6 दिसंबर की कारसेवा को लेकर धर्म रक्षा संघ की बैठक, जयभगवान गोयल ने किया समर्थन का ऐलान
रिपोर्ट-योगेश भारतद्वाज
मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से जुड़े धार्मिक और सामाजिक मुद्दे को लेकर धर्म रक्षा संघ के तत्वावधान में भागवत मंदिरम में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आचार्य बद्रीश महाराज ने की। इसमें यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जयभगवान गोयल मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से पहुंचे। बैठक में आगामी 6 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित कारसेवा को लेकर रणनीति और तैयारियों पर चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि यदि आने वाले महीनों में संबंधित पक्षों के बीच कोई शांतिपूर्ण समाधान नहीं निकलता है तो संगठन इस अभियान को आगे बढ़ाएगा।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से जुड़े विवाद
बैठक के दौरान वक्ताओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से जुड़े विवाद, धार्मिक भावनाओं और लंबे समय से चले आ रहे न्यायिक एवं सामाजिक विमर्श का उल्लेख किया। हालांकि, बैठक में व्यक्त किए गए कई दावे संबंधित संगठनों और वक्ताओं के विचार हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के रूप में नहीं माना जा सकता।
वहीं, प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और कानून-व्यवस्था की भूमिका भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहने वाली है।
6 दिसंबर की कारसेवा को लेकर संगठन की तैयारी
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार, न्यायालय और मुस्लिम समाज के पास अगले चार महीनों का समय है। उनके अनुसार, यदि इस अवधि में शांतिपूर्ण तरीके से कोई निर्णय नहीं निकलता है तो 6 दिसंबर को संगठन से जुड़े लोग कारसेवा के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए संगठन के कार्यकर्ताओं से तैयार रहने का आह्वान किया।
सौरभ गौड़ ने कहा कि संगठन का उद्देश्य अपने धार्मिक मुद्दे को प्रमुखता से उठाना है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगामी कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों और संतों ने भी इस अभियान को लेकर अपने विचार रखे।
जयभगवान गोयल ने जताया समर्थन
यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जयभगवान गोयल ने प्रस्तावित कारसेवा के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि 6 दिसंबर को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इसमें शामिल होंगे। उन्होंने वर्ष 1992 में अयोध्या में हुई घटना का भी उल्लेख किया और उस समय की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।
गोयल ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को लेकर हिंदू समाज में लंबे समय से भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक संगठन इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को संगठित करेगा।
हालांकि, किसी भी प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी और आयोजकों से भी शांतिपूर्ण एवं कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की अपेक्षा रहती है।
संतों ने कहा- अब और इंतजार नहीं
धर्म रक्षा संघ के कार्यकारी अध्यक्ष महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज और महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज ने भी बैठक को संबोधित किया। दोनों संतों ने राम जन्मभूमि आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि हिंदू समाज ने राम जन्मभूमि के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा की थी, लेकिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विषय में अब अधिक इंतजार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से 6 दिसंबर 2026 को व्यापक स्तर पर कारसेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। बैठक में इस कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करने तथा अभियान को विभिन्न स्तरों तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने इस दौरान धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए संवाद और न्यायिक प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण बताया। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कानून का पालन और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
1968 के समझौते को लेकर भी उठे सवाल
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य बद्रीश महाराज और स्वामी अतुल कृष्ण दास महाराज ने बैठक में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से संबंधित 1968 के समझौते का उल्लेख किया। उन्होंने इस समझौते को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से आपत्ति जताई और इसे हिंदू समाज के हितों के विरुद्ध बताया।
वक्ताओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद के ऐतिहासिक और धार्मिक पहलुओं पर अपनी बात रखी। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे और दृष्टिकोण हैं। ऐसे में विवाद से जुड़े तथ्यों और कानूनी स्थिति को न्यायालय के रिकॉर्ड एवं आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही समझा जाना अधिक उपयुक्त होगा।
बैठक में कई प्रमुख संत-पदाधिकारी मौजूद रहे
बैठक में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी और संत मौजूद रहे। इनमें हनुमान टेकरी के महंत दशरथ दास महाराज, श्रीदास प्रजापति, घनश्याम, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद सरस्वती, महंत देवानंद वनमहाराज, ध्रुव शर्मा, आशीष शर्मा, आयुष शुक्ला, परमेश्वर चौबे, तुलसी दास, प्रियांशु व्यास, प्रियांश और अथर्व खद्दर सहित अन्य लोग शामिल रहे।
बैठक में उपस्थित लोगों ने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर संगठनात्मक स्तर पर तैयारी करने और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने पर विचार किया। इसके साथ ही धार्मिक मुद्दे को लेकर समाज के बीच जागरूकता बढ़ाने की बात भी कही गई।
कानून-व्यवस्था पर रहेगी प्रशासन की नजर
6 दिसंबर की प्रस्तावित कारसेवा को लेकर आने वाले समय में प्रशासन की भूमिका अहम रहने की संभावना है। मथुरा एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन केंद्र है, जहां विभिन्न अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक विवादों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार के तनाव से बचने के लिए संवाद, न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान महत्वपूर्ण है। इसलिए 6 दिसंबर को लेकर संगठन की तैयारियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर भी नजर रहेगी।
शांतिपूर्ण समाधान की मांग भी महत्वपूर्ण
बैठक में भले ही वक्ताओं ने कारसेवा को लेकर कड़े तेवर दिखाए हों, लेकिन ऐसे संवेदनशील विषयों का स्थायी समाधान शांतिपूर्ण और कानूनी माध्यम से ही संभव माना जाता है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा विषय लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और कानूनी चर्चा का हिस्सा रहा है। इसलिए आगे की किसी भी गतिविधि में न्यायालय की प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्देशों का पालन महत्वपूर्ण होगा।
संगठन को समर्थन देने की बात कही
कुल मिलाकर, भागवत मंदिरम में हुई इस बैठक के माध्यम से धर्म रक्षा संघ ने 6 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित कारसेवा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। जयभगवान गोयल ने भी संगठन को समर्थन देने की बात कही है।
अब आने वाले महीनों में इस मुद्दे को लेकर होने वाली राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष संवाद और कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात रखते हैं और किसी भी परिस्थिति में सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।

