कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि
रिपोर्ट- मुकेश वर्मा
कानपुर। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लाखों निर्दोष नागरिकों की स्मृति और उस त्रासदी से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भावपूर्ण आयोजन किया गया। पुलिस आयुक्त कार्यालय प्रांगण में आयोजित स्मृति सभा की अध्यक्षता पुलिस आयुक्त श्री रघुबीर लाल ने की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की एकता, अखंडता तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का वातावरण गंभीर और भावपूर्ण रहा। अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों ने विभाजन की पीड़ा को याद करते हुए उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने वर्ष 1947 की त्रासदी में अपनों को खोया और विस्थापन का दर्द झेला। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इतिहास की ऐसी घटनाओं को याद करना केवल अतीत को दोहराना नहीं है, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को शांति, भाईचारे तथा राष्ट्रीय एकता का महत्व समझाना भी है।
दो मिनट का मौन रखकर दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस आयुक्त कार्यालय परिसर में उपस्थित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों द्वारा दो मिनट का मौन धारण करने के साथ हुई। सभी ने विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही, उस दौर में अपने घर, परिवार और परिचितों से बिछड़ने वाले लोगों के संघर्ष को भी स्मरण किया गया।
मौन के दौरान उपस्थित पुलिसकर्मियों ने उन सभी लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, जिन्होंने विभाजन के कठिन दौर में असहनीय परिस्थितियों का सामना किया। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि समाज में शांति और आपसी विश्वास को मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर और अपनी जन्मभूमि छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। ऐसे में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन पीड़ित परिवारों के संघर्ष और उनकी पीड़ा को स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है। यही वजह है कि इस दिवस का महत्व केवल ऐतिहासिक संदर्भों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्तमान समाज को भी आपसी सद्भाव बनाए रखने का संदेश देता है।
इतिहास से सीख लेने की जरूरत
स्मृति दिवस के अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि इतिहास के कठिन अध्यायों को याद करने का उद्देश्य किसी प्रकार की कटुता को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। विभाजन की त्रासदी ने समाज को यह संदेश दिया कि शांति, संवाद और सामाजिक सद्भाव किसी भी राष्ट्र की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक हैं।
अधिकारियों के अनुसार, जब समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा मजबूत होता है, तो देश की आंतरिक सुरक्षा भी अधिक प्रभावी होती है। इसके विपरीत सामाजिक तनाव और असहमति की स्थिति विकास और शांति के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए सभी वर्गों के बीच सहयोग और सौहार्द बनाए रखना आवश्यक है।
इसी क्रम में पुलिस विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस का दायित्व समाज में सुरक्षा की भावना पैदा करना और नागरिकों के बीच विश्वास कायम रखना भी है। कार्यक्रम में उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने इसी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की बात कही।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से आयोजित इस स्मृति सभा में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जेसीपी मुख्यालय श्री संकल्प शर्मा, डीसीपी मुख्यालय श्री दिनेश कुमार त्रिपाठी और एडिशनल डीसीपी श्रीमती स्नेहा तिवारी उपस्थित रहीं।
इसके अलावा कमिश्नरेट के अन्य राजपत्रित अधिकारी, विभिन्न थानों के प्रभारी तथा बड़ी संख्या में पुलिस बल के जवान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने पुलिस विभाग की ओर से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने विभाजन की त्रासदी से जुड़े इतिहास को स्मरण करते हुए यह संदेश दिया कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
पुलिस आयुक्त ने दिलाया एकता और अखंडता का संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पुलिस आयुक्त श्री रघुबीर लाल ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा, शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना पुलिस विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि अतीत की दुखद घटनाओं से सीख लेते हुए वर्तमान में ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें सभी नागरिक सुरक्षित महसूस करें और समाज में आपसी भाईचारा कायम रहे। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में भी सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
पुलिस आयुक्त के संबोधन के बाद उपस्थित पुलिस अधिकारियों और जवानों ने देश की एकता, अखंडता तथा सामाजिक शांति बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान यह संकल्प लिया गया कि पुलिस बल नागरिकों की सुरक्षा और कानून के शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का संदेश
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नई पीढ़ी को वर्ष 1947 की घटनाओं और उनसे जुड़े मानवीय पहलुओं से परिचित कराना भी है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि इतिहास को समझने के साथ-साथ उससे सकारात्मक सीख लेना जरूरी है।
विभाजन की पीड़ा को याद करते हुए समाज को यह संदेश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में मानवता, शांति और भाईचारे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा, सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए संवाद और परस्पर सम्मान की भावना को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में आयोजित यह कार्यक्रम इसी विचार को आगे बढ़ाता नजर आया। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने श्रद्धांजलि देने के साथ यह संदेश दिया कि अतीत की पीड़ाओं को याद करते हुए भविष्य में शांति और सौहार्द की नींव को और मजबूत किया जाना चाहिए।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने माना कि समाज में शांति बनाए रखना केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए प्रशासन, पुलिस और आम नागरिकों को मिलकर काम करना आवश्यक है।
इस अवसर पर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। साथ ही, देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प दोहराया गया।

