बांदा के सेंट मैरी स्कूल के बाहर छुट्टी में जाम, सड़क पर वाहनों की कतार से बच्चे और राहगीर परेशान

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा

बांदा: शहर के सेंट मैरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के आसपास छुट्टी के समय यातायात व्यवस्था बिगड़ने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल परिसर में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण छुट्टी के समय बड़ी संख्या में वाहन सड़क पर खड़े हो जाते हैं। इसके चलते सड़क कुछ समय के लिए पार्किंग जोन जैसी स्थिति में बदल जाती है और यातायात प्रभावित होने लगता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल की छुट्टी के दौरान बच्चों को लेने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक कार, बाइक और अन्य वाहनों से पहुंचते हैं। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई वाहन सड़क के किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। परिणामस्वरूप मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और जाम की स्थिति बन जाती है।

लोगों का कहना है कि समस्या केवल यातायात जाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर स्कूली बच्चों, आम राहगीरों, सार्वजनिक परिवहन और आपातकालीन सेवाओं पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा के जाम में फंसने की स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिक चिंतित हैं।

छुट्टी होते ही बढ़ जाता है वाहनों का दबाव

स्कूल की छुट्टी के समय सबसे अधिक परेशानी सामने आने की बात कही जा रही है। छुट्टी का समय नजदीक आते ही अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए स्कूल के आसपास पहुंचने लगते हैं। इसके बाद सड़क के किनारे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर वाहनों के खड़े होने और बच्चों की आवाजाही एक साथ होने के कारण यातायात का दबाव बढ़ जाता है। कई बार वाहन चालकों को आगे निकलने के लिए जगह नहीं मिलती और सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

ऐसे में कुछ समय के लिए आसपास का यातायात धीमा हो जाता है। वहीं, जाम खुलने में भी समय लगने के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सड़क पर खड़े वाहनों से संकरा हो जाता है रास्ता

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े होने से पहले से उपलब्ध मार्ग की चौड़ाई कम हो जाती है। इसके कारण एक साथ दो दिशाओं से आने वाले वाहनों को निकलने में परेशानी होती है।

इसके अलावा स्कूल की छुट्टी के समय बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी सड़क पर मौजूद रहते हैं। ऐसे में वाहन और पैदल चलने वाले बच्चों की आवाजाही के कारण यातायात व्यवस्था को अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ता है।

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल के आसपास यातायात प्रबंधन की व्यवस्था बेहतर हो तो छुट्टी के समय पैदा होने वाली समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित

स्कूल के आसपास जाम और वाहनों की भीड़ के बीच बच्चों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। छुट्टी के बाद बच्चे स्कूल से बाहर निकलते हैं और अपने अभिभावकों के वाहनों तक पहुंचते हैं। इस दौरान यदि सड़क पर वाहनों का दबाव अधिक हो तो बच्चों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्कूल के आसपास बच्चों की संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था सामान्य दिनों की तुलना में अधिक व्यवस्थित होनी चाहिए। इसके लिए स्कूल प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।

साथ ही, अभिभावकों से भी अपील की जा सकती है कि वे बच्चों को लेने के दौरान सड़क पर अनावश्यक रूप से वाहन खड़ा न करें और निर्धारित स्थान पर ही वाहन रोकें।

एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों को लेकर चिंता

स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता आपातकालीन वाहनों के आवागमन को लेकर है। यदि छुट्टी के समय सड़क पर जाम लगा हो और उसी दौरान किसी मरीज को लेकर एंबुलेंस वहां से गुजर रही हो, तो उसे रास्ता मिलने में परेशानी हो सकती है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष एंबुलेंस के जाम में फंसने की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि ऐसी स्थिति की आशंका को देखते हुए पहले से व्यवस्था करना जरूरी है।

आपातकालीन सेवाओं के लिए सड़क पर पर्याप्त जगह उपलब्ध रहना आवश्यक है। इसलिए स्कूल के आसपास पार्किंग और यातायात व्यवस्था को इस तरह व्यवस्थित करने की मांग की जा रही है कि किसी भी समय एंबुलेंस, दमकल या अन्य जरूरी वाहनों के आवागमन में बाधा न आए।

