कानपुर में बाढ़ का खतरा: कटरी गांव खाली करने के निर्देश, गंगा का जलस्तर बढ़ने से पलायन शुरू
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुरः गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने कानपुर के कटरी और गंगा किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कई गांवों से ग्रामीणों का पलायन शुरू हो गया है। लोग जरूरी सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
गंगा बैराज पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बैराज पर गंगा का पानी अभी चेतावनी बिंदु से 38 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंगा किनारे के कई गांवों के खेतों में पानी पहुंच चुका है। ऐसे में ग्रामीणों को घरों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहने को कहा जा रहा है।
वहीं, उत्तराखंड के चमोली क्षेत्र में भारी बारिश और बादल फटने जैसी घटनाओं से नदी-नालों में पानी बढ़ने की खबरों के बीच गंगा के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। चमोली में हालिया भारी बारिश के कारण अचानक पानी बढ़ने की घटनाएं सामने आई हैं।
गंगा बैराज के सभी गेट खोले गए
गंगा के बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं। प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से पानी के प्रवाह पर लगातार नजर रखी जा रही है। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।गंगा बैराज से 5,44,373 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा हरिद्वार बैराज से 75,344 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,11,969 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इन आंकड़ों के कारण गंगा के जलस्तर में आने वाले समय में और वृद्धि की संभावना को देखते हुए कटरी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित गांवों के लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
गंगा बैराज पर जलस्तर की स्थिति
जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार गंगा बैराज पर जलस्तर इस प्रकार है—
- गंगा बैराज अपस्ट्रीम: 113.620 मीटर
- गंगा बैराज डाउनस्ट्रीम: 113.470 मीटर
- चेतावनी बिंदु: 114.000 मीटर
- खतरे का बिंदु: 115.000 मीटर
इस हिसाब से बैराज के अपस्ट्रीम क्षेत्र में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 38 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं खतरे के निशान से यह 1.380 मीटर नीचे है। हालांकि, लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन इसे सामान्य स्थिति मानकर चलने के बजाय एहतियाती कदम उठा रहा है।
शुक्लागंज में भी बढ़ रहा गंगा का पानी
शुक्लागंज में भी गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां जलस्तर 112.230 मीटर दर्ज किया गया है। शुक्लागंज में चेतावनी बिंदु 113.000 मीटर और खतरे का बिंदु 114.000 मीटर निर्धारित है।
इस प्रकार शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 77 सेंटीमीटर नीचे है। इसके बावजूद लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
कटरी के खेतों में पहुंचा पानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर सबसे पहले नदी के आसपास स्थित खेतों में दिखाई दे रहा है। कटरी क्षेत्र के कई गांवों में खेतों तक पानी पहुंच गया है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खरीफ की फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो खेतों के बाद आबादी वाले हिस्सों में भी जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की ओर से पहले ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह और निर्देश दिए जा रहे हैं।
बाढ़ की स्थिति में सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पशुओं को होती है। इसलिए ग्रामीणों से जरूरी दस्तावेज, दवाएं, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामान साथ लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा जा रहा है।
गांवों से पलायन शुरू
प्रशासन के निर्देश के बाद कटरी क्षेत्र के संवेदनशील गांवों से ग्रामीणों के सुरक्षित स्थानों की ओर जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। कई परिवार अपने जरूरी सामान को समेटकर रिश्तेदारों या ऊंचे स्थानों की ओर जा रहे हैं।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता घर के साथ पशुधन को सुरक्षित रखने की है। कटरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में बाढ़ की स्थिति बनने पर उनके सामने रहने के साथ-साथ पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करना भी चुनौती बन सकता है।
प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को पानी बढ़ने की स्थिति में नदी या जलभराव वाले रास्तों के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और राहत दल से संपर्क करने को कहा गया है।
प्रशासन की नजर जलस्तर और पानी के प्रवाह पर
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है। बैराज से छोड़े जा रहे पानी के साथ-साथ हरिद्वार और नरौरा बैराज से छोड़े गए पानी पर भी नजर रखी जा रही है। क्योंकि इन बैराजों से आने वाला पानी आगे चलकर गंगा के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर नदी में बढ़ते जलस्तर की निगरानी करनी है, वहीं दूसरी ओर तटवर्ती गांवों के लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।
पिछले वर्षों में भी गंगा के जलस्तर में वृद्धि के दौरान कानपुर के कटरी क्षेत्रों में खेतों और गांवों तक पानी पहुंचने की स्थिति सामने आती रही है। वर्ष 2025 में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण कटरी और तटवर्ती गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई थी तथा बैराज के सभी गेट खोलकर पानी छोड़ा गया था।
ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील
बाढ़ की आशंका के बीच ग्रामीणों को किसी भी अफवाह पर भरोसा न करने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। खासतौर पर बच्चों को नदी और तेज बहाव वाले पानी से दूर रखने की जरूरत है।
इसके साथ ही ग्रामीणों को बिजली के खंभों, टूटे तारों और पानी में डूबे रास्तों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। यदि किसी इलाके में पानी तेजी से बढ़ता है तो परिवार के सभी सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशासनिक स्तर पर भी संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर प्रभावित गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
अभी खतरे के निशान से नीचे है गंगा
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कानपुर गंगा बैराज और शुक्लागंज में जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। हालांकि, जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
गंगा बैराज पर खतरे का बिंदु 115 मीटर है, जबकि मौजूदा अपस्ट्रीम जलस्तर 113.620 मीटर है। यानी नदी का पानी अभी खतरे के निशान से 1.380 मीटर नीचे है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने और ऊपरी क्षेत्रों में बारिश के कारण प्रशासन ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस बीच, कटरी के ग्रामीणों का सुरक्षित स्थानों की ओर जाना इस बात का संकेत है कि लोग प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से ले रहे हैं। आने वाले घंटों में गंगा का जलस्तर किस गति से बढ़ता है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

