कानपुर की नई शुजातगंज मस्जिद में वित्तीय अनियमितता के आरोप, वक्फ संपत्ति को लेकर जांच की मांग तेज, जानिए पूरा मामला
रिपोर्ट – कृष्ण शर्मा
कानपुर : कानपुर शहर की नई शुजातगंज मस्जिद से जुड़ा एक विवाद सामने आया है। मस्जिद के मुतवल्ली और कुछ स्थानीय लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मस्जिद के पूर्व सचिव जियाउल हश्मत उर्फ अल्लन पर वित्तीय अनियमितता, वक्फ संपत्ति के कथित दुरुपयोग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की अभी किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और आरोपित पक्ष की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान शिकायतकर्ताओं ने कहा कि मस्जिद के आय-व्यय का पिछले लगभग आठ वर्षों का पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका दावा है कि कई बार लिखित और मौखिक रूप से लेखा-जोखा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक वित्तीय रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी कारण स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आठ वर्षों के खातों को लेकर उठे सवाल
मुतवल्ली और स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक होती है। उनका आरोप है कि मस्जिद के वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध न कराए जाने से दान राशि और अन्य आय के उपयोग को लेकर संदेह की स्थिति बनी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी अभिलेख समय पर प्रस्तुत किए जाएं तो किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होगा। इसलिए उन्होंने संबंधित विभागों से पूरे आठ वर्षों के खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
वक्फ संपत्ति के दुरुपयोग का भी लगाया आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मस्जिद से संबंधित वक्फ संपत्ति का नियमानुसार उपयोग नहीं किया गया। उनका कहना है कि कुछ दस्तावेजों और संपत्तियों के प्रबंधन में अनियमितता की आशंका है।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल ये केवल शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी शेष है।
पुराने हिस्से को बिना अनुमति तोड़े जाने का किया दावा
विवाद का एक प्रमुख बिंदु मस्जिद के पुराने हिस्से को लेकर भी सामने आया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना मस्जिद के एक पुराने हिस्से को तोड़ा गया।
उनका कहना है कि यदि किसी वक्फ संपत्ति में निर्माण, पुनर्निर्माण या संरचनात्मक परिवर्तन किया जाता है तो संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन किया जाना चाहिए। इसलिए उन्होंने इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
दूसरी ओर, इस दावे पर अभी तक वक्फ बोर्ड या संबंधित प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने उत्पीड़न का भी लगाया आरोप
प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों ने यह भी दावा किया कि जब भी उन्होंने मस्जिद के वित्तीय रिकॉर्ड या प्रशासनिक निर्णयों के संबंध में जानकारी मांगी, तब उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इससे स्थानीय स्तर पर विवाद बढ़ा और कई लोगों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
स्थानीय लोगों ने पारदर्शिता पर दिया जोर
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी होती है। उनका मानना है कि यदि आय-व्यय का नियमित विवरण सार्वजनिक किया जाए और सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन हो, तो इस प्रकार के विवादों से बचा जा सकता है।
इसी कारण उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्रशासन और वक्फ बोर्ड से जांच की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिकायतकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों के वित्तीय अभिलेखों का ऑडिट कराया जाए तथा यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि वक्फ संपत्ति से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उपयोग संबंधित नियमों के अनुरूप हुआ है।
अब आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में पूर्व सचिव जियाउल हश्मत उर्फ अल्लन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार किसी भी विवाद में सभी पक्षों का पक्ष जानना आवश्यक होता है।
यदि आरोपित पक्ष भविष्य में अपना स्पष्टीकरण जारी करता है या किसी भी आरोप का खंडन करता है, तो उससे मामले की पूरी तस्वीर सामने आने में सहायता मिलेगी। इसलिए इस विषय पर आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
कानूनी और प्रशासनिक मामलों में केवल आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। इसलिए इस मामले में भी वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की जांच, उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि जांच में शिकायतों की पुष्टि होती है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
नई शुजातगंज मस्जिद से जुड़ा यह मामला फिलहाल आरोप और शिकायतों के स्तर पर है। शिकायतकर्ताओं ने वित्तीय रिकॉर्ड, वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है।
ऐसे में निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद की वास्तविकता सामने ला सकती है। प्रशासन और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आगामी कार्रवाई पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

