कानपुर में आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और सुदृढ़, ‘संभव अभियान 6.0’ से कुपोषित बच्चों की होगी नियमित निगरानी

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: जनपद में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा। इसके साथ ही ‘संभव अभियान 6.0’ के माध्यम से गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की नियमित पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और फॉलोअप की प्रभावी व्यवस्था लागू की जाएगी। यह निर्देश जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने जिला कन्वर्जेंस प्लान समिति की बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को दिए।

शुक्रवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि बच्चों और महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध कराई जा सकें।

आंगनबाड़ी केंद्रों को बनाया जाएगा अधिक प्रभावी

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए केंद्रों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली सभी सेवाओं की नियमित समीक्षा की जाए तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

विभागों के समन्वय से सफल होगा अभियान

जिलाधिकारी ने कहा कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा पंचायती राज विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि अभियान का लाभ प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक समय पर पहुंच सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विभाग नियमित रूप से आंकड़ों का आदान-प्रदान करें और संयुक्त रूप से अभियान की प्रगति की समीक्षा करें। इससे योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

कुपोषित बच्चों की होगी नियमित पहचान

बैठक के दौरान विशेष रूप से गंभीर कुपोषण (SAM) और मध्यम कुपोषण (MAM) से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान पर जोर दिया गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे सभी बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए और आवश्यकता के अनुसार उपचार भी सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी बच्चे में चिकित्सकीय जटिलताएं पाई जाती हैं, तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाए।

इसके अतिरिक्त, एनआरसी से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों की नियमित निगरानी, गृह भ्रमण और स्वास्थ्य स्थिति का फॉलोअप भी अनिवार्य रूप से किया जाए।

छह माह से कम आयु के शिशुओं पर रहेगा विशेष फोकस

जिलाधिकारी ने छह माह से कम आयु के शिशुओं के पोषण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि “छह माह-सात बार” रणनीति के तहत सभी शिशुओं का निर्धारित समय पर वजन मापा जाए। साथ ही उनकी वृद्धि और पोषण स्थिति का विवरण एमसीपी (मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन) कार्ड पर दर्ज किया जाए।

इसके अलावा जन्म के समय कम वजन वाले नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि समय रहते आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

वीएचएसएनडी पर होगी स्वास्थ्य जांच

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी गंभीर कुपोषित बच्चों को ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND) के दौरान स्वास्थ्य जांच के लिए अनिवार्य रूप से लाया जाए।

साथ ही सभी पात्र बच्चों का ई-कवच पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहे और निगरानी आसान हो सके।

गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा विशेष लाभ

जिलाधिकारी ने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी पात्र महिलाओं का पोषण ट्रैकर पर समयबद्ध पंजीकरण कराया जाए। गर्भावस्था के दौरान उनके वजन में होने वाली वृद्धि की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यक पोषण संबंधी परामर्श भी उपलब्ध कराया जाए।

इसके साथ ही पात्र महिलाओं को समय पर टेक होम राशन (THR) उपलब्ध कराया जाए, ताकि गर्भावस्था और प्रसव के बाद पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर भी रहेगा जोर

बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत सभी पात्र गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिससे वे गर्भावस्था के दौरान आवश्यक पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिलेगा प्रशिक्षण

अभियान को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के नियमित प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कार्यकत्रियों का उन्मुखीकरण (Orientation) कराया जाए तथा सेक्टर स्तर पर आयोजित मासिक बैठकों में अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।

इससे जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की क्षमता में वृद्धि होगी और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

पुनः वजन सप्ताह से होगा पोषण सुधार का आकलन

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अभियान के दौरान पुनः वजन सप्ताह आयोजित किया जाए। इस दौरान बच्चों का दोबारा वजन मापकर यह आकलन किया जाएगा कि अभियान के माध्यम से उनकी पोषण स्थिति में कितना सुधार हुआ है। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा।

30 सितंबर तक चलेगा ‘संभव अभियान 6.0’

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि संभव अभियान 6.0 का संचालन 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। इस वर्ष अभियान की थीम “गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा” निर्धारित की गई है।

अभियान के अंतर्गत निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—

  • गर्भवती महिलाओं का पोषण
  • धात्री माताओं का स्वास्थ्य
  • नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी
  • छह माह से कम आयु के शिशुओं की पोषण स्थिति
  • गंभीर एवं मध्यम कुपोषण की रोकथाम
  • समय पर उपचार और फॉलोअप
  • पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना

कई विभागों के अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, परियोजना निदेशक आलोक कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) प्रीति सिन्हा, जिला विकास अधिकारी आत्मप्रकाश रस्तोगी, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अभियान को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का भरोसा दिया।

कानपुर में आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ बनाने और ‘संभव अभियान 6.0’ के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में प्रशासन की यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हैं और जमीनी स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो गंभीर एवं मध्यम कुपोषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

जिम्मेदारों का मानना है कि गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक निरंतर पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार ही स्वस्थ समाज की मजबूत नींव रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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