साढ़ चौराहे की बैरिकेडिंग से व्यापार प्रभावित, व्यापारियों ने एडीसीपी साउथ से रखीं समस्याएं

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रिपोर्ट – शुभम कुमार साहू 

कानपुर: साढ़ चौराहे पर पुलिस की बैरिकेडिंग और नियमित चेकिंग व्यवस्था को लेकर स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी सामने आई है। व्यापारियों का कहना है कि चौराहे पर बैरिकेडिंग और वाहनों की जांच के कारण बाजार की ओर आने वाले ग्राहकों को असुविधा हो रही है। इसके चलते स्थानीय दुकानदारों के कारोबार पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने एडीसीपी साउथ सुमित सुधाकर रामटेके से मुलाकात की।

व्यापारियों ने बैठक के दौरान यातायात व्यवस्था, सड़क किनारे अतिक्रमण और ऑटो-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन सहित कई मुद्दे अधिकारियों के सामने रखे। उनका कहना है कि यातायात को व्यवस्थित करने के लिए पुलिस की ओर से किए जा रहे प्रयास जरूरी हैं, लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के साथ बाजार की गतिविधियां भी प्रभावित न हों।

बैरिकेडिंग से ग्राहकों को परेशानी का दावा

व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने एडीसीपी साउथ को बताया कि साढ़ चौराहे पर बैरिकेडिंग और नियमित चेकिंग के कारण बाजार क्षेत्र में आने वाले लोगों को कई बार रुकना पड़ता है। इससे ग्राहकों को परेशानी होती है और बाजार तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

व्यापारियों के अनुसार, कुछ ग्राहक चौराहे पर होने वाली जांच और यातायात व्यवस्था के कारण दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे स्थानीय दुकानों पर ग्राहकों की संख्या प्रभावित होने की आशंका है।

व्यापारियों ने अधिकारियों से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें पुलिस की चेकिंग भी जारी रहे और बाजार क्षेत्र तक ग्राहकों की आवाजाही भी सहज बनी रहे।

चेकिंग प्वाइंट एक किलोमीटर दूर करने की मांग

बैठक के दौरान व्यापारियों ने साढ़ चौराहे पर बनाए गए चेकिंग प्वाइंट को करीब एक किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि यदि चेकिंग प्वाइंट को बाजार क्षेत्र से कुछ दूरी पर किया जाता है तो पुलिस की जांच व्यवस्था बरकरार रह सकती है और बाजार में आने वाले ग्राहकों को भी सीधे तौर पर परेशानी कम होगी।

व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे पुलिस की चेकिंग व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं। उनका उद्देश्य केवल ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था बनवाना है, जिससे यातायात नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के साथ स्थानीय कारोबार भी सुचारु रूप से चलता रहे।

इस संबंध में व्यापार मंडल पदाधिकारियों ने अधिकारियों से स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर उचित समाधान तलाशने की मांग की।

घाटमपुर, साढ़ और कुढ़नी की यातायात व्यवस्था पर चर्चा

प्रतिनिधिमंडल ने केवल साढ़ चौराहे की समस्या ही नहीं, बल्कि घाटमपुर, साढ़ और कुढ़नी क्षेत्र की यातायात व्यवस्था से जुड़े अन्य मुद्दे भी एडीसीपी साउथ के सामने रखे।

व्यापारियों ने बताया कि कई प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण वाहनों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है। इसके अलावा, कई स्थानों पर ऑटो-रिक्शा के बेतरतीब खड़े होने से यातायात प्रभावित होता है।

उनका कहना है कि यदि अतिक्रमण और अनियंत्रित ऑटो संचालन पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए तो बाजारों और प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।

नो-वेंडिंग जोन बनाने की मांग

व्यापारियों ने चौराहों और प्रमुख बाजार क्षेत्रों के आसपास नो-वेंडिंग जोन निर्धारित किए जाने की भी मांग की। उनका कहना है कि इससे सड़क किनारे होने वाले अस्थायी अतिक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार, चौराहों के आसपास ठेले और अन्य अस्थायी गतिविधियों के कारण कई बार सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है। ऐसे में वाहनों के आवागमन में परेशानी होती है और यातायात धीमा पड़ सकता है।

उन्होंने प्रशासन से ऐसे स्थानों को चिन्हित कर अभियान चलाने और आवश्यकतानुसार अतिक्रमण हटाने की मांग की। साथ ही, नो-वेंडिंग जोन के नियमों को स्पष्ट रूप से लागू करने का सुझाव भी दिया।

