मथुरा के गऊ घाट पर दिखा श्रमदान और पौधरोपण का नजारा: 250 से अधिक स्वयंसेवकों ने दिया संदेश
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: यमुना नदी की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जन जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार को मथुरा के गऊ घाट पर व्यापक स्वच्छता एवं पौधरोपण अभियान आयोजित किया गया। हार्टफुलनेस संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न शहरों से आए 250 से अधिक स्वयंसेवकों ने श्रमदान कर यमुना तट की सफाई की, पौधे लगाए और लोगों को स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
यह कार्यक्रम “हम सबने यह ठाना है, ब्रज को स्वच्छ बनाना है” महाअभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं था, बल्कि समाज में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और यमुना के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी था।
यमुना तट पर चला व्यापक स्वच्छता अभियान
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक श्रमदान से हुई। स्वयंसेवकों ने गऊ घाट और आसपास के क्षेत्र में फैले कचरे को एकत्र कर स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान एक ट्रॉली से अधिक कचरा एकत्र किया गया, जिसे निर्धारित स्थान पर पहुंचाया गया।
अभियान में शामिल स्वयंसेवकों ने बताया कि स्वच्छ यमुना केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को नदी और उसके घाटों की स्वच्छता बनाए रखने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
कई शहरों से पहुंचे स्वयंसेवक
इस अभियान की विशेष बात यह रही कि इसमें केवल मथुरा ही नहीं, बल्कि आगरा, भरतपुर, इगलास, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और अलीगढ़ सहित कई शहरों से आए स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
लगभग 250 से अधिक प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से श्रमदान कर यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
स्वच्छता अभियान के साथ-साथ पौधरोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक नगर आयुक्त राकेश त्यागी तथा उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र ने पौधे लगाकर हरित पर्यावरण का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच अधिक से अधिक पौधे लगाना समय की आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों की नियमित देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है।
यमुना संरक्षण में जनभागीदारी पर दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हार्टफुलनेस संस्था के समन्वयक निशांत शर्मा ने कहा कि यमुना नदी की स्वच्छता केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण कम करने का संकल्प ले, तो यमुना जैसी महत्वपूर्ण नदियों को स्वच्छ रखने का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
सूक्ष्म प्रदूषण और आध्यात्मिक कचरे पर जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यमुना में बढ़ते सूक्ष्म प्रदूषकों (Micro Pollutants) और आध्यात्मिक कचरे के विषय पर भी लोगों को जागरूक किया।
उन्होंने बताया कि पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कपड़े और अन्य अपशिष्ट पदार्थ यदि नदियों में प्रवाहित किए जाते हैं, तो इससे जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने की आवश्यकता है।
सिंगल-यूज प्लास्टिक से बचने की अपील
कार्यक्रम में अनुपम अग्रवाल ने लोगों से सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
यदि लोग कपड़े के बैग, पुनः उपयोग योग्य सामग्री और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाएं, तो प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी पर्यावरण अनुकूल आदतें अपनाने पर भी जोर दिया।
स्वच्छ ब्रज के निर्माण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान सभी स्वयंसेवकों ने स्वच्छ, हरित और दिव्य ब्रज के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जा सके।
समाज के विभिन्न वर्गों की रही भागीदारी
इस अवसर पर सुरेंद्र शर्मा, महेश, सुभाष, ऋषि तोमर, जे.पी. सिंह, संजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने मिलकर यह संदेश दिया कि समाज के विभिन्न वर्ग जब एक मंच पर आकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करते हैं, तो उसके सकारात्मक परिणाम दूरगामी होते हैं।
पर्यावरण संरक्षण में सामूहिक प्रयासों का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों की स्वच्छता, हरित क्षेत्र का विस्तार और प्रदूषण नियंत्रण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
इसी प्रकार के सामूहिक अभियान लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नियमित अभियान से मिलेगा स्थायी परिणाम
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, स्वच्छता और पौधारोपण अभियान तभी सफल माने जाते हैं जब उन्हें नियमित रूप से चलाया जाए। यदि समाज लगातार ऐसे कार्यक्रमों में भाग ले और पौधों की देखभाल के साथ स्वच्छता बनाए रखने की आदत विकसित करे, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी और सकारात्मक बदलाव संभव है।
मथुरा के गऊ घाट पर आयोजित श्रमदान, स्वच्छता और पौधरोपण अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि स्वच्छ यमुना और हरित ब्रज का सपना केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही साकार हो सकता है।
हार्टफुलनेस संस्था के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में 250 से अधिक स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी निभाकर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। यदि इसी प्रकार समाज, प्रशासन और सामाजिक संगठन मिलकर लगातार कार्य करते रहें, तो यमुना की स्वच्छता, हरित पर्यावरण और स्वच्छ ब्रज के लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

