त्रिपुरा के जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार की राह, अगरतला में अंतरराष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता बैठक
Digital UP News Desk
अगरतला: त्रिपुरा के जैविक कृषि उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने और किसानों के लिए नए व्यावसायिक अवसर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने त्रिपुरा राज्य जैविक खेती विकास एजेंसी (TSOFDA) और त्रिपुरा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से अगरतला में अंतरराष्ट्रीय जैविक क्रेता-विक्रेता बैठक का आयोजन किया।
इस बैठक का उद्देश्य राज्य के जैविक उत्पादकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO/FPC), निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था, ताकि वे नए व्यापारिक अवसरों की तलाश कर सकें और लंबे समय के लिए बाजार संबंध स्थापित कर सकें। कार्यक्रम में करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने लिया हिस्सा
अगरतला में आयोजित इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, इटली, ग्रीस और अर्जेंटीना समेत कई देशों के 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल हुए। इसके अलावा 27 निर्यातकों, 22 FPO/FPC का प्रतिनिधित्व करने वाले 96 किसानों और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
इस विविध भागीदारी ने किसानों और विदेशी खरीदारों के बीच सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराया। परिणामस्वरूप, उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार की मांग, निर्यात मानकों, संभावित सोर्सिंग और भविष्य की व्यावसायिक साझेदारी जैसे विषयों पर बातचीत हुई।
दरअसल, किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ना जैविक कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने, बाजार की वास्तविक मांग समझने और उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने में मदद मिल सकती है।
त्रिपुरा के खास जैविक उत्पाद बने आकर्षण
बैठक में त्रिपुरा के विभिन्न कृषि उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए 12 विशेष रूप से तैयार किए गए स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों में राज्य की प्रमुख कृषि उपज और जैविक उत्पादों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
इनमें क्वीन अनानास, जीआई टैग वाला कालीखासा चावल, जैविक अदरक, हल्दी, काले तिल, कटहल और सुगंधित नींबू समेत कई ताजा और विशिष्ट जैविक उत्पाद शामिल रहे।
इन उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल उनकी बिक्री या प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। बल्कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को उत्पादकों से सीधे बातचीत करने, उत्पादों की विशेषताओं को समझने और भविष्य की सोर्सिंग संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर भी दिया गया।
इस तरह स्टॉल किसानों और खरीदारों के बीच व्यावसायिक संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बने।
वैश्विक बाजार में त्रिपुरा की जैविक पहचान मजबूत करने की कोशिश
त्रिपुरा पूर्वोत्तर भारत का ऐसा राज्य है जहां कृषि और बागवानी उत्पादों की विविधता मौजूद है। ऐसे में जैविक खेती को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय जैविक क्रेता-विक्रेता बैठक का उद्देश्य त्रिपुरा की जैविक पहचान को वैश्विक बाजारों में मजबूत करना भी रहा। इसके जरिए राज्य के उत्पादकों को यह समझने का अवसर मिला कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार किन उत्पादों की मांग कर रहे हैं और निर्यात के लिए किस प्रकार की गुणवत्ता एवं मानकों की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा, दीर्घकालिक सोर्सिंग साझेदारी विकसित होने की संभावना भी इस आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।
कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने किसानों को प्रोत्साहित किया
कार्यक्रम में त्रिपुरा सरकार के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ भी मौजूद रहे। उन्होंने राज्य के जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने किसानों और उत्पादक संगठनों को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। कृषि मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा के किसान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पाद तैयार कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें वैश्विक खरीदारों से सीधे जोड़ने से बाजार पहुंच और आय के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि त्रिपुरा सरकार जैविक खेती को मजबूत करने और किसानों को वैश्विक बाजार के उभरते अवसरों से लाभ उठाने में सक्षम बनाने वाली पहलों को लगातार समर्थन देती रहेगी।
जैविक किसानों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान राज्य के कुछ जैविक किसानों को भी सम्मानित किया गया। कृषि मंत्री ने जैविक कृषि आंदोलन में उनके योगदान और टिकाऊ कृषि मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में उनकी भूमिका को पहचान दी।
