ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते को मिली सफलता: कानपुर सेंट्रल RPF ने लापता इस बालक को परिजनों से मिलाया

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से एक लापता 11 वर्षीय बालक को सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों तथा संबंधित स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया। यह कार्रवाई रेलवे परिसरों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरतमंद नाबालिगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन पर नियमित जांच अभियान के दौरान बालक संदिग्ध और परेशान अवस्था में अकेला घूमता मिला। पूछताछ और सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हुआ कि बालक लखनऊ से लापता था और उसके संबंध में पहले से पुलिस थाने में मामला दर्ज था। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे सकुशल संबंधित पुलिस और परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

स्टेशन चेकिंग के दौरान मिला नाबालिग

आरपीएफ के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को उप निरीक्षक मो. असलम खान और सहायक उप निरीक्षक सुनीता कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर नियमित चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान प्लेटफार्म संख्या-1 के मुख्य हॉल में एक नाबालिग बालक अकेला और परेशान अवस्था में घूमता दिखाई दिया।

बालक के व्यवहार को देखते हुए आरपीएफ कर्मियों ने उसे अपने पास बुलाया और सामान्य बातचीत के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास किया। हालांकि, शुरुआत में बालक घबरा गया और रोने लगा। इसके बाद उसे आरपीएफ पोस्ट ले जाया गया, जहां शांत वातावरण में उसकी काउंसलिंग करते हुए पूछताछ की गई।

पूछताछ में सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी

आरपीएफ द्वारा की गई पूछताछ में बालक ने अपना नाम पिंकू कश्यप, पिता कमलेश कुमार, उम्र लगभग 11 वर्ष और पता सेक्टर-12A, वृंदावन योजना, थाना पीजीआई, लखनऊ बताया। बालक ने बताया कि वह 2 जुलाई 2026 की सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकला था।

उसके अनुसार, रास्ते में कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने उसे जबरन एक कार में बैठा लिया। बाद में उसे कानपुर नगर के किसी स्थान पर छोड़ दिया गया। उसने यह भी बताया कि उस समय उसके पास मौजूद स्कूल बैग और स्कूल ड्रेस उसके पास नहीं थे। इसके बाद वह राहगीरों से रास्ता पूछते हुए किसी तरह कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया।

परिवार से किया गया तत्काल संपर्क

बालक द्वारा बताए गए मोबाइल नंबर के आधार पर आरपीएफ ने तत्काल उसके परिवार से संपर्क किया। फोन पर हुई बातचीत में बालक के पिता कमलेश कुमार ने पुष्टि की कि उनका पुत्र 2 जुलाई से लापता था।

उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में थाना पीजीआई, लखनऊ में पहले ही गुमशुदगी और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कराया जा चुका है। यह जानकारी मिलते ही आरपीएफ ने स्थानीय पुलिस से समन्वय स्थापित किया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।

लखनऊ पुलिस भी पहुंची कानपुर

कुछ समय बाद थाना पीजीआई, लखनऊ से उप निरीक्षक योगेश कुमार यादव तथा कांस्टेबल संदीप कुमार बालक के पिता के साथ आरपीएफ पोस्ट, कानपुर सेंट्रल पहुंचे।

पुलिस टीम ने मामले से संबंधित पंजीकृत एफआईआर की प्रति प्रस्तुत की। दस्तावेजों और पहचान का मिलान करने के बाद बालक की पहचान की विधिवत पुष्टि की गई। इसके बाद आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई।

कानूनी औपचारिकताओं के बाद सौंपा गया बालक

आरपीएफ ने सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया। इसके साथ ही नियमानुसार फोटोग्राफी और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी की गईं।

सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद बालक को पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ अवस्था में थाना पीजीआई पुलिस को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया।

आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि पूरी कार्रवाई निर्धारित नियमों और बाल संरक्षण से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए संपन्न की गई।

ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते का उद्देश्य

भारतीय रेलवे द्वारा संचालित ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते का उद्देश्य रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में मिलने वाले लापता, भटके हुए अथवा संकटग्रस्त बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराना है।

इस अभियान के अंतर्गत आरपीएफ और रेलवे प्रशासन मिलकर ऐसे बच्चों को तत्काल सहायता प्रदान करते हैं तथा आवश्यक सत्यापन के बाद उन्हें उनके परिजनों या संबंधित बाल संरक्षण संस्थाओं के सुपुर्द किया जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान के माध्यम से देशभर में हजारों बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है।

आरपीएफ की सतर्कता बनी सफलता की कुंजी

इस मामले में भी आरपीएफ कर्मियों की सजगता और संवेदनशील व्यवहार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यदि स्टेशन पर नियमित जांच के दौरान बालक पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता, तो वह और अधिक असुरक्षित स्थिति में पहुंच सकता था।

अधिकारियों ने पहले बालक का विश्वास जीता, फिर उसकी जानकारी जुटाई और उसके बाद परिजनों तथा संबंधित पुलिस से संपर्क स्थापित किया। यही कारण रहा कि बालक को शीघ्र ही सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जा सका।

बच्चों की सुरक्षा में समाज की भी अहम भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई बच्चा अकेला, घबराया हुआ या असहाय दिखाई दे, तो उसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

ऐसी स्थिति में तुरंत रेलवे सुरक्षा बल, स्थानीय पुलिस, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन या संबंधित अधिकारियों को सूचना देना आवश्यक है। समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों को यह जानकारी देना चाहिए कि यदि वे कभी रास्ता भटक जाएं, तो पुलिस, आरपीएफ या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से ही सहायता लें।

कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत की गई यह कार्रवाई रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता, संवेदनशीलता और त्वरित समन्वय का सकारात्मक उदाहरण है। नियमित जांच के दौरान मिले 11 वर्षीय बालक की पहचान कर उसे सुरक्षित उसके परिजनों और संबंधित पुलिस के सुपुर्द किया गया, जिससे एक परिवार को बड़ी राहत मिली।

यह घटना यह भी दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस और आम नागरिकों के सहयोग से बच्चों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। ऐसे अभियान भविष्य में भी रेलवे परिसरों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

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