श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: लोक अदालत में सुलह के प्रयास, हिंदू पक्ष ने रखा प्रस्ताव
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) के संदर्भ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शनिवार को मथुरा में विशेष लोक अदालत (सुलह वार्ता) आयोजित की गई। यह बैठक उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा के तत्वावधान में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-11) सुरेंद्र प्रसाद ने की।
सुलह वार्ता का उद्देश्य लंबित मामलों में आपसी सहमति के माध्यम से समाधान की संभावनाओं का पता लगाना था। बैठक में हिंदू पक्ष के कई वादी और उनके अधिवक्ता उपस्थित हुए। वहीं, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई प्रतिनिधि या पक्षकार बैठक में उपस्थित नहीं हुआ।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर आयोजित हुई सुलह वार्ता
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार यह बैठक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संचालित “समाधान समारोह-2026” की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे मामलों में, जहां संभव हो, न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना है।
प्राधिकरण के अनुसार, 21, 22 और 23 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तावित विशेष लोक अदालत से पहले राज्य और जिला स्तर पर ऐसे मामलों में सुलह की संभावनाएं तलाशने के लिए बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
हिंदू पक्ष रहा उपस्थित, मुस्लिम पक्ष अनुपस्थित
बैठक में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण से जुड़े हिंदू पक्ष के वादी और उनके अधिवक्ता उपस्थित रहे। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ।
इस कारण बैठक में केवल उपस्थित पक्ष की ओर से विचार और सुझाव रखे गए। हालांकि किसी भी संभावित समझौते के लिए दोनों पक्षों की भागीदारी आवश्यक मानी जाती है।
हिंदू पक्ष ने रखा अपना प्रस्ताव
प्रकरण से जुड़े अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हिंदू पक्ष ने सुलहवार्ता के दौरान अपना प्रस्ताव न्यायालय के समक्ष रखा।
उनके अनुसार हिंदू पक्ष का कहना था कि यदि मुस्लिम पक्ष विवादित स्थल पर अपने दावे से हटने और वहां स्थित ढांचे को हटाने पर सहमत होता है, तो मस्जिद निर्माण के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भूमि उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
यह प्रस्ताव हिंदू पक्ष की ओर से रखा गया है। इस पर मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया इस बैठक में उपलब्ध नहीं हो सकी क्योंकि उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था।
ऐतिहासिक तथ्यों का भी किया गया उल्लेख
महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, सुलहवार्ता के दौरान हिंदू पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान तकनीक के माध्यम से किसी भी संरचना को सुरक्षित रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की संभावना पर भी चर्चा की गई। हालांकि यह विचार हिंदू पक्ष की ओर से रखा गया प्रस्ताव है और इस पर अभी कोई न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है।
न्यायालय ने दर्ज की कार्यवाही
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार बैठक के दौरान न्यायालय ने उनकी बात सुनी और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई। संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए।
हालांकि इस बैठक का उद्देश्य अंतिम निर्णय देना नहीं था, बल्कि संभावित समझौते की दिशा में संवाद स्थापित करना था। अब आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जारी रहेगी।
अगस्त में सर्वोच्च न्यायालय में हो सकती है अगली सुनवाई
अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यदि जिला स्तर पर सुलह की कोई संभावना नहीं बनती है, तो मामला सर्वोच्च न्यायालय में निर्धारित तिथियों—21, 22 या 23 अगस्त—को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है।
हालांकि अंतिम सूचीकरण और सुनवाई की तिथि सर्वोच्च न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार तय होगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि लोक अदालत और सुलहवार्ता का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का आपसी सहमति से समाधान तलाशना है।
बैठक के दौरान सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा, श्रीमती अनीता सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने पक्षकारों को संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से विवादों के समाधान के लिए प्रेरित किया।
कई अधिवक्ता और प्रतिनिधि रहे मौजूद
सुलह वार्ता में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी, सुरेंद्र कुमार, कौशल किशोर ठाकुर जी महाराज, संत श्यामानंद जी महाराज, अजय सिंह, विजय बहादुर सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
इन सभी ने न्यायालय के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सुलह प्रक्रिया में भाग लिया।
संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक
यह मामला वर्तमान में न्यायिक विचाराधीन है। ऐसे मामलों में किसी भी पक्ष द्वारा दिए गए दावे या प्रस्ताव न्यायालय के अंतिम निर्णय का स्थान नहीं लेते।
इस समाचार में उल्लिखित विवादित स्थल से संबंधित प्रस्ताव हिंदू पक्ष की ओर से सुलह वार्ता के दौरान रखा गया कथित प्रस्ताव है। इस पर मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया बैठक में उपलब्ध नहीं हुई। यदि भविष्य में संबंधित पक्ष या उनके अधिवक्ताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो उसे भी समाचार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि पाठकों को संतुलित और तथ्यात्मक जानकारी मिल सके।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मथुरा में आयोजित विशेष लोक अदालत के दौरान सुलह की संभावनाओं पर विचार किया गया। बैठक में हिंदू पक्ष उपस्थित रहा और उसने विवाद के समाधान को लेकर अपना प्रस्ताव रखा, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
अब इस मामले की आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप चलेगी। यदि स्थानीय स्तर पर कोई सहमति नहीं बनती है, तो मामला निर्धारित तिथियों पर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आगे बढ़ सकता है। अंतिम निर्णय न्यायालय की विधिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

