मोती झील में लगा तिरंगा मेला, विधायक और DM ने किया उद्घाटन; खरीदारी कर सेनानियों को दें श्रद्धांजलि

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी 

कानपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कानपुर के मोती झील मैदान में चार दिवसीय तिरंगा मेले का शुभारंभ बुधवार को किया गया। मेले का आयोजन 12 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक किया जा रहा है। मेले का उद्घाटन विधायक श्री सलिल विश्नोई और जिलाधिकारी कानपुर नगर श्री जितेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान बड़ी संख्या में उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि, खादी ग्रामोद्योग से जुड़े लोग और शहरवासी मौजूद रहे।

तिरंगा मेले का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और देश के लिए अपना योगदान देने वाले वीरों को याद करना है। मेले में खादी, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और तिरंगे से जुड़े विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही है। इसके माध्यम से लोगों को स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया जा रहा है।

अतिथियों का सूत की माला और तिरंगी पट्टी से स्वागत

मेले के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग महासंघ के अध्यक्ष श्री सुरेश गुप्ता ने आए हुए अतिथियों का स्वागत सूत की माला और तिरंगी पट्टी पहनाकर किया। इस दौरान स्वतंत्रता दिवस के महत्व और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में आम नागरिकों की भूमिका को याद किया गया।

विधायक सलिल विश्नोई ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें याद करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों और स्वदेशी भावना को अपने जीवन में अपनाना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मोती झील मैदान में आयोजित तिरंगा मेले में आएं और अपनी जरूरत के अनुसार कोई न कोई वस्त्र या उपयोगी वस्तु खरीदकर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए लोगों को मेले में पहुंचकर स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे उत्पादों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

जिलाधिकारी ने उद्यमियों के उत्पादों की सराहना की

जिलाधिकारी कानपुर नगर श्री जितेंद्र प्रताप सिंह ने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार किए गए उत्पादों को देखा और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के मेले स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही हस्तनिर्मित एवं स्वदेशी उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

मेले में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े उद्यमियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। यहां खादी के कपड़ों से लेकर लेदर उत्पाद, घर सजाने की सामग्री और हाथ से तैयार किए गए तकिया-कवर समेत कई प्रकार की वस्तुएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा खाद्य पदार्थों और मिठाइयों के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

कानपुर गौशाला सोसाइटी के स्टॉल पर दिखे गोबर से बने उत्पाद

तिरंगा मेले में कानपुर गौशाला सोसाइटी ने भी अपना स्टॉल लगाया है। इस स्टॉल पर गोबर और गौ-आधारित सामग्री से तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इनमें कामधेनु धनवटी, उबटन, नहाने की टिकिया, मधुमेह चूर्ण, निखार क्रीम सहित कई उत्पाद शामिल हैं।

स्टॉल पर लगाए गए उत्पादों को अतिथियों ने देखा और संस्था के प्रयासों की सराहना की। संस्था के उपाध्यक्ष श्री सुरेश गुप्ता ने विशेष रूप से काला तेल का उल्लेख किया। उन्होंने इसके उपयोगिता संबंधी अपने अनुभव और राय साझा करते हुए कहा कि यह तेल उपयोगी है और गांठों में दर्द होने पर लगाने से राहत महसूस होने का दावा किया जाता है। हालांकि, ऐसे उत्पादों के स्वास्थ्य संबंधी लाभों को लेकर किसी भी चिकित्सकीय दावे को विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी बने आकर्षण

मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों की ओर से तैयार किए गए उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं। काव्या सिद्ध स्वयं सहायता समूह और मां गायत्री स्वयं सहायता समूह समेत विभिन्न समूहों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। इन स्टॉलों पर हाथ से तैयार की गई वस्तुओं और घरेलू उपयोग के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग से जुड़ी इकाइयों ने भी अपने उत्पाद मेले में लगाए हैं। खादी के कपड़े, लेदर से बने उत्पाद, घर सजाने की सामग्री और हाथ से बने तकिया-कवर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

मिठाइयों और खाद्य उत्पादों के स्टॉल भी मौजूद

तिरंगा मेले में खाद्य उत्पादों की भी अच्छी विविधता देखने को मिल रही है। यहां मिल्क के लड्डू और शुगर फ्री मिठाइयों के स्टॉल लगाए गए हैं। अलग-अलग उत्पादों को लेकर लोगों में उत्सुकता देखने को मिली। मेले में आने वाले लोग अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं।

आयोजकों के अनुसार मेले का उद्देश्य केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से लोगों को देश की आजादी के इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और स्वदेशी उत्पादों की उपयोगिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यही वजह है कि मेले में तिरंगे से संबंधित विभिन्न सामग्री और देशभक्ति की भावना से जुड़े उत्पादों को भी प्रमुखता दी गई है।

15 अगस्त तक रोजाना लगेगा तिरंगा मेला

मोती झील मैदान में आयोजित यह तिरंगा मेला 15 अगस्त तक प्रतिदिन जारी रहेगा। यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन भी शहरवासी यहां पहुंचकर विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर सकते हैं और स्थानीय उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित यह मेला शहरवासियों के लिए देशभक्ति, स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्यमिता को एक साथ देखने का अवसर उपलब्ध करा रहा है। वहीं, स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के लिए यह अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का मंच भी बन रहा है।

कुल मिलाकर, मोती झील का तिरंगा मेला स्वतंत्रता दिवस की भावना को स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आया है। विधायक सलिल विश्नोई और जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की मौजूदगी में शुरू हुए इस आयोजन से लोगों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करने के साथ-साथ स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया है। 15 अगस्त तक चलने वाले इस मेले में शहरवासियों के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पाद उपलब्ध रहेंगे।