जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ केंद्र की बड़ी पहल, 5 साल में उपचार पाने वालों की संख्या 8 गुना बढ़ी
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों के सेवन की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्यसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में जम्मू-कश्मीर में नशे की स्थिति और सरकार की ओर से संचालित कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार की सहायता से चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार पाने वाले लोगों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।
जम्मू-कश्मीर में नशे के सेवन की स्थिति
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से एम्स के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (NDDTC) के माध्यम से वर्ष 2018 में भारत में मादक पदार्थों के सेवन की व्यापकता और स्वरूप को लेकर राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराया गया था। इस सर्वेक्षण में जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े सामने आए थे।
सर्वेक्षण के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में ओपिओइड की व्यापकता 4.91 प्रतिशत थी। 10 से 75 वर्ष की आयु वर्ग में इसके अनुमानित 5.40 लाख उपयोगकर्ता बताए गए थे। वहीं, शराब की व्यापकता 3.50 प्रतिशत दर्ज की गई थी और इसके अनुमानित 3.90 लाख उपयोगकर्ता थे।
इसके अलावा शामक दवाओं की व्यापकता 1.54 प्रतिशत रही, जिनके अनुमानित उपयोगकर्ताओं की संख्या 1.70 लाख बताई गई। कैनाबिस यानी गांजा की व्यापकता 1.31 प्रतिशत थी और इसके करीब 1.40 लाख उपयोगकर्ता होने का अनुमान लगाया गया था। इसी तरह इनहेलेंट्स की व्यापकता 1.22 प्रतिशत थी और इनके अनुमानित उपयोगकर्ताओं की संख्या 1.35 लाख थी।
नशा मुक्ति सेवाओं का बढ़ाया गया नेटवर्क
राज्यसभा में श्री सज्जाद अहमद किचलू के प्रश्न के लिखित उत्तर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने बताया कि सरकार जम्मू-कश्मीर में उपचार और पुनर्वास सुविधाओं का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार करने में सहायता कर रही है।
वर्तमान में केंद्र सरकार की सहायता से जम्मू-कश्मीर में 1 नशा मुक्ति एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA), 3 आउटरीच एवं ड्रॉप-इन केंद्र (ODIC), 2 समुदाय-आधारित सहकर्मी नेतृत्व वाले हस्तक्षेप (CPLI) कार्यक्रम, 6 जिला नशा-मुक्ति केंद्र (DDAC) और 21 व्यसन उपचार सुविधाएं (ATF) संचालित हैं।
इन केंद्रों का उद्देश्य केवल नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार देना ही नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक जीवन की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना भी है। इसके साथ ही परिवारों और समुदायों को भी जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।
पांच साल में तेजी से बढ़ी उपचार पाने वालों की संख्या
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में विभाग द्वारा समर्थित केंद्रों पर नशामुक्ति का उपचार प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां 5,382 लोगों ने उपचार प्राप्त किया था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 46,491 हो गई।
वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022-23 में 27,843 लोगों ने उपचार लिया। इसके बाद 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 36,588 हो गई। वर्ष 2024-25 में 40,546 लोगों ने नशामुक्ति सेवाओं का लाभ उठाया। अंततः 2025-26 में यह आंकड़ा 46,491 तक पहुंच गया।
इस प्रकार, कुछ ही वर्षों में उपचार सेवाओं तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी एक ओर नशे से जुड़ी समस्या की गंभीरता को सामने रखती है, वहीं दूसरी ओर उपचार और पुनर्वास सुविधाओं तक लोगों की बढ़ती पहुंच का भी संकेत देती है।
NAPDDR के तहत मिल रही वित्तीय सहायता
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कार्य योजना फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (NAPDDR) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नशे की मांग कम करने से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
इसमें निवारक शिक्षा, जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण और नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा गैर-सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक संगठनों को IRCA, CPLl, ODIC और DDAC के संचालन एवं रखरखाव में सहायता दी जाती है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में व्यसन उपचार सुविधाएं यानी ATF स्थापित करने के लिए भी सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।
देशभर में NAPDDR के तहत 344 IRCA, 45 CPLI कार्यक्रम, 76 ODIC, 155 ATF और 145 DDAC को समर्थन दिया जा रहा है।
अलग-अलग केंद्रों की अलग भूमिका
IRCA में नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को परामर्श, नशामुक्ति उपचार, उपचार के बाद देखभाल और सामाजिक मुख्यधारा में दोबारा शामिल होने में सहायता दी जाती है। इसके साथ ही यहां जरूरत के अनुसार भर्ती करके उपचार की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
वहीं, CPLI कार्यक्रम विशेष रूप से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर केंद्रित हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कम उम्र में नशे से संबंधित जोखिमों की पहचान करना और समय रहते आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
ODIC केंद्रों में जांच, मूल्यांकन और परामर्श की सुविधा दी जाती है। जरूरत पड़ने पर लोगों को उपचार और पुनर्वास सेवाओं के लिए संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने में भी इन केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 से मिल रही मदद
सरकार की ओर से नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों के लिए टोल-फ्री नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 भी संचालित की जा रही है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से लोगों को प्राथमिक परामर्श और तत्काल रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अब तक इस हेल्पलाइन पर 4.6 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर से 11,000 से अधिक कॉल शामिल हैं। इससे पता चलता है कि नशामुक्ति सेवाओं और मार्गदर्शन की जरूरत को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है।
नशा मुक्त भारत अभियान से करोड़ों लोग जुड़े
केंद्र सरकार ने 15 अगस्त 2020 को देश के 272 संवेदनशील जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) की शुरुआत की थी। इसके बाद अगस्त 2023 से इस अभियान को देश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया।
अभियान के तहत मुख्य रूप से स्कूलों, उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालय परिसरों में जागरूकता गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है। राज्यों के सहयोग से अब तक देशभर में 30.52 करोड़ से अधिक लोगों तक अभियान की पहुंच बताई गई है। इनमें 11.87 करोड़ से अधिक युवा और 8.45 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों में 28.61 लाख से अधिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। देशभर में 28.29 लाख से अधिक लोगों के उपचार और पुनर्वास की जानकारी भी सरकार ने दी है।
जम्मू-कश्मीर में 1.20 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंच
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जम्मू-कश्मीर में भी बड़े स्तर पर जागरूकता और संपर्क गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में 1.20 करोड़ से अधिक लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया है।
इनमें 69.14 लाख से अधिक युवा और 51.20 लाख महिलाएं शामिल हैं। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में कुल 8,565 नशा मुक्त मित्र अभियान से जुड़ चुके हैं। ये लोग समुदाय के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों को सहायता सेवाओं से जोड़ने में भूमिका निभा रहे हैं।
रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर एक साथ जोर
जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार अब केवल उपचार तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसके लिए रोकथाम, जागरूकता, शुरुआती पहचान, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन को एक साथ जोड़कर काम किया जा रहा है।
नशे की समस्या का समाधान केवल चिकित्सा सेवाओं से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रशासन और समाज सभी की भागीदारी जरूरी होती है। ऐसे में नशा मुक्त भारत अभियान और NAPDDR के तहत संचालित योजनाएं लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ जरूरतमंदों को उपचार की सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सरकार द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में नशामुक्ति सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में जागरूकता कार्यक्रमों और उपचार सुविधाओं की पहुंच बढ़ाकर नशीली दवाओं की मांग को कम करने तथा प्रभावित लोगों को सामान्य सामाजिक जीवन में वापस लाने पर जोर दिया जा सकता है।

