आजमगढ़ में हरितालिका तीज पर महिलाओं ने मनाया उत्सव, झूला और मेहंदी को लेकर दिखा उत्साह
रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार
आजमगढ़: हरितालिका तीज के अवसर पर शनिवार को शहर के पुरानी जेल के सामने स्थित मंदिर परिसर में महिलाओं ने सामूहिक रूप से उत्सव मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यक्रम में शामिल हुईं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तीज पर्व की खुशियां साझा कीं। मंदिर परिसर में सुबह से ही उत्सवी माहौल देखने को मिला। महिलाओं ने झूला झूलने, मेहंदी लगाने, चूड़ियां पहनने और पारंपरिक गीत-संगीत का आनंद लेते हुए पर्व को उल्लास के साथ मनाया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पर्व मनाना ही नहीं, बल्कि महिलाओं को एक साथ जोड़ना और भारतीय संस्कृति से जुड़ी परंपराओं को आगे बढ़ाना भी रहा। इसके चलते पूरे आयोजन के दौरान महिलाओं में खासा उत्साह नजर आया। वहीं, एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देकर महिलाओं ने आपसी सौहार्द और सामाजिक जुड़ाव का संदेश भी दिया।
मंदिर परिसर में बना उत्सव का माहौल
हरितालिका तीज के अवसर पर पुरानी जेल के सामने स्थित मंदिर परिसर में विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। मंदिर परिसर को पारंपरिक माहौल के अनुरूप सजाया गया था। जैसे-जैसे महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होती गईं, परिसर में उत्सव का रंग और गहरा होता गया।
महिलाओं के लिए विशेष रूप से झूले की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद महिलाओं ने बारी-बारी से झूला झूला और तीज के पारंपरिक गीतों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं। झूला झूलते समय महिलाओं में उत्साह और उमंग देखने को मिली।
इसके अलावा मेहंदी लगाने की भी व्यवस्था की गई थी। महिलाओं ने अपने हाथों पर आकर्षक मेहंदी लगवाई। वहीं चूड़ियों और सिंदूर का वितरण भी किया गया। इन गतिविधियों ने कार्यक्रम को पारंपरिक रंग दिया।
तीज की शुभकामनाओं के साथ साझा की खुशियां
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने एक-दूसरे को हरितालिका तीज की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीत-संगीत का आनंद भी लिया। कई महिलाओं ने मिलकर तीज से जुड़े गीत गाए और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को साझा किया।
सामूहिक रूप से पर्व मनाने से महिलाओं को एक-दूसरे से मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला। साथ ही, परिवार और समाज से जुड़े अनुभव साझा करने के साथ महिलाओं ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई।
आयोजन में शामिल महिलाओं का कहना था कि पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने का माध्यम भी हैं। ऐसे अवसरों पर लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं।
माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है मान्यता
हरितालिका तीज भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस पर्व को लेकर मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी आस्था के साथ महिलाएं हरितालिका तीज पर व्रत और पूजा करती हैं।
महिलाएं इस दिन अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। साथ ही परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना भी की जाती है।
इस प्रकार हरितालिका तीज महिलाओं की आस्था, समर्पण और पारिवारिक मंगलकामना से जुड़ा पर्व है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मनाने की परंपराओं में स्थानीय संस्कृति के अनुसार कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।
लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में पारंपरिक पर्वों का सामूहिक आयोजन सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासतौर पर महिलाओं के ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों से परिचित कराने का अवसर देते हैं।
हरितालिका तीज के सामूहिक उत्सव में झूला, मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और पारंपरिक गीत-संगीत जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया। इससे महिलाओं को अपनी संस्कृति से जुड़े पारंपरिक अनुभवों को साझा करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ी तक त्योहारों की परंपरा पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए परिवार के साथ-साथ सामूहिक सांस्कृतिक आयोजनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
महिलाओं में दिखा खासा उत्साह
तीज उत्सव के दौरान महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। झूला झूलने के लिए महिलाओं की भागीदारी रही। वहीं मेहंदी और चूड़ियों को लेकर भी महिलाओं में उत्सुकता रही।
पारंपरिक परिधान और श्रृंगार के साथ महिलाएं कार्यक्रम में शामिल हुईं। हालांकि आयोजन का मुख्य केंद्र सांस्कृतिक और सामाजिक सहभागिता रही। महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ समय बिताया और पर्व से जुड़ी खुशियों को साझा किया।
इसके अलावा पारंपरिक गीत-संगीत ने भी कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। महिलाओं ने सामूहिक रूप से गीत गाकर तीज पर्व की सांस्कृतिक भावना को प्रस्तुत किया।
सामाजिक जुड़ाव को मिला बढ़ावा
सामूहिक तीज उत्सव का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक जुड़ाव भी रहा। अलग-अलग परिवारों से आई महिलाओं को एक साथ मिलने और संवाद करने का अवसर मिला। ऐसे आयोजन आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने में भी सहायक होते हैं।
महिलाओं ने कहा कि सामूहिक कार्यक्रमों के माध्यम से एक-दूसरे की परंपराओं को जानने और समझने का अवसर मिलता है। साथ ही, नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति से जुड़े पर्वों की जानकारी मिलती है।
इसलिए ऐसे कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
बड़ी संख्या में महिलाएं हुईं शामिल
हरितालिका तीज के इस आयोजन में पूनम शर्मा, साधना पांडे, रागिनी पांडे, प्रेमलता श्रीवास्तव, रेनू मौर्य, पिंकी सिंह, आशा सिंह, शालिनी पांडे और सरिता श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
सभी ने मिलकर कार्यक्रम में सहभागिता की और तीज पर्व की खुशियां साझा कीं। महिलाओं ने आयोजन को लेकर संतोष व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं।
आगे भी ऐसे आयोजन करने की इच्छा
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने भविष्य में भी इसी तरह के सांस्कृतिक और सामूहिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। उनका कहना था कि सामूहिक आयोजनों से महिलाओं को एक-दूसरे से जुड़ने के साथ अपनी संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
इसके साथ ही ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को भी भारतीय त्योहारों और उनसे जुड़ी परंपराओं की जानकारी देने में उपयोगी साबित होते हैं। इसलिए आने वाले समय में भी तीज सहित अन्य पारंपरिक पर्वों पर सामूहिक आयोजन किए जाने की उम्मीद जताई गई।
आजमगढ़ के मंदिर परिसर में आयोजित हरितालिका तीज उत्सव में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। झूला झूलने से लेकर मेहंदी लगाने, चूड़ियां पहनने और पारंपरिक गीत-संगीत का आनंद लेने तक विभिन्न गतिविधियों ने कार्यक्रम को खास बनाया।
वहीं, महिलाओं ने एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देते हुए पर्व की खुशियां साझा कीं। आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-जोल और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। महिलाओं ने भविष्य में भी ऐसे सामूहिक आयोजनों को जारी रखने की इच्छा जताई।

