आजमगढ़ में पोखरी खुदाई के दौरान किसान ने जमीन पर अतिक्रमण का लगाया आरोप, SDM से की मांग

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रिपोर्ट – पित्तेशवर कुमार 

आजमगढ़: जनपद के सदर तहसील अंतर्गत थाना मुबारकपुर क्षेत्र के ग्राम मोहब्बतपुर पूर्वी में सरकारी पोखरी की खुदाई के दौरान एक किसान ने अपनी पुश्तैनी भूमि पर अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगाया है। किसान का कहना है कि सरकारी विकास कार्य की आड़ में उसकी निजी भूमि की मेड़ काटकर उसे पोखरी में शामिल किया जा रहा है। इस संबंध में पीड़ित ने उपजिलाधिकारी (SDM) सदर को प्रार्थना-पत्र देकर भूमि की निष्पक्ष पैमाइश कराने, सीमांकन सुनिश्चित करने तथा जांच पूरी होने तक खुदाई का कार्य रोकने की मांग की है।

मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि संबंधित आरोप किसान की ओर से लगाए गए हैं। समाचार लिखे जाने तक ग्राम प्रधान अथवा अन्य संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी। तहसील प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

पढ़िए क्यों किसान ने लगाया भूमि पर कब्जे का आरोप

ग्राम मोहब्बतपुर पूर्वी निवासी दयाराम राजभर, पुत्र टिल्टू राजभर, का कहना है कि उनकी पुश्तैनी भूमि गाटा संख्या 1562 में दर्ज है। उनके अनुसार गांव में गाटा संख्या 1571 स्थित सरकारी पोखरी की खुदाई का कार्य चल रहा है, लेकिन इसी कार्य के दौरान उनकी निजी भूमि की सीमा से छेड़छाड़ की जा रही है।

दयाराम का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों तथा ग्राम प्रधान की कथित मिलीभगत से उनकी भूमि की मेड़ काटकर उसे पोखरी का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो उन्हें अपनी भूमि का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सरकारी विकास कार्य पर नहीं, सीमांकन पर है आपत्ति

पीड़ित किसान ने अपने प्रार्थना-पत्र में स्पष्ट किया है कि वह सरकारी विकास कार्य या पोखरी की खुदाई का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव के विकास और जल संरक्षण के लिए पोखरी का निर्माण आवश्यक हो सकता है, लेकिन यह कार्य किसी निजी भूमि को शामिल किए बिना और पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सबसे पहले गाटा संख्या 1562 की राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए। इसके बाद ही खुदाई का कार्य आगे बढ़ाया जाए, ताकि किसी भी किसान के साथ अन्याय न हो।

विरोध करने पर धमकी देने का भी लगाया आरोप

दयाराम राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने कथित रूप से अपनी भूमि पर हो रही खुदाई का विरोध किया, तब कुछ लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उनके अनुसार उन्हें डराने-धमकाने के साथ मारपीट का प्रयास भी किया गया।

इन आरोपों के बाद उन्होंने प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

SDM सदर को दिया गया प्रार्थना-पत्र

पीड़ित किसान ने पूरे मामले की जानकारी लिखित रूप में उपजिलाधिकारी (SDM) सदर को दी है। प्रार्थना-पत्र में उन्होंने अनुरोध किया है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में भूमि का सीमांकन कराया जाए और जांच पूरी होने तक खुदाई का कार्य रोक दिया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष पैमाइश हो जाती है, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना समाप्त हो जाएगी।

प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन

मामले की जानकारी मिलने के बाद तहसील प्रशासन ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए नियमानुसार जांच कराने का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की राजस्व अभिलेखों और स्थल निरीक्षण के आधार पर जांच की जाएगी।

यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या सीमा उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि खुदाई निर्धारित सीमा के भीतर पाई जाती है, तो विकास कार्य नियमानुसार जारी रहेगा।

भूमि विवादों में पैमाइश का महत्व

राजस्व विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों के समाधान के लिए सीमांकन (पैमाइश) सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इससे प्रत्येक गाटा की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो जाती है और भविष्य के विवादों को रोका जा सकता है।

जानकारों का कहना है कि किसी भी सरकारी निर्माण या विकास कार्य से पहले राजस्व अभिलेखों के अनुरूप सीमांकन कर लेना प्रशासन और स्थानीय नागरिकों दोनों के हित में होता है।

विकास और अधिकारों में संतुलन आवश्यक

ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत तालाब, पोखरी और जल संरक्षण से जुड़े कार्य पर्यावरण और जल प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि ऐसे कार्यों के दौरान यह भी आवश्यक है कि किसी भी नागरिक के वैध भूमि अधिकारों का उल्लंघन न हो।

इसी कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, राजस्व रिकॉर्ड का पालन और सभी संबंधित पक्षों की बात सुनना महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे विकास कार्य भी सुचारु रूप से आगे बढ़ते हैं और विवाद की संभावना भी कम होती है।

सभी पक्षों का पक्ष जानना है बेहद जरूरी

पत्रकारिता के स्थापित मानकों के अनुसार किसी भी विवादित मामले में सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना आवश्यक होता है। फिलहाल इस मामले में किसान की शिकायत और प्रशासन की प्रारंभिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

यदि भविष्य में ग्राम प्रधान, संबंधित अधिकारियों या अन्य पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए ताकि पाठकों को संतुलित और तथ्यात्मक जानकारी मिल सके।

आजमगढ़ के मुबारकपुर क्षेत्र के मोहब्बतपुर पूर्वी गांव में पोखरी खुदाई के दौरान भूमि विवाद का मामला सामने आया है। किसान दयाराम राजभर ने आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि को सरकारी पोखरी में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने SDM सदर से निष्पक्ष पैमाइश, सीमांकन और जांच पूरी होने तक खुदाई रोकने की मांग की है।

वहीं तहसील प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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