अमित शाह ने अलवर से 17 जिलों को दी ₹6,453 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात
Digital UP News Desk
राजस्थान। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के अलवर में आयोजित कार्यक्रम से प्रदेश के 17 जिलों के लिए लगभग ₹6,453 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने किसान, पशुपालक, युवा और महिलाओं को केंद्र में रखकर सरकार की विकास योजनाओं और सहकारिता आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के लिए समाज के चार प्रमुख वर्गों युवा, गरीब, किसान और महिला को सशक्त बनाना आवश्यक है।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर लगातार काम कर रही है। उनके मुताबिक विकास का वास्तविक लाभ तभी व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है, जब गांव, किसान, पशुपालक, महिलाएं और युवा आर्थिक रूप से मजबूत हों। इसलिए सरकार की योजनाओं में रोजगार, कृषि, पशुपालन, डेयरी और सहकारिता को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
किसानों और पशुपालकों के लिए योजनाओं पर जोर
कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि एक ही मंच से किसानों के लिए किसान सम्मान निधि, पशुपालकों के लिए करीब 500 करोड़ रुपये की डेयरी व्यवस्था, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और माताओं-बहनों के लिए सरस डेयरी के विस्तार से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से किसानों को सीधे आर्थिक सहायता मिलती है। इससे कृषि क्षेत्र में निवेश और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है। वहीं, पशुपालन और डेयरी से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त साधन विकसित किए जा सकते हैं।
दरअसल, राजस्थान जैसे बड़े कृषि और पशुधन आधारित राज्य में डेयरी क्षेत्र का ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में सहकारी डेयरी व्यवस्था के विस्तार को रोजगार और आय के अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने सहकारी डेयरी व्यवस्था की संभावनाओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव डेयरी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने और नई पीढ़ी के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोलने की ताकत है।
उनके अनुसार सहकारिता का मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर बाजार, नियमित भुगतान और आर्थिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी का अवसर मिल सकता है।
इसके साथ ही डेयरी क्षेत्र में प्रसंस्करण, संग्रहण, परिवहन और विपणन जैसी गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार सहकारिता को केवल आर्थिक व्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास के एक महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
सात दिन में दूध का भुगतान मिलने की बात
अमित शाह ने सरस डेयरी के माध्यम से महिलाओं और दुग्ध उत्पादकों को होने वाले लाभ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरस डेयरी के माध्यम से राजस्थान की माताओं-बहनों को मात्र सात दिन में दूध का दाम मिल जाएगा।
उन्होंने इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। नियमित और समयबद्ध भुगतान से दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों को अपनी आय का बेहतर प्रबंधन करने में सहायता मिल सकती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से बड़ी संख्या में जुड़ी रहती हैं। ऐसे में डेयरी व्यवस्था का विस्तार उनके आर्थिक योगदान को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
इसके अलावा, संगठित डेयरी नेटवर्क के विस्तार से दूध के संग्रहण और विपणन की व्यवस्था अधिक प्रभावी बनाने की संभावना रहती है। इससे उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच बेहतर आपूर्ति तंत्र विकसित किया जा सकता है।
युवाओं के लिए रोजगार और नए अवसर
अमित शाह ने विकास के साथ रोजगार को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को अवसर देना जरूरी है। केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ाने होंगे।
इसी क्रम में ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। डेयरी, कृषि प्रसंस्करण, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और सहकारी संस्थाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए कई तरह के अवसर विकसित हो सकते हैं।
विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के विकल्प मिलने से शहरों की ओर पलायन का दबाव भी कम किया जा सकता है। इसलिए सहकारिता और ग्रामीण उद्योगों को मजबूत करना व्यापक आर्थिक विकास की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
17 जिलों में विकास परियोजनाओं का विस्तार
अलवर में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से राजस्थान के 17 जिलों के लिए ₹6,453 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। इन विकास कार्यों को राज्य में बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
विकास परियोजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में आवश्यक आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है। किसी भी राज्य के संतुलित विकास के लिए जरूरी है कि बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और छोटे जिलों में भी निवेश और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो।
अमित शाह ने इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के विकास प्रयासों को राजस्थान के व्यापक आर्थिक परिवर्तन से जोड़ते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना है तो युवा, गरीब, किसान और महिलाओं को सशक्त बनाना होगा।
उनके मुताबिक विकास का यह मॉडल केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज की व्यापक भागीदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। किसान और पशुपालक उत्पादन बढ़ाएं, महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी करें, युवा नए अवसरों का लाभ उठाएं और गरीब परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए—इसी समन्वित दृष्टिकोण से विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
इस दृष्टि से सहकारिता क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि सहकारी संस्थाएं स्थानीय स्तर पर लोगों को एक साथ जोड़कर सामूहिक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। डेयरी क्षेत्र में इसका प्रभाव सीधे तौर पर किसानों और पशुपालकों की आय से जुड़ सकता है।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
अलवर में आयोजित कार्यक्रम से राजस्थान के 17 जिलों के लिए घोषित विकास कार्यों और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी पहलों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां विकास परियोजनाओं के माध्यम से आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर जोर है, वहीं दूसरी ओर किसान, पशुपालक, महिला और युवा केंद्रित योजनाओं को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ा जा रहा है।
अमित शाह के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक विकास को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना जरूरी है। राजस्थान में सहकारी डेयरी के विस्तार, किसानों को आर्थिक सहायता, पशुपालकों के लिए व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को इसी व्यापक विकास दृष्टिकोण का हिस्सा बताया गया।