सरकारी बस और आम राहगीर भी हो सकते हैं प्रभावित

स्कूल के आसपास बनने वाली भीड़ का असर केवल स्कूल से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रहता। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाली सरकारी बसों, अन्य सार्वजनिक वाहनों और आम राहगीरों को भी यातायात दबाव का सामना करना पड़ता है।

जब सड़क के किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े हो जाते हैं तो गुजरने वाले वाहनों के लिए रास्ता सीमित हो जाता है। ऐसे में यातायात की गति प्रभावित होना स्वाभाविक है।

इसके अलावा, स्थानीय दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को भी छुट्टी के समय अतिरिक्त भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए समस्या के समाधान के लिए व्यापक यातायात योजना की आवश्यकता बताई जा रही है।

वर्षों से समस्या बने रहने का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल के आसपास छुट्टी के समय जाम की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि समय-समय पर समस्या सामने आने के बावजूद अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

लोगों के मुताबिक, यदि स्कूल की छुट्टी के समय कुछ समय के लिए यातायात पुलिस की तैनाती की जाए, तो वाहनों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, नो-पार्किंग क्षेत्र निर्धारित करने और अभिभावकों के वाहनों के लिए वैकल्पिक पार्किंग स्थल तलाशने जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं।

हालांकि, इन व्यवस्थाओं को लागू करने के लिए संबंधित विभाग और स्कूल प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी होगा।

पार्किंग व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल

स्थानीय नागरिकों का एक प्रमुख सवाल स्कूल के आसपास पार्किंग व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि जब बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल में पढ़ते हैं और छुट्टी के समय सैकड़ों अभिभावक अपने वाहनों से पहुंचते हैं, तो वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था पहले से होनी चाहिए।

अभिभावकों का कहना है कि पार्किंग की व्यवस्था होने से सड़क पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बच्चों के लिए स्कूल से बाहर निकलने और अभिभावकों से मिलने की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

ऐसे में स्कूल प्रबंधन की ओर से भी अभिभावकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

प्रशासन से स्थलीय निरीक्षण की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, यातायात पुलिस और संबंधित विभागों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल के आसपास छुट्टी के समय स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और वास्तविक यातायात स्थिति का आकलन किया जाए।

इसके बाद स्कूल प्रशासन, यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर समाधान की कार्ययोजना तैयार कर सकते हैं। इसमें पार्किंग स्थल निर्धारित करना, नो-पार्किंग क्षेत्र तय करना, छुट्टी के समय यातायात कर्मियों की तैनाती और अभिभावकों के वाहनों के लिए निर्धारित स्थान जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं।

स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण

यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को निर्देश दे सकता है कि वे स्कूल के मुख्य मार्ग पर वाहन खड़ा करने से बचें और बच्चों को लेने के लिए निर्धारित स्थान का इस्तेमाल करें।

इसके अलावा, स्कूल की छुट्टी के समय अलग-अलग गेट या चरणबद्ध तरीके से विद्यार्थियों की निकासी जैसी व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है, यदि स्थानीय परिस्थितियां इसकी अनुमति देती हों।

इससे एक ही समय में सड़क पर होने वाली भीड़ को कम करने में मदद मिल सकती है।

स्थायी समाधान की जरूरत

बांदा के सेंट मैरी स्कूल के आसपास छुट्टी के समय यातायात समस्या को लेकर स्थानीय लोगों की मांग स्पष्ट है कि इसका समाधान अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी होना चाहिए। केवल कुछ दिनों के लिए यातायात कर्मियों की तैनाती करने के बजाय पार्किंग, वाहन प्रबंधन और बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जानी चाहिए।

फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर है। यदि समय रहते प्रभावी व्यवस्था बनाई जाती है तो छुट्टी के समय लगने वाले जाम को कम करने के साथ-साथ बच्चों, अभिभावकों और आम राहगीरों की परेशानी भी दूर की जा सकती है।

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