मुरादाबाद में मानव-तेंदुआ संघर्ष की समीक्षा, पीसीसीएफ वन्यजीव ने ठाकुरद्वारा क्षेत्र का किया निरीक्षण

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रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद 

मुरादाबाद: जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में मानव-तेंदुआ संघर्ष की स्थिति और उससे निपटने के लिए वन विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, उत्तर प्रदेश अनुराधा वेमूरी ने क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित गांवों का दौरा कर रेस्क्यू अभियान की प्रगति, निगरानी व्यवस्था और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान पीसीसीएफ वन्यजीव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानव सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने, ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक करने और तेंदुए से जुड़ी किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

ठाकुरद्वारा रेंज के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमूरी ने जनपद मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा रेंज के अंतर्गत आने वाले प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम लालापुर पीपलसाना में स्थापित रेस्क्यू कैंप का भी भ्रमण किया।

रेस्क्यू कैंप पहुंचने के बाद उन्होंने अभियान में लगे वनकर्मियों से बातचीत की। अधिकारियों और कर्मचारियों से तेंदुए की गतिविधियों, रेस्क्यू अभियान की प्रगति और क्षेत्र में बनाए जा रहे सुरक्षा इंतजामों के बारे में जानकारी ली गई। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीणों से भी संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने गए।

इस दौरान वन विभाग की टीम ने क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रेस्क्यू कैंप में उपकरणों का निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान पीसीसीएफ वन्यजीव ने तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के लिए लगाए गए ट्रैप केज और ट्रैप कैमरों का निरीक्षण किया। उन्होंने वन्यजीव प्रतिकर्षण उपकरण ANIDER की कार्यप्रणाली के बारे में भी संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।

अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह जाना कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है और रेस्क्यू अभियान में इनकी क्या भूमिका है। उन्होंने अभियान में लगे कर्मचारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल का उद्देश्य तेंदुए की गतिविधियों को समझना और उसके आवागमन वाले क्षेत्रों की पहचान करना है। इससे रेस्क्यू टीम को अभियान की रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है।

विश्नोई समाज के सहयोग की सराहना

रेस्क्यू अभियान के दौरान स्थानीय स्तर पर मिल रहे सहयोग की भी पीसीसीएफ वन्यजीव ने सराहना की। विशेष रूप से उन्होंने विश्नोई समाज की ओर से किए जा रहे सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ग्रामीणों और सामाजिक समूहों का सहयोग वन विभाग के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। अधिकारियों ने भी स्थानीय लोगों से अपील की कि तेंदुए की गतिविधि से संबंधित किसी भी जानकारी को तत्काल वन विभाग तक पहुंचाएं।

साथ ही, ग्रामीणों को सलाह दी गई कि वे स्वयं तेंदुए को पकड़ने या उसके करीब जाने का प्रयास न करें। किसी भी सूचना की स्थिति में वन विभाग की टीम को जानकारी देना अधिक सुरक्षित विकल्प है।

ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के साथ बैठक

स्थलीय निरीक्षण के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में मानव-तेंदुआ संघर्ष की रोकथाम और जन-जागरूकता के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।

पीसीसीएफ वन्यजीव ने ग्राम प्रधान और ग्रामीणों से तेंदुए की गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। ग्रामीणों ने क्षेत्र की परिस्थितियों और तेंदुए की संभावित गतिविधियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इसके अलावा उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने सुझाव भी अधिकारियों के सामने रखे।

बैठक के दौरान ग्रामीणों को तेंदुए से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया गया। विशेष रूप से रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचने और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने पर जोर दिया गया।

प्रभावित गांवों में बढ़ाई जाएगी निगरानी

पीसीसीएफ वन्यजीव ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित गांवों में लगातार सतर्कता और निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तेंदुए से जुड़ी किसी भी सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके लिए वन विभाग की टीमों को क्षेत्र में सक्रिय रहने और स्थानीय लोगों के संपर्क में रहने को कहा गया है। निगरानी के साथ-साथ ग्रामीणों तक सही जानकारी पहुंचाना भी महत्वपूर्ण बताया गया।

वन विभाग की ओर से जन-जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को तेंदुए की गतिविधियों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी देना है।

सोलर लाइट और बिजली व्यवस्था पर भी जोर

ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित गांवों में पर्याप्त सोलर लाइट की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया।

रात के समय पर्याप्त रोशनी होने से ग्रामीणों को आवाजाही में सुविधा मिल सकती है। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए प्रभावित गांवों में प्रकाश व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पीसीसीएफ वन्यजीव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े इन उपायों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा प्राथमिकता

निरीक्षण के दौरान पीसीसीएफ वन्यजीव ने स्पष्ट किया कि रेस्क्यू अभियान प्रभावी होने के साथ-साथ सुरक्षित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करना और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में दोनों पक्षों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है। इसलिए वन विभाग की टीमों को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू अभियान संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और तेंदुए से संबंधित किसी भी सूचना को सीधे वन विभाग या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।

जागरूकता से कम हो सकता है संघर्ष

मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति को नियंत्रित करने में जन-जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि ग्रामीणों को वन्यजीवों की गतिविधियों और उनसे बचाव के तरीकों की सही जानकारी हो, तो जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसी उद्देश्य से वन विभाग प्रभावित गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दे रहा है। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि तेंदुआ दिखाई देने पर घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहें और तुरंत संबंधित टीम को सूचना दें।

वहीं, वन विभाग की टीम क्षेत्र में निगरानी और रेस्क्यू से जुड़े प्रयास लगातार जारी रखेगी। जरूरत के अनुसार ट्रैप कैमरों और अन्य उपकरणों की मदद से तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा

स्थलीय निरीक्षण के दौरान पी.पी. सिंह, मुख्य वन संरक्षक, रुहेलखंड जोन, बरेली, तथा आदर्श कुमार, वन संरक्षक, मुरादाबाद वृत्त सहित संबंधित वन अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने क्षेत्र की स्थिति और रेस्क्यू अभियान से संबंधित जानकारी साझा की।

कुल मिलाकर, ठाकुरद्वारा क्षेत्र में मानव-तेंदुआ संघर्ष की स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी, रेस्क्यू और जन-जागरूकता पर विशेष जोर दिया है। प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ ही प्रकाश व्यवस्था और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

वन विभाग की प्राथमिकता है कि तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। इसके लिए विभागीय टीमों के साथ स्थानीय लोगों का सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और जागरूकता अभियान को और मजबूत किए जाने की उम्मीद है।