पक्ष जांच के लिए थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के बयान, युवक के मेडिकल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा, घटना से पहले और बाद में युवक के संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ भी मामले की कड़ियों को जोड़ने में मदद कर सकती है।
यदि जांच में परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि पुलिस का पक्ष जांच में सही साबित होता है तो घटना को लेकर फैल रही किसी भी गलतफहमी को दूर किया जा सकेगा।
परिवार ने की न्याय की मांग
आशीष के परिवार का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य अपने परिजन को बेहतर उपचार दिलाना और घटना की सच्चाई सामने लाना है। परिवार ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही या गलत भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