अतिक्रमण के खिलाफ अभियान की मांग

व्यापारियों ने कहा कि यातायात सुधार के लिए केवल बैरिकेडिंग और चेकिंग पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही सड़क किनारे अतिक्रमण को नियंत्रित करना भी जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों से घाटमपुर, साढ़ और कुढ़नी क्षेत्र के प्रमुख चौराहों पर विशेष अभियान चलाने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटने से सड़क पर वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो सकता है।

हालांकि, व्यापारियों ने यह भी कहा कि अभियान के दौरान स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि प्रशासन संबंधित व्यापारियों के साथ समन्वय कर ऐसी व्यवस्था तैयार करे जिससे यातायात भी सुचारु रहे और कारोबार भी प्रभावित न हो।

ऑटो-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने ऑटो-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। व्यापारियों के मुताबिक, बाजार और चौराहों के आसपास कई बार ऑटो-रिक्शा सड़क पर ही खड़े होकर सवारी भरते हैं।

इससे पीछे आने वाले वाहनों के लिए रास्ता बाधित होता है और कुछ स्थानों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है। व्यापारियों ने ऑटो-रिक्शा के लिए निर्धारित स्थान तय करने और चौराहों से दूरी बनाए रखने जैसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा, यातायात पुलिस की ओर से नियमित निगरानी और नियमों का पालन कराने की भी मांग की गई।

व्यापार और यातायात के बीच संतुलन पर जोर

व्यापारियों ने बैठक के दौरान कहा कि पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के लिए की जा रही चेकिंग आवश्यक है। हालांकि, बाजार क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे ग्राहकों को अनावश्यक परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि ग्राहकों की आवाजाही किसी यातायात व्यवस्था के कारण प्रभावित होती है तो उसका असर दुकानदारों के कारोबार पर पड़ सकता है।

इसीलिए व्यापार मंडल ने प्रशासन से व्यावहारिक और स्थायी समाधान की मांग की। व्यापारियों का मानना है कि पुलिस और व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय से ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जिससे दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रहें।

एडीसीपी साउथ ने सुनी समस्याएं

एडीसीपी साउथ सुमित सुधाकर रामटेके ने व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों की ओर से रखी गई समस्याओं को सुना। उन्होंने संबंधित बिंदुओं पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

बैठक के दौरान व्यापारियों ने चेकिंग प्वाइंट, बैरिकेडिंग, अतिक्रमण और ऑटो-रिक्शा संचालन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों की ओर से समस्याओं को संबंधित स्तर पर देखने का आश्वासन दिया गया।

अब व्यापारियों को उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से स्थिति का आकलन कर ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे साढ़ चौराहे और आसपास के बाजारों में यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके।

व्यापार मंडल प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे मौजूद

एडीसीपी साउथ से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष महेश वर्मा, रजत पांडे, ललित सोनी, दुर्गेंद्र शुक्ला और अभय गुप्ता समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के सामने व्यापारियों की समस्याएं रखीं और यातायात व्यवस्था को लेकर सुझाव दिए। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर सकारात्मक कार्रवाई करेगा।

समाधान से बाजार में बढ़ सकती है ग्राहकों की सुविधा

यदि चेकिंग प्वाइंट को लेकर व्यापारियों के सुझाव पर कोई व्यावहारिक निर्णय लिया जाता है और साथ ही अतिक्रमण तथा ऑटो-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित किया जाता है, तो बाजार क्षेत्र में यातायात को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, नो-वेंडिंग जोन निर्धारित होने से चौराहों पर सड़क किनारे होने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे वाहन चालकों और पैदल यात्रियों दोनों के लिए आवागमन आसान हो सकता है।

फिलहाल, व्यापारियों की मांग प्रशासन के विचाराधीन है। आने वाले दिनों में चेकिंग प्वाइंट और बैरिकेडिंग को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर स्थानीय व्यापारियों और लोगों की नजर रहेगी।

कुल मिलाकर, कानपुर के साढ़ चौराहे पर बैरिकेडिंग और चेकिंग व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने अपनी समस्याएं एडीसीपी साउथ के सामने रखी हैं। व्यापारियों ने चेकिंग प्वाइंट को चौराहे से करीब एक किलोमीटर दूर करने, अतिक्रमण हटाने, नो-वेंडिंग जोन निर्धारित करने और ऑटो-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने की मांग की है। वहीं, एडीसीपी साउथ ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को सुनकर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब प्रशासन की अगली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि यातायात सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।

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