RTE एडमिशन को लेकर कानपुर के चिंटेल्स स्कूल पर सवाल, दाखिले के लिए भटक रहे अभिभावक

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रिपोर्ट – मुकेश वर्मा 

कानपुर: शिक्षा का अधिकार यानी RTE (Right to Education) कानून के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की सरकारी व्यवस्था को लेकर कानपुर में सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला रतनलाल नगर स्थित चिंटेल्स स्कूल से सामने आया है, जहां RTE प्रक्रिया के तहत चयनित बच्चों के दाखिले को लेकर अभिभावक परेशान होने का दावा कर रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि लॉटरी प्रक्रिया में बच्चों का चयन होने और सूची स्कूल को भेजे जाने के बावजूद उन्हें दाखिला नहीं दिया जा रहा है।

अभिभावकों के अनुसार, वे अपने बच्चों के सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। कभी सीट उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है तो कभी संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में परिवारों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि सरकारी प्रक्रिया के तहत चयन होने के बाद भी उनके बच्चों का दाखिला आखिर कब सुनिश्चित होगा।

लॉटरी के जरिए हुआ बच्चों का चयन

RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बच्चों के चयन के लिए लॉटरी कराई गई। अभिभावकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनके बच्चों का चयन हुआ और इसके बाद चयनित बच्चों की सूची संबंधित स्कूल को भी उपलब्ध करा दी गई।

चयन की जानकारी मिलने के बाद परिवारों ने बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए स्कूल का रुख किया। हालांकि, अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की ओर से दाखिले को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।

परिवारों का कहना है कि उन्होंने बच्चों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार रखे हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्कूल में जमा कराने के लिए भी तैयार हैं। इसके बावजूद उन्हें बार-बार स्कूल आने के लिए कहा जा रहा है या अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

अभिभावकों का आरोप, रोज स्कूल के चक्कर लगाने को मजबूर

RTE के तहत चयनित बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों के दाखिले के लिए लगातार स्कूल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवारों के सामने समय और आर्थिक परेशानी के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

अभिभावकों के अनुसार, जब वे दाखिले के लिए स्कूल पहुंचते हैं तो उन्हें कभी सीट उपलब्ध नहीं होने की बात बताई जाती है। वहीं, कुछ मामलों में अधिकारियों से बातचीत करने की सलाह देकर वापस भेजे जाने का आरोप भी लगाया गया है।

परिवारों का कहना है कि यदि लॉटरी के माध्यम से बच्चे का चयन हो चुका है और उसकी जानकारी स्कूल को भेजी जा चुकी है, तो फिर दाखिले की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में परेशानी क्यों आ रही है, इसका स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

मामले में अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को संबंधित विभाग के सामने रखा, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है।

अभिभावकों का आरोप है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने के बावजूद दाखिले को लेकर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। इससे परिवारों में नाराजगी बढ़ रही है।

RTE योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि चयनित बच्चों के अभिभावकों को दाखिले के लिए लगातार कार्यालयों और स्कूलों के बीच जाना पड़े, तो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

अभिभावकों ने सुनाई अपनी परेशानी

पीड़ित अभिभावकों का कहना है कि सरकार की ओर से RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए आवेदन, सत्यापन और लॉटरी जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। ऐसे में चयन होने के बाद यदि दाखिले के लिए अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़े, तो पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

एक अभिभावक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि सरकार योजनाएं बनाती है, लेकिन यदि उनका क्रियान्वयन सही तरीके से न हो तो सबसे अधिक परेशानी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को होती है।

अभिभावकों का कहना है कि वे किसी विवाद के बजाय नियमों के अनुसार अपने बच्चों का दाखिला चाहते हैं। उनकी मांग है कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच करें और चयनित बच्चों के दाखिले की स्थिति स्पष्ट करें।

भीषण गर्मी में स्कूल और कार्यालय के चक्कर

अभिभावकों के अनुसार, उन्हें बच्चों के दस्तावेज लेकर स्कूल से लेकर शिक्षा विभाग के कार्यालय तक जाना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में बार-बार आवाजाही के कारण परिवारों को परेशानी हो रही है।

