प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला, राम मंदिर चढ़ावा मामले और छात्र प्रदर्शन पर संसद में जवाब मांगा

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद में जारी गतिरोध और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले पर संसद में पूछे जा रहे सवालों का जवाब देने से बच रही है। प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार इस विषय को राज्य का मामला बताकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है।

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद वह स्थान है, जहां सरकार को जनता से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए और जरूरी मामलों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उनके मुताबिक, संसद में सवालों के जवाब नहीं मिलना लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिहाज से चिंता का विषय है।

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा मामला पहले भी राजनीतिक बहस का विषय रहा है। जून 2026 में प्रियंका गांधी ने इस मामले की पारदर्शी जांच की मांग करते हुए मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा और जिम्मेदारी से जुड़े सवाल उठाए थे। बाद में विश्व हिंदू परिषद ने उनके समेत कई विपक्षी नेताओं के सार्वजनिक दावों की जांच की मांग भी की थी।

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सरकार से जवाब की मांग

प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर को लेकर राजनीतिक लाभ लेने में कोई हिचक नहीं दिखाई थी। ऐसे में अब मंदिर से जुड़े किसी विवाद या कथित अनियमितता के सवाल पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच चर्चा है और विपक्ष उस पर सरकार से सवाल पूछ रहा है, तो संसद में उसका जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि संसद में चर्चा और सवाल-जवाब लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

हालांकि, राम मंदिर चढ़ावा मामले में लगाए गए आरोपों को अभी अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इस मामले में जांच और आरोपों से जुड़ी अलग-अलग प्रक्रियाएं चल रही हैं। इसलिए किसी भी दावे की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

संसद में गतिरोध को लेकर भी सरकार पर हमला

मानसून सत्र समाप्त होने के करीब होने के बावजूद संसद में जारी गतिरोध को लेकर पूछे गए सवाल पर भी प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को उस तरह महसूस नहीं कर रही है, जैसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपेक्षा की जाती है।

प्रियंका गांधी के अनुसार, संसद ही वह मंच है जहां सरकार को जनता और विपक्ष के सवालों का जवाब देना होता है। यदि संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाती या सरकार अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करती, तो इससे जनता के बीच भी सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों को संसद में उठाना चाहता है, उन पर सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसद में बहस और जवाबदेही लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रिया है।

छात्र प्रदर्शनों का मुद्दा भी उठाया

प्रियंका गांधी ने बातचीत के दौरान छात्र प्रदर्शनों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार को स्पष्ट बयान देना चाहिए और यह बताना चाहिए कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई।

यह मुद्दा जुलाई 2026 के संसद सत्र में भी विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव का कारण बना था। प्रियंका गांधी ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन और बिहार में एके-47 के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए थे। हालांकि, बिहार की घटना को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में भी इसे पुलिसकर्मी द्वारा कथित इस्तेमाल के रूप में बताया गया और संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए थे।

बिहार की घटना का भी किया जिक्र

प्रियंका गांधी ने बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान एके-47 के कथित इस्तेमाल का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस तरह के हथियार की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने पूछा कि इस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और सरकार इस संबंध में जवाब क्यों नहीं देना चाहती।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जुलाई में बिहार के सीवान जिले में एक पुलिसकर्मी के प्रदर्शन के दौरान एके-47 के इस्तेमाल का वीडियो सामने आया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर जांच शुरू की गई थी।

इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने संसद में सरकार को घेरने की कोशिश की थी। प्रियंका गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि छात्र किसी भी स्थिति में आतंकवादी नहीं हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।

‘सरकार को जवाब देना चाहिए’

प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि देश में किसी घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता को स्थिति स्पष्ट करे। उन्होंने कहा कि संसद में सरकार का पक्ष सामने आना चाहिए और यह बताया जाना चाहिए कि किसी कार्रवाई का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई, जब संसद के मानसून सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार मतभेद देखने को मिले। छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।

वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज में सहयोग न करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इस तरह संसद का मौजूदा सत्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ कई नीतिगत मुद्दों पर बहस का केंद्र बना हुआ है।

राम मंदिर मुद्दे पर पहले भी सवाल उठा चुकी हैं प्रियंका

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा मुद्दा प्रियंका गांधी के लिए नया नहीं है। इससे पहले जून 2026 में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले पर पारदर्शी जांच की मांग की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि बड़ी राशि से जुड़ी कोई अनियमितता हुई है तो केवल छोटे कर्मचारियों की भूमिका पर ध्यान देने के बजाय पूरे सिस्टम की जांच होनी चाहिए।

इसके बाद विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या पुलिस को पत्र लिखकर प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के दावों की जांच कराने की मांग की थी। वीएचपी ने कहा था कि जिन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए हैं, उनसे उनके दावों के आधार और उपलब्ध दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली जानी चाहिए।

इससे स्पष्ट है कि राम मंदिर चढ़ावा मामला अब केवल प्रशासनिक या जांच से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन चुका है।

संसद में जवाबदेही पर जोर

प्रियंका गांधी के बयान का मुख्य केंद्र सरकार की जवाबदेही रहा। उन्होंने कहा कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे जाते हैं और सरकार से जवाब की अपेक्षा की जाती है। उनके मुताबिक, यदि सरकार महत्वपूर्ण सवालों पर जवाब देने से बचती है तो इससे संसद की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

दरअसल, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर चर्चा तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद होना संसदीय राजनीति का हिस्सा है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच संवाद और चर्चा के जरिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट होना जरूरी माना जाता है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस

प्रियंका गांधी के बयान के बाद राम मंदिर चढ़ावा मामले और छात्र प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस जहां सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं भाजपा और उससे जुड़े संगठन पहले ही विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठा चुके हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और संसद में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई विस्तृत जवाब आता है या नहीं। इसी तरह छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई से जुड़े सवालों पर भी राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर, प्रियंका गांधी ने संसद भवन परिसर में बातचीत के दौरान राम मंदिर चढ़ावा मामले, संसद में जारी गतिरोध और छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सवालों को एक साथ उठाते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि संसद जनता के सवालों का जवाब देने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और सरकार को वहां अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। दूसरी ओर, राम मंदिर चढ़ावा मामले से जुड़े आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ आधिकारिक जांच के निष्कर्षों पर भी नजर रहेगी।

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