यूपी में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, FSSAI आंकड़ों में सबसे अधिक गैर-अनुरूप नमूने

f88805ee-22b0-4872-813d-54d770c8523b

Digital Up News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दूध, मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंता सामने आई है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े ताजा सरकारी आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में जांचे गए खाद्य नमूनों में बड़ी संख्या गैर-अनुरूप यानी निर्धारित मानकों पर खरी न उतरने वाले पाए गए हैं। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

लोकसभा में मार्च 2026 में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से प्राप्त आंकड़ों में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान उत्तर प्रदेश में 30,380 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 16,500 नमूने गैर-अनुरूप पाए गए। इनमें 2,690 नमूने असुरक्षित, 12,693 अधोमानक और 1,117 नमूने लेबलिंग, भ्रामक दावों या अन्य श्रेणियों में दर्ज किए गए।

इन आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में गैर-अनुरूप नमूनों की संख्या देश के राज्यों में सबसे अधिक रही। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि सबसे अधिक संख्या का अर्थ यह नहीं है कि जांचे गए नमूनों के अनुपात में भी उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। राज्यों में सैंपलिंग की मात्रा अलग-अलग होती है। इसलिए आंकड़ों को संख्या और प्रतिशत दोनों दृष्टिकोण से देखना जरूरी है।

FSSAI के आंकड़ों में यूपी की स्थिति

FSSAI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में देशभर में 1,70,535 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 34,388 नमूने गैर-अनुरूप पाए गए। वहीं, उत्तर प्रदेश में 30,380 नमूनों की जांच में 16,500 नमूने गैर-अनुरूप मिले। इस लिहाज से यूपी में गैर-अनुरूप नमूनों की संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक रही।

उत्तर प्रदेश के आंकड़ों को श्रेणीवार देखें तो 2,690 नमूने असुरक्षित पाए गए, जबकि 12,693 नमूने अधोमानक श्रेणी में दर्ज हुए। इसके अलावा 1,117 नमूनों में लेबलिंग संबंधी कमियां, भ्रामक दावे या अन्य अनियमितताएं सामने आईं।

इस स्थिति से यह संकेत मिलता है कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने केवल मिलावट रोकने की ही नहीं, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, मानकों और सही लेबलिंग सुनिश्चित करने की भी चुनौती है।

दूध और दूध से बने उत्पादों पर विशेष निगरानी

खाद्य पदार्थों में दूध और उससे बने उत्पादों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दूध का इस्तेमाल घरों से लेकर मिठाई, दही, पनीर, खोया, घी और अन्य उत्पादों में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इनकी गुणवत्ता सीधे उपभोक्ताओं के भरोसे से जुड़ी है।

केंद्र सरकार की मार्च 2026 की जानकारी के अनुसार, देश में दूध और दूध उत्पादों के निर्माता वर्ग में 1,17,928 खाद्य कारोबारियों के पास FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र था। साथ ही, FSSAI ने दूध और डेयरी उत्पादों में आम मिलावट की पहचान के लिए विश्लेषण की मान्य विधियां भी निर्धारित की हैं।

FSSAI के पास दूध और डेयरी उत्पादों की जांच के लिए अलग-अलग परीक्षण विधियां हैं। इनमें दूध में स्टार्च, यूरिया, ग्लूकोज, सोडियम क्लोराइड, बाहरी वसा, डिटर्जेंट, फॉर्मल्डिहाइड और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसी चीजों की पहचान से जुड़े परीक्षण शामिल हैं। इसके अलावा पनीर, खोया, मक्खन, दही और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए भी अलग-अलग गुणवत्ता परीक्षण निर्धारित हैं।

मिठाइयों और त्योहारों के दौरान बढ़ जाती है चुनौती

दूध आधारित मिठाइयां, खोया, पनीर और घी जैसे उत्पादों की मांग त्योहारों और विशेष अवसरों पर तेजी से बढ़ती है। ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभागों के सामने बड़ी संख्या में दुकानों, प्रतिष्ठानों, निर्माताओं और आपूर्ति केंद्रों की निगरानी की चुनौती रहती है।

इसी वजह से FSSAI और राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर विशेष जांच अभियान चलाते हैं। उत्तर प्रदेश में भी हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाए गए हैं। जुलाई 2026 में राज्य में 496 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 801 नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं को भेजे गए थे। विभाग के अनुसार, अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जब्त भी की गई थी।

इस तरह के अभियान का उद्देश्य केवल मिलावट वाले उत्पादों को पकड़ना नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों के पालन के लिए भी जिम्मेदार बनाना है।

