ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण की 92वीं बोर्ड बैठक, मेडिकल हब और यूनिवर्सिटी टाउनशिप को मंजूरी

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ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की 92वीं बोर्ड बैठक में क्षेत्र के औद्योगिक, चिकित्सा, शिक्षा और शहरी विकास को गति देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए प्राधिकरण की अनुमानित आय 1,853.74 करोड़ रुपये रखी गई है, जो पिछले अनुमान की तुलना में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई गई है। वहीं, इसी अवधि के लिए कुल व्यय 3,690.64 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।

बोर्ड बैठक में सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में मेडिकल हब तथा यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके अलावा ताइवान की औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है। इन परियोजनाओं से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक निवेश के साथ-साथ चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

92वीं बोर्ड बैठक में लिए गए अहम फैसले

यमुना प्राधिकरण की 92वीं बोर्ड बैठक को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की आय और व्यय के साथ-साथ कई बड़ी विकास परियोजनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में 2026-27 के लिए अनुमानित आय 1,853.74 करोड़ रुपये रखी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह पिछले अनुमान की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर, प्राधिकरण ने इसी अवधि में कुल 3,690.64 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान रखा है।

इस बजट और विकास योजना के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा औद्योगिक एवं संस्थागत गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।

सेक्टर-13 और 14 में विकसित होगा मेडिकल हब

बोर्ड बैठक में सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में मेडिकल हब विकसित करने की योजना को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। इसके लिए करीब 500 एकड़ भूमि निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है।

मेडिकल हब विकसित होने के बाद इस क्षेत्र में अस्पताल, चिकित्सा संस्थान और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो सकता है, बल्कि बड़े चिकित्सा संस्थानों और निवेशकों के लिए भी क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से हो रहे औद्योगिक और शहरी विकास के बीच मेडिकल हब की योजना को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

480 एकड़ में बनेगी यूनिवर्सिटी टाउनशिप

मेडिकल हब के साथ ही शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 480 एकड़ भूमि पर यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना पर भी फैसला लिया गया है।

यूनिवर्सिटी टाउनशिप के विकसित होने से उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए एक संगठित क्षेत्र उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके साथ ही छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास की संभावना भी बढ़ेगी।

यदि योजना निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती है तो यमुना प्राधिकरण क्षेत्र भविष्य में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बन सकता है।

ताइवान की इंडस्ट्री के लिए 300 एकड़ भूमि

बोर्ड बैठक में विदेशी औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। ताइवान की इंडस्ट्री के लिए 300 एकड़ भूमि आवंटित करने की योजना को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

ताइवान की औद्योगिक इकाइयों के आने से क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए विकसित किया जा रहा है। ऐसे में विदेशी कंपनियों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की योजना क्षेत्र की औद्योगिक पहचान को और मजबूत कर सकती है।

सेक्टर-6 में भी 300 एकड़ भूमि आवंटन

इसके अलावा सेक्टर-6 में 300 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने की योजना पर भी निर्णय लिया गया है। इस भूमि का आवंटन औद्योगिक विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए किए जाने की जानकारी सामने आई है।

भूमि आवंटन से क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जगह उपलब्ध हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप निवेश बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

हालांकि, इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन, भूमि आवंटन और निर्माण की विस्तृत समयसीमा संबंधित विभागों की आगे की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

आय में 90 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान

यमुना प्राधिकरण की वित्तीय योजना में वर्ष 2026-27 के लिए आय का अनुमान 1,853.74 करोड़ रुपये रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह पिछले अनुमान की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि है।

आय में इस वृद्धि का असर प्राधिकरण की विकास योजनाओं पर भी दिखाई दे सकता है। अधिक राजस्व उपलब्ध होने से बुनियादी ढांचे, सड़क, औद्योगिक क्षेत्र, संस्थागत विकास और अन्य परियोजनाओं पर खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है।

हालांकि, प्रस्तावित आय और व्यय के आंकड़ों का वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन वर्ष के दौरान होने वाली प्राप्तियों और खर्च पर निर्भर करेगा।

3,690.64 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय

वर्ष 2026-27 के लिए प्राधिकरण ने कुल 3,690.64 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान रखा है। इस राशि का उपयोग विभिन्न विकास कार्यों और परियोजनाओं पर किया जाना प्रस्तावित है।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए सड़क, परिवहन, जल निकासी, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

ऐसे में आगामी वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित व्यय को क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

औद्योगिक विकास को मिलेगी गति

ताइवान की इंडस्ट्री के लिए भूमि आवंटन और सेक्टर-6 में भूमि उपलब्ध कराने के फैसले से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पहले से कई बड़े औद्योगिक और निवेश प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इसके अलावा क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आगामी परियोजनाओं के कारण निवेशकों की रुचि भी बढ़ रही है।

ऐसे में नई औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि उपलब्ध होने से क्षेत्र में विनिर्माण, सप्लाई चेन और अन्य सहायक उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

स्वास्थ्य और शिक्षा का नया केंद्र बनने की संभावना

मेडिकल हब और यूनिवर्सिटी टाउनशिप की योजनाओं को यदि समयबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है तो यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार हो सकता है।

500 एकड़ में मेडिकल हब और 480 एकड़ में यूनिवर्सिटी टाउनशिप का विकास बड़े स्तर की संस्थागत गतिविधियों को आकर्षित कर सकता है। इससे क्षेत्र में रोजगार, आवास और अन्य सहायक सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।

इसके साथ ही स्थानीय आबादी को बेहतर चिकित्सा और शिक्षा सुविधाएं मिलने की संभावना रहेगी।

क्षेत्र के भविष्य के विकास की तस्वीर

यमुना प्राधिकरण की 92वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों को क्षेत्र के भविष्य के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ओर जहां औद्योगिक निवेश बढ़ाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के लिए भी बड़े भूखंड विकसित किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय और व्यय के बड़े अनुमान भी प्राधिकरण की विकास योजनाओं के पैमाने को दर्शाते हैं।

आने वाले समय में इन योजनाओं के जमीन पर उतरने के साथ ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र की आर्थिक एवं शहरी गतिविधियों में और तेजी आने की उम्मीद की जा सकती है।

निवेश और रोजगार के नए अवसर

नई औद्योगिक परियोजनाओं के साथ मेडिकल हब और यूनिवर्सिटी टाउनशिप का विकास रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। निर्माण गतिविधियों से लेकर परियोजनाओं के संचालन तक विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बन सकती हैं।

इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों के आसपास परिवहन, आवास, खानपान, लॉजिस्टिक्स और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।

इस प्रकार, बोर्ड बैठक में लिए गए फैसले केवल भूमि आवंटन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और शहरी विकास पर भी पड़ सकता है।

आगे की प्रक्रिया होगी अहम

अब इन फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करना सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा। भूमि आवंटन, परियोजनाओं की योजना, निर्माण और समयबद्ध क्रियान्वयन के आधार पर ही इन योजनाओं का वास्तविक लाभ सामने आएगा।

कुल मिलाकर, यमुना प्राधिकरण की 92वीं बोर्ड बैठक में मेडिकल हब, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और औद्योगिक निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। 2026-27 के लिए 1,853.74 करोड़ रुपये की अनुमानित आय और 3,690.64 करोड़ रुपये के प्रस्तावित व्यय के साथ प्राधिकरण ने विकास का बड़ा खाका सामने रखा है। अब इन योजनाओं को जमीन पर उतारना अगली बड़ी चुनौती होगी।

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