राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, 17 अगस्त को सुनवाई
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों का कानून के मुताबिक सत्यापन करने और मामले में हुई प्रगति से अदालत को अवगत कराने को कहा था। अब राहुल गांधी ने इस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।
राहुल गांधी ने 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। पहली याचिका में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनके तहत CBI और ED को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच या सत्यापन की दिशा में कदम उठाने को कहा गया था। वहीं, दूसरी याचिका में उन्होंने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है। दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कर्नाटक निवासी और BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति है। इसी शिकायत पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई में CBI और ED को आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन करने तथा मामले की प्रगति से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया था।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत द्वारा साबित मान लिए गए हैं। मामला फिलहाल आरोपों के सत्यापन और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। आगे की स्थिति जांच और अदालतों में होने वाली सुनवाई के आधार पर तय होगी।
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों दाखिल की याचिका?
राहुल गांधी की ओर से दाखिल पहली याचिका का मुख्य उद्देश्य इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देना है। दूसरी ओर, ट्रांसफर पिटीशन के जरिए मामले को दिल्ली हाईकोर्ट ले जाने की मांग की गई है। इस तरह शीर्ष अदालत के सामने अब दो अलग-अलग पहलू हैं—पहला, हाईकोर्ट के आदेशों की वैधता पर चुनौती और दूसरा, मामले को दूसरी हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का अनुरोध।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आने के कारण इस पर देशभर की राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हैं। हालांकि, शीर्ष अदालत में सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राहुल गांधी की याचिकाओं पर क्या रुख अपनाया जाता है।
17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
राहुल गांधी की दोनों याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध बताई गई हैं। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष होने की जानकारी सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राहुल गांधी ने एक ही मामले से संबंधित दो अलग-अलग राहतों की मांग की है। एक याचिका में हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी में मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।
मई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
मई 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए CBI और ED को आरोपों का कानून के मुताबिक सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने जांच एजेंसियों को मामले की प्रगति के बारे में जानकारी देने के लिए भी कहा था।
अदालत का निर्देश मुख्य रूप से शिकायत में लगाए गए आरोपों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच और सत्यापन से संबंधित था। इसके बाद दोनों केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से अदालत के समक्ष जवाब और प्रगति से संबंधित जानकारी पेश की गई।
इस मामले में अदालत ने जांच एजेंसियों को कानून के दायरे में रहते हुए उचित कदम उठाने की स्वतंत्रता भी दी थी। इसका मतलब यह है कि जांच के दौरान यदि कोई ऐसा तथ्य सामने आता है, जिस पर कानूनी कार्रवाई जरूरी हो, तो संबंधित एजेंसी कानून के अनुसार आगे बढ़ सकती है।
CBI के जवाब से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं
मामले की अगली सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया था। 20 जुलाई की सुनवाई में अदालत ने कहा कि CBI का जवाब उसके पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट नहीं था। अदालत ने एजेंसी से मामले में हुई प्रगति को लेकर नया हलफनामा दाखिल करने को कहा।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने CBI के जवाब में जांच की प्रगति से संबंधित पर्याप्त स्पष्टता नहीं होने पर सवाल उठाए थे। इसके बाद संबंधित अधिकारी को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
इससे पहले अदालत ने CBI और ED दोनों से शिकायत पर हुई कार्रवाई और प्रगति की जानकारी मांगी थी। हालांकि, दोनों एजेंसियों के जवाब को लेकर अदालत का रुख अलग-अलग रहा।
ED को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ED की ओर से दाखिल जवाब का भी परीक्षण किया था। अदालत ने माना कि ED की ओर से आवश्यक कदम उठाए गए हैं। साथ ही अदालत ने कहा था कि यदि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी, दस्तावेज या ऐसी सामग्री सामने आती है, जिससे किसी गैरकानूनी गतिविधि का संकेत मिलता है, तो ED कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
इस टिप्पणी के बाद मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई। हालांकि, अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि राहुल गांधी के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। मामला अभी न्यायिक और जांच प्रक्रिया के स्तर पर है।
अब आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें 17 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं। राहुल गांधी की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत सुनवाई के दौरान यह देख सकती है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देने के आधार क्या हैं और मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग पर क्या विचार किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी मामले की कार्यवाही जारी है। ताजा उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त 2026 को सूचीबद्ध है।
इस प्रकार, आने वाले दिनों में यह मामला दो स्तरों पर महत्वपूर्ण रहेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को राहुल गांधी की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जांच से संबंधित आगे की कार्रवाई पर सुनवाई जारी रहेगी।
राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मामला
राहुल गांधी वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। ऐसे में उनके खिलाफ किसी जांच से जुड़ी कानूनी कार्यवाही का राजनीतिक महत्व भी है। हालांकि, इस मामले की रिपोर्टिंग करते समय आरोप और सिद्ध तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर आरोप लगाए हैं और अदालत ने संबंधित एजेंसियों को शिकायत का कानून के अनुसार सत्यापन करने को कहा है।
अब आगे की तस्वीर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से स्पष्ट होगी। 17 अगस्त की सुनवाई में शीर्ष अदालत का रुख इस मामले की आगे की कानूनी दिशा को प्रभावित कर सकता है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी जांच की प्रगति को लेकर कार्यवाही जारी रहेगी।

