सहारनपुर में सितंबर में सियासी संग्राम, जयंत-अखिलेश की रैलियों से गरमाएगा वेस्ट यूपी का चुनावी माहौल
Digital UP News Desk
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में सितंबर का महीना बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। सहारनपुर में तीन सितंबर को राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की रैली होगी। इसके ठीक तीन दिन बाद छह सितंबर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सहारनपुर में जनता के बीच पहुंचेंगे। दोनों प्रमुख नेताओं की लगातार होने वाली रैलियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते राजनीतिक समीकरणों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
खास बात यह है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान के बाद रालोद और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ऐसे में जयंत सिंह की तीन सितंबर की रैली और उसके बाद अखिलेश यादव की छह सितंबर की सभा को सियासी तौर पर काफी अहम माना जा रहा है। दोनों दल अपनी-अपनी रैली को सफल बनाने के लिए संगठन स्तर पर पूरी ताकत लगा रहे हैं।
‘चवन्नी’ वाले बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक गर्मी
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से जिसे रुपया बना दिया, वे भी छोड़कर चले गए’ वाले बयान के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। रालोद ने इस बयान को जाट समाज के सम्मान से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, समाजवादी पार्टी भी लगातार अपने राजनीतिक तर्कों के साथ इस मुद्दे को सामने रख रही है।
ऐसे में अब सबकी नजर तीन सितंबर को सहारनपुर में होने वाली जयंत सिंह की रैली पर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जाटलैंड में जयंत सिंह की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि वह इस रैली के मंच से अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकते हैं।
रालोद की ओर से रैली की तैयारियों को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं। बिजनौर सांसद एवं रालोद के राष्ट्रीय महासचिव चंदन चौहान समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता तैयारियों में जुटे हैं। पार्टी का प्रयास है कि सहारनपुर की इस रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी हो।
तीन सितंबर को जयंत सिंह की रैली पर टिकी नजर
जयंत सिंह की सहारनपुर रैली इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘चवन्नी’ बयान के बाद उनकी पहली बड़ी सभा होगी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, रालोद इस रैली के जरिए संगठन की ताकत और अपने सामाजिक आधार को मजबूत संदेश देने की कोशिश कर सकता है।
संभावना जताई जा रही है कि जयंत सिंह अपने भाषण में किसानों, युवाओं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे सकते हैं। इसके अलावा सपा के साथ राजनीतिक रिश्तों और हालिया बयानबाजी पर भी उनका रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रालोद समर्थकों की नजर इस बात पर भी होगी कि जयंत सिंह ‘चवन्नी’ वाले बयान को किस तरह राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश करते हैं। यदि जयंत इस मुद्दे को सीधे चुनावी राजनीति से जोड़ते हैं तो आने वाले दिनों में सपा और रालोद के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
छह सितंबर को अखिलेश यादव की ‘जनता की अदालत’
जयंत सिंह की रैली के तीन दिन बाद छह सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सहारनपुर पहुंचेंगे। सपा ने इस कार्यक्रम को ‘युवा योद्धा सम्मेलन’ का नाम दिया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, सम्मेलन में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।
रैली के आयोजक और सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसेन का दावा है कि छह सितंबर का कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। वहीं, सपा के प्रदेश सचिव चौधरी दिनेश गुर्जर के अनुसार, सम्मेलन में युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी।
सपा नेताओं का मानना है कि यह कार्यक्रम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके जरिए अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को चुनावी तैयारी के लिए सक्रिय करने का संदेश दे सकते हैं।
बेरोजगारी, किसान और महंगाई पर फोकस संभव
अखिलेश यादव की सहारनपुर रैली में बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महंगाई, कानून-व्यवस्था और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। सपा इन मुद्दों के जरिए भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
इसके साथ ही, ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर पैदा हुई राजनीतिक स्थिति पर भी अखिलेश यादव की ओर से प्रतिक्रिया दिए जाने की संभावना है। सपा नेताओं का दावा है कि अखिलेश इस मुद्दे पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती से अपना पक्ष स्पष्ट कर सकते हैं।
हालांकि, रैली में अखिलेश यादव का पूरा राजनीतिक संदेश क्या होगा, यह उनके भाषण के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पार्टी संगठन इसे बड़े युवा सम्मेलन के रूप में प्रचारित कर रहा है।
तीन सितंबर की रैली के बाद बदलेगी रणनीति?
राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि छह सितंबर की सपा रैली का स्वरूप तीन सितंबर की जयंत सिंह की सभा के बाद किस तरह बदलता है। दरअसल, दोनों कार्यक्रमों के बीच केवल तीन दिन का अंतर है। ऐसे में एक दल की रैली के बाद दूसरे दल की रणनीति और बयानबाजी पर असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
सपा की ओर से भी संकेत दिए जा रहे हैं कि अखिलेश यादव तीन सितंबर की रैली और उससे जुड़े राजनीतिक संदेश का जवाब दे सकते हैं। दूसरी ओर, रालोद की कोशिश जयंत सिंह की सभा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत राजनीतिक उपस्थिति के तौर पर पेश करने की है।
इस तरह सहारनपुर में होने वाली दोनों रैलियां केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं रह गई हैं, बल्कि इन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संभावित राजनीतिक मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।
12 सितंबर को बुलंदशहर में अखिलेश की रैली
सहारनपुर के बाद अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में भी रैली करेंगे। यह कार्यक्रम 12 सितंबर को प्रस्तावित है और इसे भी ‘युवा योद्धा सम्मेलन’ का नाम दिया गया है।
बुलंदशहर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में अखिलेश यादव लगातार पश्चिमी यूपी में कार्यक्रम करके पार्टी के संगठन को मजबूत करने और युवाओं तक अपनी राजनीतिक बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि सहारनपुर और बुलंदशहर की रैलियों के जरिए सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने चुनावी अभियान को गति देने की तैयारी कर रही है।
17 सितंबर को सहारनपुर आएंगे आकाश आनंद
इसी राजनीतिक हलचल के बीच बहुजन समाज पार्टी भी सहारनपुर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है। बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे और पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद सितंबर में सहारनपुर में रैली करेंगे। यह रैली 17 सितंबर को प्रस्तावित है।
आकाश आनंद की यह उत्तर प्रदेश में तीसरी बड़ी रैली होगी। इससे पहले उन्होंने 13 अगस्त को हाथरस में रैली की थी और इसके बाद नोएडा में भी कार्यक्रम किया। अब सहारनपुर को उनके अगले बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के लिए चुना गया है।
सहारनपुर आकाश आनंद के राजनीतिक सफर के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2017 में सहारनपुर में हुई हिंसा के बाद मायावती जब वहां पहुंची थीं, तब आकाश आनंद पहली बार उनके साथ सार्वजनिक राजनीतिक मंच पर दिखाई दिए थे। इसके बाद वह बसपा की राजनीति में लगातार सक्रिय होते गए।
तीन बड़े नेताओं के कार्यक्रम से बढ़ेगी सियासी हलचल
सहारनपुर में सितंबर के दौरान जयंत सिंह, अखिलेश यादव और आकाश आनंद के कार्यक्रमों ने जिले की राजनीति को खासा महत्वपूर्ण बना दिया है। तीनों दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में हैं।
एक तरफ रालोद जयंत सिंह की रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, सपा अखिलेश यादव के युवा सम्मेलन के जरिए 2027 के चुनावी अभियान को गति देने की कोशिश कर रही है। वहीं, बसपा आकाश आनंद के कार्यक्रम के माध्यम से अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
कुल मिलाकर, सितंबर में सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। तीनों दलों के बड़े नेताओं के कार्यक्रमों से न केवल राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में नए सियासी समीकरणों के संकेत भी मिल सकते हैं।

