कानपुर में जर्जर धर्मशाला का छज्जा गिरा, सकरी गली में हादसे से लोगों में आक्रोश
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर। शहर के थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित बंगाली माहौल में कई वर्ष पुराने जर्जर धर्मशाला का छज्जा अचानक गिरने से हड़कंप मच गया। हादसा अरुण आटा चक्की के पास सकरी गली में हुआ। गनीमत रही कि छज्जा गिरने के दौरान किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों में नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखने को मिली।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि धर्मशाला का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में था। इसकी स्थिति को लेकर पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों और नगर निगम को शिकायतें दी गई थीं। इसके बावजूद भवन की स्थिति का स्थायी समाधान नहीं किया गया। अब छज्जा गिरने की घटना के बाद लोगों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि यदि समय रहते जर्जर भवनों की जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
सकरी गली में छज्जा गिरने से मचा हड़कंप
बताया जा रहा है कि बंगाली माहौल में अरुण आटा चक्की के पास स्थित पुरानी धर्मशाला का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। घटना जिस स्थान पर हुई, वह सकरी गली है और यहां स्थानीय लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में छज्जा गिरने की घटना ने आसपास रहने वाले लोगों को चिंतित कर दिया।
हादसे के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि, भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए लोगों ने भविष्य में होने वाले संभावित खतरे को लेकर सवाल उठाए हैं।
लंबे समय से जर्जर बताया जा रहा था भवन
स्थानीय लोगों के अनुसार, धर्मशाला का भवन कई वर्षों पुराना है और उसके कुछ हिस्से लंबे समय से खराब स्थिति में थे। लोगों का कहना है कि भवन के छज्जे और अन्य हिस्सों की स्थिति को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पुराने और जर्जर भवनों को लेकर प्रशासन तथा नगर निगम की ओर से समय-समय पर निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की जरूरत होती है। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां आसपास आबादी हो और लोगों की लगातार आवाजाही रहती हो, वहां भवनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
अब छज्जा गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करे और धर्मशाला की पूरी इमारत की स्थिति का आकलन कराया जाए। यदि भवन का कोई अन्य हिस्सा भी कमजोर पाया जाता है तो उसे लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जर्जर धर्मशाला को लेकर कई बार शिकायतें की गई थीं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कथित तौर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में शिकायतें कब और किस माध्यम से की गईं तथा उन पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, यह संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिर भी, घटना ने शहर में जर्जर भवनों की स्थिति और उनकी निगरानी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के पुराने इलाकों में कई भवन दशकों पुराने हैं। इनमें से कुछ भवनों की मरम्मत समय पर नहीं होने के कारण उनकी संरचनात्मक स्थिति कमजोर हो सकती है। ऐसे में नियमित निरीक्षण और समय रहते चेतावनी या कार्रवाई जरूरी मानी जाती है।
लोगों ने की भवन की जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि धर्मशाला की पूरी इमारत का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। केवल गिरे हुए छज्जे को हटाने के बजाय भवन के अन्य हिस्सों की स्थिति भी देखी जाए। यदि कोई हिस्सा कमजोर पाया जाता है तो उसे सुरक्षित करने अथवा आवश्यकतानुसार हटाने की कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा लोगों ने यह भी मांग की है कि आसपास के अन्य पुराने और जर्जर भवनों की स्थिति की जांच की जाए। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले से सावधानी बरतना ज्यादा बेहतर है।
क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक, सकरी गलियों में भवनों से जुड़ी किसी भी घटना का असर अधिक हो सकता है, क्योंकि आपात स्थिति में लोगों और राहत दलों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसलिए ऐसे इलाकों में जर्जर इमारतों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण है।
नगर निगम की भूमिका पर उठे सवाल
कानपुर जैसे पुराने और घनी आबादी वाले शहर में भवनों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण नागरिक मुद्दा है। पुराने भवनों की नियमित जांच, शिकायतों का समय पर निस्तारण और जोखिम वाले हिस्सों को सुरक्षित करना स्थानीय निकाय की जिम्मेदारियों में शामिल है। इसलिए बंगाली माहौल में हुई इस घटना के बाद लोगों की निगाहें नगर निगम की कार्रवाई पर टिकी हैं।
यदि स्थानीय लोगों की ओर से वास्तव में पहले शिकायतें की गई थीं, तो यह भी सामने आना चाहिए कि उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। साथ ही, घटना के बाद धर्मशाला की स्थिति को लेकर प्रशासन या नगर निगम की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल छज्जा गिरने की घटना में जनहानि नहीं होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन इस घटना ने यह जरूर संकेत दिया है कि जर्जर भवनों को लेकर समय रहते सतर्कता बरतना जरूरी है। स्थानीय नागरिक चाहते हैं कि संबंधित विभाग मामले का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण करे और धर्मशाला की सुरक्षा स्थिति स्पष्ट करे।
हादसे के बाद बढ़ी चिंता
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत या निगरानी नहीं हुई तो भविष्य में राहगीरों और आसपास के निवासियों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है।
फिलहाल इस घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है, जो सबसे बड़ी राहत की बात है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय जर्जर भवनों की पहले से पहचान कर आवश्यक कदम उठाए।
बंगाली माहौल में अरुण आटा चक्की के पास धर्मशाला का छज्जा गिरने की घटना ने पुराने भवनों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या आसपास मौजूद अन्य जर्जर भवनों की भी जांच कराई जाती है।

