बहराइच में वन विभाग की तत्परता से बची 5 जंगली हाथियों के कुनबे की जान
रिपोर्ट- महेश चन्द्र गुप्ता
बहराइच। जिले के कतर्नियाघाट वन क्षेत्र में वन विभाग की तत्परता और सिंचाई विभाग के सहयोग से पांच जंगली हाथियों के कुनबे को सुरक्षित बचा लिया गया। कौड़ियाला नदी के गेरुआ नदी क्षेत्र में तेज बहाव के बीच हाथियों का झुंड बहते हुए गिरजापुरी बैराज की ओर पहुंच रहा था। इस झुंड में तीन वयस्क हाथियों के साथ दो नन्हे शावक भी शामिल थे। नदी का बहाव तेज होने के कारण शावकों के लिए खुद को संभाल पाना मुश्किल हो रहा था।
जानकारी के मुताबिक, कतर्नियाघाट रेंज मुख्यालय को कैलाशपुरी बैरियर के माध्यम से वायरलेस संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में बताया गया कि कौड़ियाला नदी में पानी का बहाव काफी तेज है और पांच जंगली हाथियों का झुंड नदी के प्रवाह के साथ गिरजापुरी बैराज की दिशा में बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय हो गए तथा मौके की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई।
तेज बहाव के बीच फंसे थे दो नन्हे शावक
नदी में पानी का बहाव अत्यधिक तेज होने के कारण दो नन्हे हाथी शावक अपने आपको संभाल नहीं पा रहे थे। शावकों को सुरक्षित रखने के प्रयास में वयस्क हाथी भी उनके आसपास बने रहे और तेज धारा के बीच लगातार उन्हें सुरक्षित दिशा में ले जाने का प्रयास करते रहे। ऐसे समय में वन विभाग की टीम ने हालात पर नजर बनाए रखी और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी की।
वयस्क हाथियों का अपने शावकों को सुरक्षित रखने का प्रयास इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। नदी का बहाव कम होने तक हाथियों का झुंड पानी के बीच संघर्ष करता रहा। हालांकि, कुछ समय बाद नदी का जलस्तर स्थिर हुआ और पानी की गति भी धीमी पड़ने लगी। इसके बाद वयस्क हाथियों ने स्थिति को संभाल लिया और दोनों शावकों को सुरक्षित दिशा की ओर ले जाने में सफलता प्राप्त की।
जलस्तर कम होते ही मिली राहत
जलस्तर स्थिर होने और बहाव कम होने के बाद हाथियों का कुनबा धीरे-धीरे नदी क्षेत्र से आगे बढ़ा। इसी दौरान झुंड गिरजापुरी बैराज के गेट के समीप पहुंच गया। बैराज के आसपास हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम ने बेहद सावधानी के साथ आगे की रणनीति तैयार की।वन कर्मियों ने हाथियों को किसी तरह की परेशानी पहुंचाए बिना उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्र की ओर मोड़ने का प्रयास किया। इसके लिए नियंत्रित तरीके से ‘हांका’ किया गया। वन विभाग के कर्मचारियों ने शोर और आवाजों के माध्यम से हाथियों की दिशा को सघन वन क्षेत्र की ओर मोड़ा।
वन विभाग की सूझबूझ से जंगल की ओर लौटा कुनबा
वन विभाग की टीम की रणनीति का असर हुआ और हाथियों का पूरा झुंड बैराज क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए पास के घने जंगल की ओर चला गया। इस दौरान वन कर्मियों ने विशेष सावधानी बरती ताकि हाथियों को किसी प्रकार का तनाव न हो और वे स्वाभाविक रूप से सुरक्षित वन क्षेत्र की ओर लौट सकें।वन विभाग के अनुसार, हाथियों के जंगल में प्रवेश करने के बाद भी उनकी निगरानी जारी रखी जा रही है। टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि हाथियों का कुनबा सुरक्षित रहे और दोबारा नदी या मानव आबादी के नजदीक किसी जोखिम वाली स्थिति में न पहुंचे।
सिंचाई विभाग के सहयोग से टली बड़ी अनहोनी
इस पूरे बचाव प्रयास में वन विभाग के साथ सिंचाई विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। समय पर मिली जानकारी और आपसी समन्वय के कारण स्थिति पर नजर बनाए रखना संभव हुआ। संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के चलते हाथियों के झुंड को सुरक्षित दिशा में ले जाने में मदद मिली।
दरअसल, वन्यजीवों के लिए नदी और जंगल का प्राकृतिक वातावरण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव की स्थिति में जंगल में विचरण करने वाले वन्यजीवों के सामने कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। ऐसे में वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया और स्थानीय स्तर पर विभागीय समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
लगातार निगरानी में है हाथियों का कुनबा
हाथियों के सुरक्षित जंगल में पहुंचने के बाद वन विभाग के कर्मचारी लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। निगरानी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झुंड दोबारा तेज बहाव वाले नदी क्षेत्र की ओर न बढ़े और प्राकृतिक वन क्षेत्र में सुरक्षित बना रहे।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि वन्यजीव संरक्षण के लिए समय पर सूचना, विभागीय समन्वय और मौके पर मौजूद कर्मचारियों की सूझबूझ कितनी महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते सूचना नहीं मिलती और वन विभाग की टीम सक्रिय नहीं होती, तो स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती थी।

