हर घर तिरंगा यात्रा में उल्टा तिरंगा नजर आने से उठे सवाल, तस्वीरें वायरल

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रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान

इटावा: स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में इटावा के बकेवर क्षेत्र में भाजपा नेताओं के नेतृत्व में करीब चार किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ आगे बढ़े। हालांकि, इसी यात्रा की कुछ तस्वीरें सामने आने के बाद अब तिरंगे के सही तरीके से प्रदर्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में भाजपा के एक पूर्व जिलाध्यक्ष के हाथ में कथित तौर पर उल्टा तिरंगा दिखाई दे रहा है। तस्वीर में उनके आसपास मौजूद लोगों में से एक अन्य व्यक्ति के हाथ में भी तिरंगा उल्टे क्रम में नजर आने का दावा किया जा रहा है। यात्रा के दौरान इटावा के एक पूर्व सांसद के भी साथ मौजूद होने की बात सामने आई है। हालांकि, वायरल तस्वीरों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि झंडा जानबूझकर उल्टा रखा गया था या यह अनजाने में हुई चूक थी।

चार किलोमीटर तक निकाली गई तिरंगा यात्रा

जानकारी के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस से पहले बकेवर क्षेत्र में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से करीब चार किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा क्षेत्र के प्रमुख मार्गों और मोहल्लों से होकर गुजरी। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर देशभक्ति का संदेश दिया।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना है। ऐसे में अभियान से जुड़े आयोजनों में तिरंगे के सम्मान और उसके सही प्रदर्शन को लेकर विशेष सावधानी अपेक्षित रहती है।

यात्रा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बात पर सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि तस्वीर में दिखाई दे रहा झंडा वास्तव में उल्टा था, तो यात्रा में शामिल जिम्मेदार लोगों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया।

वायरल तस्वीरों को लेकर उठ रहे सवाल

वायरल तस्वीरों में दिखाई दे रहे दृश्य को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे तिरंगे के प्रदर्शन में हुई गंभीर लापरवाही बता रहे हैं, जबकि यह भी संभव है कि तस्वीर में झंडे की स्थिति किसी क्षण विशेष में ऐसी दिखाई दी हो।

ऐसे में किसी व्यक्ति की मंशा पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तस्वीरों की वास्तविक स्थिति और पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करना जरूरी है। खास तौर पर क्योंकि मामला राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ा है और इससे भावनाएं भी जुड़ी होती हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला वायरल तस्वीरों के आधार पर चर्चा में आया है। संबंधित भाजपा नेताओं की ओर से इस तस्वीर या कथित चूक को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया है या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।

झंडा संहिता में क्या है नियम?

भारत में राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन और उपयोग को लेकर भारतीय झंडा संहिता, 2002 लागू है। गृह मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज देश के गौरव और राष्ट्रीय भावनाओं का प्रतीक है तथा इसे सम्मान के साथ प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी FAQ में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय ध्वज को उल्टे तरीके से प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। यानी केसरिया पट्टी नीचे की ओर नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त झंडे को प्रदर्शित करने से भी बचने के निर्देश हैं।

झंडा संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानजनक स्थान पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। गृह मंत्रालय ने समय-समय पर राज्यों और विभिन्न संस्थाओं को झंडा संहिता तथा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की सलाह भी जारी की है।

इसलिए सार्वजनिक कार्यक्रमों, रैलियों और तिरंगा यात्राओं में आयोजकों तथा प्रतिभागियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि राष्ट्रीय ध्वज को निर्धारित नियमों के अनुरूप ही रखा और प्रदर्शित किया जाए।

क्या इसे तिरंगे का अपमान माना जाएगा?

वायरल तस्वीरों के आधार पर सीधे तौर पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि संबंधित लोगों ने जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। इसके लिए घटना की पूरी परिस्थितियों, तस्वीर की प्रामाणिकता और संबंधित लोगों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

हालांकि, यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज वास्तव में उल्टा प्रदर्शित हुआ है, तो यह झंडा संहिता में निर्धारित सही प्रदर्शन के अनुरूप नहीं माना जाएगा। गृह मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में उल्टे तरीके से राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित न करने की स्पष्ट हिदायत दी गई है।

यही वजह है कि ‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियान में ऐसी तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठना स्वाभाविक है। अभियान का उद्देश्य लोगों को तिरंगे के प्रति सम्मान के लिए प्रेरित करना है, इसलिए इसमें शामिल जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से अतिरिक्त सतर्कता की अपेक्षा की जाती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

तस्वीरों के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब यात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना था, तब तिरंगे के प्रदर्शन में कथित चूक कैसे हुई।

दूसरी ओर, यह भी महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी तस्वीर को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी पुष्टि की जाए। तस्वीर किस समय ली गई, उसमें झंडा किस स्थिति में था और क्या उसके बाद उसे सही किया गया, जैसे सवालों का जवाब सामने आना बाकी है।

ऐसे मामलों में संबंधित आयोजकों या नेताओं का स्पष्टीकरण तस्वीरों से जुड़े विवाद को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आयोजकों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण

तिरंगा यात्रा जैसे सार्वजनिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इसलिए आयोजकों की जिम्मेदारी होती है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी प्रतिभागियों को राष्ट्रीय ध्वज के सही प्रदर्शन की जानकारी दी जाए। इसके साथ ही यात्रा के दौरान भी यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई झंडा उल्टा, क्षतिग्रस्त या अनुचित तरीके से प्रदर्शित न हो।

विशेष रूप से स्वतंत्रता दिवस के आसपास ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत देशभर में बड़ी संख्या में कार्यक्रम होते हैं। ऐसे में झंडा संहिता के नियमों को लेकर जागरूकता और सावधानी दोनों जरूरी हैं।

तस्वीरों ने खड़ा किया सवाल

बकेवर की तिरंगा यात्रा की वायरल तस्वीरों ने फिलहाल एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े कार्यक्रमों में नियमों के पालन को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के हाथ में कथित तौर पर उल्टा तिरंगा दिखाई देने और उनके साथ एक अन्य व्यक्ति के हाथ में भी ऐसे ही झंडे की तस्वीर सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में है।

हालांकि, इस पूरे मामले में किसी तरह का अंतिम निष्कर्ष संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण और तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि होने के बाद ही निकाला जाना उचित होगा। फिलहाल मामला वायरल तस्वीरों के आधार पर सामने आया है और इसी वजह से इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

स्वतंत्रता दिवस से पहले निकाली गई इस यात्रा का उद्देश्य देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना था। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि आगे होने वाले तिरंगा यात्राओं और ‘हर घर तिरंगा’ से जुड़े कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और झंडा संहिता के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

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