2025-26 के आंकड़े भी सामने आए

FSSAI के उपलब्ध 2025-26 के आंकड़े भी खाद्य गुणवत्ता की चुनौती को दिखाते हैं। इस अवधि के आंकड़े फिलहाल प्रोविजनल हैं और आगे की प्रयोगशाला जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर इनमें बदलाव संभव है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में अब तक देशभर में 1,65,747 नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें 28,450 गैर-अनुरूप पाए गए। उत्तर प्रदेश में 27,154 नमूनों की जांच में 14,140 नमूने गैर-अनुरूप मिले। इनमें 2,221 असुरक्षित और 11,144 अधोमानक श्रेणी में दर्ज हुए, जबकि 775 नमूनों में लेबलिंग, भ्रामक दावों या अन्य कमियां दर्ज की गईं।

क्योंकि यह आंकड़ा अभी अंतिम नहीं है, इसलिए इसे अंतिम वार्षिक तस्वीर के रूप में देखना उचित नहीं होगा। फिर भी, उपलब्ध संख्या बताती है कि खाद्य सुरक्षा जांच को लगातार मजबूत बनाए रखने की जरूरत है।

मध्य प्रदेश के आंकड़े भी चर्चा में

स्क्रिप्ट में मध्य प्रदेश को लेकर ‘हर 56वां नमूना अधोमानक’ होने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध FSSAI के हालिया सरकारी आंकड़ों में राज्यों के लिए अलग-अलग वर्षों और श्रेणियों के आंकड़े दिए गए हैं। इसलिए इस दावे को किसी एक हालिया राष्ट्रीय FSSAI तालिका से सीधे जोड़ना सावधानी मांगता है।

वित्त वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश में 13,920 नमूनों का विश्लेषण किया गया और 1,635 नमूने गैर-अनुरूप पाए गए। इनमें 125 असुरक्षित, 1,012 अधोमानक और 498 नमूने लेबलिंग, भ्रामक दावों या अन्य श्रेणियों में दर्ज किए गए।

इसलिए अलग-अलग राज्यों की तुलना करते समय यह देखना जरूरी है कि बात कुल नमूनों की संख्या की हो रही है, अधोमानक नमूनों की संख्या की या कुल जांचे गए नमूनों में गैर-अनुरूप नमूनों के प्रतिशत की।

कार्रवाई और निगरानी भी जरूरी

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में सैंपलिंग के बाद कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी उत्पाद का नमूना निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें प्रशासनिक कार्रवाई, जुर्माना, उत्पाद की जब्ती और मामले की प्रकृति के अनुसार अन्य कानूनी प्रक्रिया शामिल हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान खाद्य सुरक्षा मामलों में 14,920 मामलों में निर्णय के साथ जुर्माना लगाया गया और 215 आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई।

इसके अलावा FSSAI ने खाद्य मिलावट की जांच को आसान बनाने के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब और ‘Food Safety on Wheels’ जैसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं। मार्च 2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब तैनात थीं।

उपभोक्ताओं की जागरूकता भी जरूरी

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सरकारी एजेंसियों के साथ उपभोक्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खरीदारी करते समय पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण और समाप्ति की तारीख, सामग्री की सूची तथा अन्य जरूरी जानकारी देखना उपयोगी है।

FSSAI ने आम नागरिकों के लिए ‘Detect Adulteration with Rapid Test’ यानी DART जैसी पहल भी शुरू की है। इसके माध्यम से घर पर कुछ खाद्य पदार्थों में मिलावट की प्राथमिक जांच के तरीके बताए गए हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार DART में दूध और दूध उत्पादों समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए कई त्वरित परीक्षण शामिल हैं।

हालांकि, घरेलू स्तर पर किए जाने वाले परीक्षण केवल प्राथमिक जांच में मदद कर सकते हैं। किसी खाद्य पदार्थ के मानक और कानूनी स्थिति की अंतिम पुष्टि अधिकृत प्रयोगशाला जांच से ही होती है।

मिलावट रोकने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत

खाद्य पदार्थों में मिलावट और अधोमानक गुणवत्ता का मुद्दा केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। फिर भी, उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में गैर-अनुरूप नमूने सामने आना निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खाद्य सुरक्षा के आंकड़ों को सही संदर्भ में समझा जाए। उत्तर प्रदेश में गैर-अनुरूप नमूनों की संख्या अधिक है, लेकिन राज्यों की तुलना करते समय सैंपलिंग के आकार और अनुपात को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसके साथ ही दूध, मिठाई, पनीर, खोया और अन्य रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की नियमित जांच बढ़ाने से उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत किया जा सकता है।

आखिरकार, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन, खाद्य कारोबारियों और उपभोक्ताओं—तीनों की साझा जिम्मेदारी है। लगातार जांच, सख्त कार्रवाई, पारदर्शी रिपोर्टिंग और उपभोक्ता जागरूकता के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

You may have missed