वंदे मातरम विवाद पर BJP का कांग्रेस पर हमला, नितिन नवीन बोले नई मुस्लिम लीग बन गई
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने अपने पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो छंद गाने के अपने पुराने रुख को बरकरार रखने का फैसला किया है। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्र के स्वाभिमान से समझौता किया है। उन्होंने कांग्रेस को मौजूदा दौर की ‘नई मुस्लिम लीग’ तक कह दिया। नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस के फैसले को राष्ट्रगीत के प्रति अपमानजनक बताया।
कांग्रेस ने 1937 के फैसले को फिर दोहराया
दरअसल, कांग्रेस कार्यसमिति की बुधवार को हुई बैठक में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद पार्टी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि वह इस मामले में 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिए गए फैसले का पालन कर रही है।
कांग्रेस के इस निर्णय के पीछे ऐतिहासिक संदर्भ भी जुड़ा हुआ है। 1937 में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को ही सार्वजनिक और राजनीतिक आयोजनों के लिए अपनाने का निर्णय लिया था। उस समय गीत के बाद के हिस्सों को लेकर कुछ नेताओं और मुस्लिम समुदाय की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने शुरुआती दो छंदों को ही स्वीकार करने का फैसला किया था।
इस प्रकार कांग्रेस का मौजूदा फैसला उसके अनुसार किसी नए रुख की शुरुआत नहीं, बल्कि पुराने प्रस्ताव को दोहराना है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस फैसले ने एक बार फिर राष्ट्रगीत को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस के फैसले के सामने आते ही बीजेपी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि कांग्रेस ने कथित अपमान को अब अपनी नीति का हिस्सा बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने राजनीतिक हितों के लिए राष्ट्र के स्वाभिमान को नजरअंदाज कर रही है।
नितिन नवीन ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस ने अब ‘अपमान को प्रस्ताव का रूप दे दिया है’। उनके मुताबिक, कांग्रेस कार्यसमिति ने यह तय किया है कि पार्टी के मंचों पर ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। उन्होंने इसे कांग्रेस की सोच और राजनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए तीखी टिप्पणी की।
बीजेपी अध्यक्ष ने अपने बयान में यह भी कहा कि कुछ दिन पहले इसी तरह का विवाद एक व्यक्ति के आचरण को लेकर सामने आया था, जिसे कांग्रेस की ओर से महज संयोग बताकर टाल दिया गया था। नवीन का आरोप है कि अब वही बात पार्टी की नीति के रूप में सामने आ रही है।
‘राष्ट्र के स्वाभिमान को गिरवी रखने’ का आरोप
नितिन नवीन ने कांग्रेस पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्र के स्वाभिमान से समझौता किया है। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को स्वतंत्रता आंदोलन और देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों की भावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि इस गीत का भारतीय इतिहास में विशेष स्थान रहा है।
उन्होंने कहा कि इस गीत को लेकर देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में विशेष उत्साह और राष्ट्रीय भावना पैदा हुई थी। नवीन ने इसी ऐतिहासिक भावनात्मक जुड़ाव का हवाला देते हुए कांग्रेस के फैसले को निशाने पर लिया।
उनका आरोप है कि कांग्रेस का मौजूदा रुख राष्ट्रीय भावना की तुलना में राजनीतिक समीकरणों को अधिक महत्व देने का संकेत देता है। हालांकि, कांग्रेस अपने फैसले को 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव की निरंतरता के रूप में देख रही है।
नितिन नवीन ने कांग्रेस को बताया ‘नई मुस्लिम लीग’
बीजेपी अध्यक्ष ने अपने बयान में कांग्रेस पर सबसे तीखा हमला तब किया, जब उन्होंने पार्टी को ‘आज की नई मुस्लिम लीग’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के कारण राष्ट्रीय मुद्दों पर समझौता कर रही है।
यह बयान सामने आने के बाद ‘वंदे मातरम’ विवाद और अधिक राजनीतिक हो गया है। इससे पहले भी बीजेपी के कई नेता कांग्रेस के इस फैसले को लेकर उस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगा चुके हैं।
हालांकि, इस पूरे विवाद को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में देखने के बजाय इसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना भी जरूरी है। ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत है। वहीं, इसके विभिन्न छंदों को लेकर इतिहास में राजनीतिक और सामाजिक बहस भी होती रही है।
‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। देश के स्वतंत्रता संग्राम में इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ और इसने लोगों में राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
बाद में इसके कुछ हिस्सों की धार्मिक प्रतीकात्मकता को लेकर बहस हुई। इसी पृष्ठभूमि में 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने शुरुआती दो छंदों को सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए अपनाने का निर्णय लिया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी इस निर्णय का उल्लेख मिलता है।
इसके बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का दर्जा दिए जाने की घोषणा की थी। ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया।
विवाद की नई वजह क्या है?
मौजूदा विवाद की एक बड़ी वजह केंद्र की ओर से आधिकारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को लेकर सामने आया नया प्रोटोकॉल है। इसके समानांतर कांग्रेस ने अपने पार्टी कार्यक्रमों में 1937 के फैसले के अनुसार शुरुआती दो छंदों को ही गाने की बात कही है। यही अंतर अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
बीजेपी का कहना है कि राष्ट्रगीत के सम्मान में किसी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि वह अपने ऐतिहासिक निर्णय और सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पुराने प्रावधान का पालन कर रही है। इस तरह दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ने के आसार
‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल गीत के गायन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ राष्ट्रवाद, इतिहास, धर्मनिरपेक्षता और वोट बैंक की राजनीति जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। यही कारण है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस विषय को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।
बीजेपी कांग्रेस के फैसले को राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस इसे अपने 1937 के प्रस्ताव और ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, कांग्रेस अपने पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंद गाने के फैसले पर कायम है। वहीं, बीजेपी ने इस निर्णय के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। नितिन नवीन का ‘नई मुस्लिम लीग’ वाला बयान इस विवाद को और अधिक राजनीतिक बना चुका है।
कुल मिलाकर, वंदे मातरम विवाद ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में राष्ट्रगीत और उसके ऐतिहासिक संदर्भ को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर कांग्रेस अपने 1937 के फैसले को आधार बनाकर अपने रुख का बचाव कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे राष्ट्रभावना और देश के स्वाभिमान से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साध रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

