अमरोहा में श्रावण मास के बीच मिट्टी का कथित अवैध खनन, कांवड़ियों की सुरक्षा पर उठे सवाल

WhatsApp Image 2026-08-15 at 10.02.37 AM

रिपोर्ट – इकबाल अंसारी

अमरोहा: श्रावण मास और कांवड़ यात्रा के बीच अमरोहा जनपद में मिट्टी के कथित अवैध खनन का मामला सामने आया है। नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव नौगांवा तगा में दिनदहाड़े जेसीबी नुमा लोडर से मिट्टी की खुदाई और ट्रैक्टर-ट्रालियों से उसकी ढुलाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के मुताबिक, जिस समय श्रावण मास के कारण क्षेत्र में शिवभक्त कांवड़ियों की आवाजाही बढ़ी हुई है और प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं, उसी दौरान मिट्टी की खुदाई और परिवहन का काम कथित तौर पर जारी है। ऐसे में सड़क पर मिट्टी से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियों की आवाजाही को लेकर कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई जा रही हैं।

दिनदहाड़े मिट्टी की खुदाई का वीडियो वायरल

बताया जा रहा है कि शनिवार को नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव नौगांवा तगा में एक मशीन से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। इसके बाद मिट्टी को ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर ले जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने मौके की गतिविधियों का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि मिट्टी की खुदाई और ढुलाई का काम कथित तौर पर दिन के समय किया जा रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह गतिविधि बिना अनुमति हो रही थी तो संबंधित विभागों की निगरानी के बावजूद इसे कैसे अंजाम दिया जा रहा था।

हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि और उससे जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए मामले को फिलहाल कथित अवैध खनन के रूप में देखा जा रहा है।

कांवड़ यात्रा के बीच बढ़ी चिंता

श्रावण मास में हरिद्वार से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में कांवड़िये अपने गंतव्य की ओर लौटते हैं। अमरोहा और आसपास के क्षेत्रों में भी इस दौरान कांवड़ियों की आवाजाही बढ़ जाती है। कांवड़ यात्रा को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से यातायात व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं।

ऐसे माहौल में यदि मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां लगातार सड़कों पर चलती हैं, तो इससे यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके अलावा कांवड़ मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से श्रद्धालुओं और अन्य वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यही वजह है कि ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेने और कांवड़ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से जगह-जगह सुरक्षा व्यवस्था किए जाने की बात कही जाती है। इसके बावजूद यदि मिट्टी की खुदाई और ढुलाई की गतिविधियां वास्तव में बिना अनुमति के चल रही थीं, तो यह निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कांवड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में कांवड़ मार्ग के आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों और भारी वाहनों की आवाजाही पर भी नजर रखी जानी चाहिए।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वायरल वीडियो सामने आने मात्र से यह साबित नहीं होता कि संबंधित गतिविधि अवैध थी। इसके लिए खनन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की जांच आवश्यक होगी। संबंधित भूमि, अनुमति और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मिट्टी के परिवहन को लेकर भी सवाल

मिट्टी की खुदाई के बाद उसे ट्रैक्टर-ट्रालियों से दूसरे स्थान पर ले जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मिट्टी का परिवहन बिना जरूरी अनुमति या नियमों के किया जा रहा है, तो संबंधित वाहनों की जांच की जानी चाहिए।

इसके साथ ही यह भी पता लगाने की आवश्यकता है कि मिट्टी कहां से निकाली जा रही थी और उसे किस स्थान पर ले जाया जा रहा था। जमीन के स्वामित्व, खनन की अनुमति, मिट्टी की मात्रा और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

इसलिए प्रशासन के सामने अब केवल वायरल वीडियो की जांच ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे मामले की तथ्यात्मक पड़ताल की चुनौती है।

ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग की

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है तो मिट्टी खोदने वाली मशीन और मिट्टी ढोने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके साथ ही कांवड़ मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी प्रभावी निगरानी की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि श्रावण मास के दौरान सड़कों पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ जाती है, इसलिए यातायात प्रबंधन में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

कांवड़ियों की सुरक्षा सबसे अहम

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पैदल और विभिन्न माध्यमों से अपने गंतव्य की ओर जाते हैं। ऐसे में सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए प्रशासन के लिए चुनौती केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि यातायात को भी सुचारु बनाए रखना है।

मिट्टी से लदे भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों की चिंता इसी संदर्भ में सामने आई है। यदि किसी मार्ग पर ऐसे वाहनों की संख्या अधिक होती है तो यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की निगरानी और आवश्यकतानुसार यातायात प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसके अलावा निर्माण सामग्री या मिट्टी ले जाने वाले वाहनों के दस्तावेज और अनुमति की जांच भी संबंधित विभागों द्वारा की जा सकती है।

वायरल वीडियो के बाद अब कार्रवाई का इंतजार

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं। यदि प्रशासन वीडियो की जांच कर मौके की स्थिति का सत्यापन करता है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि मिट्टी की खुदाई किस उद्देश्य से की जा रही थी और इसके लिए आवश्यक अनुमति मौजूद थी या नहीं।

साथ ही, यदि किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों और वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, यदि संबंधित पक्ष के पास वैध अनुमति और दस्तावेज पाए जाते हैं, तो वायरल वीडियो से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। इसलिए निष्पक्ष जांच इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण है।

कांवड़ मार्गों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत

श्रावण मास के दौरान अमरोहा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व रहता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है।

इसी कारण ग्रामीणों की मांग है कि कांवड़ मार्गों पर केवल पुलिस बल की तैनाती ही नहीं, बल्कि भारी वाहनों की आवाजाही, अवैध खनन की संभावित गतिविधियों और अन्य जोखिम वाले कार्यों पर भी निगरानी रखी जाए।

यदि समय रहते ऐसी गतिविधियों की जांच की जाती है, तो संभावित परेशानी को कम किया जा सकता है। साथ ही, इससे श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुचारु यात्रा का माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल नौगांवा तगा गांव में मिट्टी की खुदाई और ट्रैक्टर-ट्रालियों से ढुलाई का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। ग्रामीण इसे अवैध खनन से जोड़ रहे हैं, लेकिन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

प्रशासन के सामने अब यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है कि संबंधित जमीन पर मिट्टी की खुदाई की अनुमति थी या नहीं, मशीन से खुदाई किस उद्देश्य से की जा रही थी और मिट्टी को कहां ले जाया जा रहा था। साथ ही, परिवहन में लगे वाहनों के दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

श्रावण मास और कांवड़ यात्रा के बीच सामने आए इस मामले ने अमरोहा में खनन गतिविधियों और यातायात सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर संबंधित विभाग कितनी जल्दी जांच शुरू करता है और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो क्या कार्रवाई की जाती है।

फिलहाल ग्रामीणों की मांग साफ है कि कांवड़ मार्गों पर निगरानी मजबूत की जाए, संदिग्ध खनन गतिविधियों की जांच हो और श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान यातायात व्यवस्था को किसी भी स्थिति में प्रभावित न होने दिया जाए।

You may have missed