इन परिवारों का कहना है कि उनके लिए निजी स्कूल की फीस वहन करना आसान नहीं है। इसी वजह से उन्होंने RTE के तहत आवेदन किया था। लॉटरी में चयन के बाद उन्हें उम्मीद थी कि बच्चों का दाखिला निशुल्क शिक्षा व्यवस्था के तहत हो जाएगा।

लेकिन अब दाखिले में कथित देरी के कारण उनकी चिंता बढ़ गई है। अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट की जाए।

RTE योजना का उद्देश्य क्या है?

शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसके तहत निर्धारित पात्रता वाले बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश का अवसर उपलब्ध कराया जाता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चे भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण में पढ़ाई कर सकें। इसके लिए चयन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है।

ऐसे में चयनित बच्चे और उनके परिवार दाखिले को लेकर संबंधित स्कूल से स्पष्ट प्रक्रिया की अपेक्षा करते हैं। यदि किसी स्तर पर दस्तावेज, सीट, पात्रता या अन्य कोई तकनीकी समस्या है, तो उसे संबंधित अभिभावक को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए, ताकि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका समाधान करा सके।

स्कूल प्रशासन के स्पष्ट पक्ष का इंतजार

चिंटेल्स स्कूल, रतनलाल नगर को लेकर सामने आए इस मामले में फिलहाल मुख्य आरोप अभिभावकों की ओर से लगाए गए हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति का दूसरा पक्ष भी स्पष्ट होगा।

यदि स्कूल के स्तर पर कोई दस्तावेजी, प्रशासनिक या सीट से संबंधित समस्या है, तो उसकी जानकारी अभिभावकों को उपलब्ध कराना जरूरी होगा। वहीं, यदि चयनित बच्चों के दाखिले में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी हो रही है, तो शिक्षा विभाग को मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

इससे न केवल संबंधित परिवारों की समस्या का समाधान हो सकेगा, बल्कि RTE प्रक्रिया में अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

जिला प्रशासन से समाधान की मांग

दाखिले को लेकर परेशान अभिभावक अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि लॉटरी में चयनित बच्चों के दाखिले में देरी क्यों हो रही है।

अभिभावकों की मांग है कि यदि बच्चों का चयन नियमों के अनुसार हुआ है और दस्तावेज भी पात्र पाए गए हैं, तो दाखिले की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत पूरा कराया जाए।

इसके साथ ही वे चाहते हैं कि भविष्य में RTE से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए, ताकि अभिभावकों को स्कूल और विभाग के बीच बार-बार न भटकना पड़े।

प्रदर्शन की चेतावनी

अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ और RTE के तहत चयनित बच्चों का दाखिला सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने अपनी मांग रखेंगे।

उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन भी कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों का दाखिला सुनिश्चित कराना है।

अभिभावकों का कहना है कि वे चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और उन्हें लिखित या स्पष्ट रूप से बताया जाए कि दाखिले की प्रक्रिया किस चरण में है।

बच्चों की शिक्षा को लेकर परिवारों की चिंता

RTE के तहत चयनित बच्चों के परिवारों के लिए यह मामला केवल दाखिले की औपचारिकता तक सीमित नहीं है। उनके लिए बच्चे की शिक्षा और भविष्य इससे सीधे जुड़े हैं। इसलिए अभिभावक चाहते हैं कि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।

कुल मिलाकर, कानपुर के रतनलाल नगर स्थित चिंटेल्स स्कूल में RTE के तहत चयनित बच्चों के दाखिले को लेकर अभिभावकों की परेशानी सामने आई है। अभिभावकों का आरोप है कि लॉटरी में चयन और सूची जारी होने के बाद भी उन्हें दाखिले के लिए लगातार स्कूल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से मामले में प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है। अब स्कूल प्रशासन और संबंधित शिक्षा अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल अभिभावकों की मांग है कि पात्र और चयनित बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया को नियमों के अनुसार जल्द पूरा कराया जाए।

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