किसानों का सम्मान इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इससे जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों का उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
इसके अलावा, किसानों को बाजार आधारित कृषि के महत्व और निर्यात की संभावनाओं से परिचित कराने में भी ऐसे आयोजन उपयोगी साबित हो सकते हैं।
APEDA की भूमिका महत्वपूर्ण
भारत के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में APEDA की महत्वपूर्ण भूमिका है। संस्था राज्य सरकारों, किसान उत्पादक संगठनों, निर्यातकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर जैविक निर्यात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम करती है।
इसके तहत प्रमाणन सहायता, क्षमता निर्माण, बुनियादी ढांचे का विकास, बाजार संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से संपर्क जैसी गतिविधियों पर जोर दिया जाता है।
त्रिपुरा में आयोजित यह बैठक भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसका उद्देश्य राज्य के जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान दिलाना और किसानों के लिए स्थायी बाजार अवसर तैयार करना है।
किसानों के लिए बेहतर बाजार पहुंच की उम्मीद
जैविक किसानों के सामने अक्सर सबसे बड़ी चुनौती उत्पाद की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना होती है। यदि किसान उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन उन्हें उचित बाजार या खरीदार नहीं मिलता, तो उनकी आय बढ़ाने की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधे संवाद का मंच किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे उन्हें बाजार की मांग, उत्पाद की गुणवत्ता और निर्यात से जुड़ी आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।
साथ ही, निर्यातक और FPO किसानों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं। इससे उत्पादन, संग्रहण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
पूर्वोत्तर के किसानों के लिए नए अवसर
त्रिपुरा में जैविक कृषि को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल का महत्व केवल राज्य तक सीमित नहीं है। इससे पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक और जलवायु विविधता के कारण कई विशिष्ट कृषि उत्पाद उपलब्ध हैं। यदि इन उत्पादों को उचित ब्रांडिंग, प्रमाणन, पैकेजिंग और बाजार रणनीति के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए, तो किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
इसलिए त्रिपुरा में आयोजित क्रेता-विक्रेता बैठक को पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा जा सकता है।
जैविक निर्यात इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर
कार्यक्रम में यह संदेश भी सामने आया कि भारत के जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में अधिक मजबूती से स्थापित करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ प्रमाणन, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और बाजार संपर्क जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना जरूरी है।
APEDA इन क्षेत्रों में विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके माध्यम से किसानों और उत्पादक संगठनों को निर्यात की पूरी प्रक्रिया समझने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होने में मदद मिल सकती है।
त्रिपुरा के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद
क्वीन अनानास से लेकर कालीखासा चावल, अदरक, हल्दी, काले तिल और सुगंधित नींबू जैसे उत्पाद त्रिपुरा की कृषि विविधता को दर्शाते हैं। इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए बेहतर ब्रांडिंग और निर्यात संपर्क महत्वपूर्ण होंगे।
अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी से राज्य के उत्पादकों को नए बाजारों के बारे में जानकारी मिलने के साथ संभावित व्यापारिक साझेदारों से संपर्क स्थापित करने का अवसर मिला है।
अगरतला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जैविक क्रेता-विक्रेता बैठक त्रिपुरा के किसानों और वैश्विक बाजार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई है। करीब 200 प्रतिभागियों, 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, 27 निर्यातकों और 96 किसानों की भागीदारी ने इस आयोजन को व्यापक मंच प्रदान किया।
आने वाले समय में यदि इन बैठकों से दीर्घकालिक खरीद समझौते, बेहतर निर्यात संपर्क और स्थायी आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित होती हैं, तो इसका सीधा लाभ राज्य के जैविक किसानों को मिल सकता है। साथ ही, त्रिपुरा के विशिष्ट कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।
इस प्रकार, APEDA, TSOFDA और त्रिपुरा सरकार की यह पहल न केवल जैविक निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के किसानों के लिए बेहतर बाजार, नई साझेदारी और आय के स्थायी अवसर तैयार करने की दिशा में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

