विश्व अंगदान दिवस पर कानपुर में 51 लोगों ने ली अंगदान की महाशपथ
रिपोर्ट – हरिशंकर शर्मा
कानपुर: विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर कानपुर में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को इस मानवीय पहल से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
युग दधीचि देहदान संस्थान, कानपुर के तत्वावधान में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एलटी-वन सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 51 लोगों ने अंगदान की महाशपथ लेकर मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
कार्यक्रम में अंगदान का संकल्प लेने वाले सभी लोगों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अंगदान केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन का अवसर देने वाली महत्वपूर्ण सामाजिक पहल है। इसलिए समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। खास बात यह रही कि पांच प्रमुख लोगों ने भी अंगदान का संकल्प लेते हुए विधिवत शपथपत्र भरा। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर लोगों को अंगदान प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई।
51 लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प
विश्व अंगदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कुल 51 लोगों ने अंगदान की महाशपथ ली। सभी संकल्पकर्ताओं ने अंगदान के महत्व को समझते हुए मानव सेवा के इस अभियान से जुड़ने का संकल्प लिया।
आयोजकों के अनुसार, अंगदान के माध्यम से मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने में मदद की जा सकती है। ऐसे में लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान संकल्प लेने वाले लोगों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इससे उनका उत्साह बढ़ा और अन्य उपस्थित लोगों को भी अंगदान के लिए प्रेरणा मिली।
आयोजकों ने कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई जरूरतमंद लोगों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है। इसलिए अंगदान को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखने की आवश्यकता है।
शहर के पांच प्रमुख लोगों ने भी भरा शपथपत्र
कार्यक्रम में शहर के पांच प्रमुख लोगों ने अंगदान की घोषणा करते हुए विधिवत शपथपत्र भरा। देहदान अभियान प्रमुख मनोज सेंगर ने इन सभी संकल्पकर्ताओं का सम्मान किया और उनकी सामाजिक पहल की सराहना की।
अंगदान का संकल्प लेने वालों में विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष राजीव महाना, धर्मसंघ संयोजक पं. शेष नारायण त्रिवेदी ‘पप्पू भैया’, उत्कर्ष अकादमी के निदेशक डॉ. प्रदीप दीक्षित, मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष सिंह और वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. युवराज गुलाटी शामिल रहे।
इन लोगों ने अंगदान को लेकर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए शपथपत्र भरा। आयोजकों ने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख लोगों के इस तरह आगे आने से अंगदान के प्रति आम लोगों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
मौके पर ही मिला अंगदान प्रमाणपत्र
कार्यक्रम की एक विशेष पहल यह रही कि लोगों को अंगदान प्रमाणपत्र के लिए अलग से कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। आयोजन स्थल पर ही प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।
आयोजकों के अनुसार, नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO), नई दिल्ली की ओर से अंगदान प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी। निर्धारित एप पर आधार नंबर दर्ज करने और आवश्यक जानकारी भरने के बाद प्रमाणपत्र तत्काल जनरेट किया गया।
आयोजन स्थल पर प्रिंटर समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इसके चलते जिन लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया, उन्हें मौके पर ही अपना प्रमाणपत्र प्राप्त हो गया।
इस व्यवस्था से लोगों को अंगदान की प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिली। साथ ही, कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों को भी अंगदान के लिए प्रेरित किया गया।
अंगदान से किसी जरूरतमंद को मिल सकता है जीवन
देहदान अभियान प्रमुख मनोज सेंगर ने कहा कि अंगदान केवल एक संकल्प नहीं है, बल्कि मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कई लोग अंगदान करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसकी प्रक्रिया और इससे जुड़े नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
मनोज सेंगर ने कहा कि यदि अधिक संख्या में लोग अंगदान का संकल्प लें तो जरूरतमंद मरीजों के लिए अंग उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना चाहिए।
उन्होंने अंगदान को मानवता और सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अंग किसी दूसरे जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद पैदा कर सकते हैं।
जागरूकता बढ़ाने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंगदान के प्रति लोगों में सकारात्मक सोच विकसित करना जरूरी है।
अक्सर जानकारी के अभाव में लोग अंगदान से जुड़े निर्णय लेने में संकोच करते हैं। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को अंगदान की प्रक्रिया, पंजीकरण और प्रमाणपत्र से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना उपयोगी साबित हो सकता है।
कार्यक्रम में लोगों को यह संदेश भी दिया गया कि अंगदान का संकल्प सोच-समझकर और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया जाना चाहिए। साथ ही, लोगों से इस विषय पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी चर्चा करने की अपील की गई, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी इच्छा और संकल्प के बारे में परिवार को जानकारी हो।
सामाजिक सेवा का संदेश बना कार्यक्रम
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम ने अंगदान के साथ-साथ सामाजिक सेवा और मानवता का संदेश दिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और 51 लोगों द्वारा अंगदान की महाशपथ लेना आयोजकों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
इसके अलावा शहर के पांच प्रमुख लोगों द्वारा अंगदान का संकल्प लेने से कार्यक्रम को और व्यापक संदेश मिला। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से समाज के अन्य लोग भी प्रेरित होंगे और अंगदान के लिए आगे आएंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अंगदान के महत्व को समझने के साथ ही इस अभियान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
प्रमाणपत्र की सुविधा से लोगों को मिली सहूलियत
आयोजन स्थल पर अंगदान प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था ने कार्यक्रम में आए लोगों को विशेष सुविधा दी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक जानकारी दर्ज करने के बाद प्रमाणपत्र तत्काल जनरेट किया गया।
इससे लोगों को यह समझने में मदद मिली कि अंगदान के संकल्प को औपचारिक रूप देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है। साथ ही, डिजिटल माध्यम से प्रमाणपत्र उपलब्ध होने से प्रक्रिया भी सरल बनी।
आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रकाश धवन, रवि तिवारी, मदन लाल भाटिया और प्रेमलता तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सभी ने अंगदान अभियान के प्रति अपनी रुचि दिखाई और आयोजकों की पहल की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन मनोज सेंगर ने किया, जबकि संस्था की महासचिव माधवी सेंगर ने उपस्थित अतिथियों, संकल्पकर्ताओं और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने लोगों से अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने और इस मानवीय अभियान को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
अंगदान को जनआंदोलन बनाने की जरूरत
कानपुर में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर अंगदान की उपयोगिता और इसके सामाजिक महत्व को सामने रखा। 51 लोगों का अंगदान की महाशपथ लेना और पांच प्रमुख लोगों का विधिवत शपथपत्र भरना इस दिशा में सकारात्मक कदम माना जा सकता है।
अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ने से जरूरतमंद मरीजों के लिए अंग उपलब्ध कराने की दिशा में समाज की भागीदारी बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए लोगों को सही जानकारी, निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से ही अंगदान से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, विश्व अंगदान दिवस पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम मानवता, सामाजिक सेवा और जागरूकता का संदेश देने वाला रहा। आयोजन के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प किसी जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद ला सकता है।

