औरैया डबल मर्डर केस में कल आएगा फैसला, पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 11 आरोपी कटघरे में
रिपोर्ट – अंजुमन तिवारी
औरैया: औरैया के बहुचर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे हत्याकांड में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब फैसले के चरण में पहुंच गई है। मामले में पूर्व सपा एमएलसी और पूर्व मंत्री कमलेश पाठक समेत आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने के बाद 19 अगस्त 2026 को फैसला प्रस्तावित है। करीब छह साल से अधिक समय से चल रही इस कानूनी प्रक्रिया पर अब आरोपियों, पीड़ित परिवार और पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से बड़ी संख्या में गवाह पेश किए गए। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में निर्णय की स्थिति बनी है। हालांकि, अंतिम फैसला अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
गौरतलब है कि इसी प्रकरण से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में मार्च 2026 में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने कमलेश पाठक को छह वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। वहीं, अन्य आरोपियों को भी सजा दी गई थी। (AajTak)
पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर की जमीन से जुड़ा था विवाद
मामले की शुरुआत औरैया शहर के पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर की जमीन को लेकर विवाद से जुड़ी बताई जाती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मंदिर परिसर की जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद और मतभेद थे।
इसी विवाद के बीच मार्च 2020 में दोनों पक्षों के बीच हिंसक घटना हुई, जिसमें अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली लगने से मौत हो गई। घटना के बाद औरैया कोतवाली में कमलेश पाठक, उनके भाइयों और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। (Bhaskar)
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया और फिर न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।
11 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक और रामू पाठक समेत अन्य नाम शामिल थे।
आरोपियों में कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविंद्र चौबे उर्फ लल्ला, गनर अवनीश प्रताप सिंह और लवकुश सविता के नाम भी सामने आए थे। एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी सुनवाई किशोर न्यायालय में किए जाने की जानकारी दी गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। इसके बाद अब अदालत के फैसले की तारीख सामने आई है।
छह साल से अधिक समय से चल रही थी सुनवाई
इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी रही। स्क्रिप्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, करीब छह साल पांच महीने के दौरान 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और अभियोजन तथा बचाव पक्ष की ओर से कुल 72 गवाह न्यायालय में पेश हुए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछले करीब डेढ़ साल से विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट औरैया में सुनवाई प्रत्येक कार्यदिवस पर की गई। इसके चलते मुकदमे की सुनवाई को गति मिली और अब फैसला सुनाए जाने की स्थिति बनी है।
लंबी सुनवाई के दौरान दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ-साथ गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों पर अदालत ने विचार किया। अब इन सभी पहलुओं के आधार पर न्यायालय अपना निर्णय सुनाएगा।
कभी राजनीतिक रूप से करीबी बताए जाते थे दोनों पक्ष
इस मामले का एक पहलू राजनीतिक संबंधों से भी जुड़ा रहा है। बताया जाता है कि कभी कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच राजनीतिक स्तर पर करीबी संबंध थे। हालांकि, बाद में दोनों के बीच संबंधों में दूरी बढ़ती गई।
स्क्रिप्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए थे। इसके बाद कथित तौर पर राजनीतिक वर्चस्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच दूरी बढ़ती गई।
हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में आरोपों और घटनाक्रम की अंतिम पुष्टि अदालत के फैसले के आधार पर ही मानी जाती है। इसलिए राजनीतिक विवाद से जुड़े सभी पहलुओं को न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण होगा।
कमलेश पाठक का रहा है लंबा राजनीतिक सफर
कमलेश पाठक उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। वह विधायक और विधान परिषद सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। सपा सरकार के दौरान उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला था और उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष भी बनाया गया था।
वर्ष 2015 में वह समाजवादी पार्टी से विधान परिषद सदस्य चुने गए थे। इसके बाद औरैया की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक चर्चा में रहा।
हालांकि, वर्ष 2020 के दोहरे हत्याकांड के बाद उनका राजनीतिक और कानूनी जीवन पूरी तरह बदल गया। हत्या के मुकदमे के साथ-साथ उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
गैंगस्टर एक्ट मामले में मिल चुकी है सजा
डबल मर्डर प्रकरण के बाद पुलिस और प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। इस मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मार्च 2026 में कमलेश पाठक को छह वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
वहीं, उनके भाई संतोष पाठक और रामू पाठक समेत अन्य आरोपियों को भी पांच-पांच वर्ष की सजा और जुर्माने का दंड दिया गया था। गैंगस्टर मामले में गनर अवनीश प्रताप सिंह को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। (AajTak)
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गैंगस्टर एक्ट का फैसला और मूल दोहरे हत्याकांड का फैसला अलग न्यायिक कार्यवाहियां हैं। हत्या के मामले में अंतिम निर्णय संबंधित अदालत द्वारा ही दिया जाएगा। (Navbharat Times)
संपत्तियों पर भी हुई थी कार्रवाई
गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के दौरान प्रशासन की ओर से कमलेश पाठक और उनके परिवार से जुड़ी कुछ संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई को लेकर भी समय-समय पर मामला चर्चा में रहा।
हालांकि, संपत्ति संबंधी कार्रवाई और उससे जुड़े कानूनी मामलों की स्थिति अलग-अलग रही है। इसलिए इन मामलों को मूल दोहरे हत्याकांड के फैसले से अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
19 अगस्त के फैसले पर टिकी निगाहें
अब छह साल से अधिक समय बाद 19 अगस्त को प्रस्तावित फैसले ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयानों को न्यायालय किस रूप में देखता है।
पीड़ित परिवार लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार कर रहा है। वहीं, आरोपियों और उनके परिवारों की नजर भी अदालत के निर्णय पर है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत के फैसले के बाद ही कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल किसी भी आरोपी को दोषी या निर्दोष बताना उचित नहीं होगा।
फैसले से पहले जरूरी है न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान
दोहरे हत्याकांड जैसे गंभीर मामले में न्यायिक प्रक्रिया का निष्पक्ष और कानून के अनुसार पूरा होना महत्वपूर्ण है। अदालत के सामने अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला है।
अब अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और कानूनी दलीलों के आधार पर फैसला सुनाएगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन आरोपियों के खिलाफ क्या निर्णय आता है।
कुल मिलाकर, औरैया के चर्चित मंजुल चौबे-सुधा चौबे हत्याकांड की लंबी न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 19 अगस्त 2026 को प्रस्तावित फैसले को लेकर औरैया ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की निगाहें विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट पर हैं।

