केसरी घटा में विराजमान हुए राजाधिराज, हजारों भक्तों ने किए ठाकुर द्वारकाधीश के दर्शन
रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज
मथुरा। कृष्ण की नगरी मथुरा में सावन मास के दौरान ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में चल रही पारंपरिक घटा और हिंडोला उत्सव की श्रृंखला भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सावन के बारहवें दिन मंगलवार को राजाधिराज ठाकुर द्वारकाधीश भगवान ने केसरी घटा में विराजमान होकर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को केसरी रंग के वस्त्रों और आकर्षक सजावट से सजाया गया। मंदिर का वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठा।
विश्व विख्यात पुष्टिमार्ग संप्रदाय के इस प्रमुख मंदिर में सावन के पूरे महीने अलग-अलग रंगों की घटाओं और विशेष साज-सज्जा के बीच ठाकुर जी को विराजमान कराया जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रतिदिन अलग स्वरूप और सजावट के दर्शन प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि सावन के दिनों में द्वारकाधीश मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और इस परंपरा का आनंद लेते हैं।
केसरी रंग से सजा मंदिर परिसर
सावन मास के बारहवें दिन ठाकुर द्वारकाधीश महाराज के लिए केसरी घटा का आयोजन किया गया। इसके लिए मंदिर के पूरे प्रांगण को केसरी रंग के कपड़ों और विभिन्न प्रकार की सजावटी सामग्री से सजाया गया। केसरी रंग की सजावट के बीच जब ठाकुर जी महाराज विराजमान हुए तो श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से दर्शन किए।
मंदिर में दर्शन के दौरान भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालु ठाकुर जी के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते नजर आए। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच भक्तों ने भगवान के जयकारे लगाए और सावन की इस विशेष परंपरा का आनंद लिया।
पुष्टिमार्गीय परंपरा में घटा का विशेष महत्व
मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि मंदिर में होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रमों का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज (कांकरोली नरेश, तृतीय पीठ) द्वारा किया जाता है। उसी परंपरा के तहत सावन मास में ठाकुर जी को विभिन्न घटाओं और हिंडोलों में विराजमान कराया जाता है।
पुष्टिमार्गीय परंपरा में ठाकुर जी को लाड़-लड़ाने की भावना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी भाव के तहत सावन के दौरान अलग-अलग घटाओं और हिंडोलों की व्यवस्था की जाती है। इन आयोजनों में मंदिर की सजावट भी उस दिन की घटा के अनुरूप की जाती है।
राकेश तिवारी के अनुसार, घटा का अर्थ ठाकुर जी को बाहर के मौसम की अनुभूति करवाना है। इसलिए सावन के दौरान मौसम और ऋतु की भावना को ध्यान में रखते हुए मंदिर को अलग-अलग रंगों और सजावटी स्वरूपों से सजाया जाता है। इससे श्रद्धालुओं को भगवान के साथ प्रकृति और ऋतु के भाव का भी अनुभव होता है।
सावन में हर दिन अलग रंग और अलग सजावट
द्वारकाधीश मंदिर में सावन मास के दौरान घटाओं का यह क्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। प्रत्येक दिन मंदिर की सजावट और ठाकुर जी के विराजमान होने का स्वरूप अलग होता है। इसके चलते श्रद्धालुओं में अगले दिन की घटा और भगवान के दर्शन को लेकर भी उत्सुकता बनी रहती है।
विशेष रूप से मथुरा-वृंदावन आने वाले श्रद्धालु सावन के दौरान द्वारकाधीश मंदिर में होने वाले इन आयोजनों में शामिल होने का प्रयास करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही विदेशों से आने वाले भक्त भी मंदिर की इस परंपरा से जुड़ते हैं।
इस दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भगवान के दर्शन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं होते, बल्कि यह ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जुड़ने का अवसर भी होता है। इसलिए सावन में द्वारकाधीश मंदिर की घटाओं का विशेष महत्व माना जाता है।
कल स्वर्ण-रजत हिंडोले में होंगे ठाकुर जी के दर्शन
केसरी घटा के बाद अब श्रद्धालुओं को अगले दिन ठाकुर द्वारकाधीश महाराज के स्वर्ण एवं रजत हिंडोले में विराजमान होने के दर्शन प्राप्त होंगे। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि कल शाम 5:10 बजे से 5:40 बजे तक ठाकुर जी महाराज स्वर्ण एवं रजत हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
इस विशेष आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। सावन में हिंडोला उत्सव पुष्टिमार्गीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्त भगवान को हिंडोले में विराजमान देखकर उनके बाल स्वरूप और वात्सल्य भाव का अनुभव करते हैं।
सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ी है मथुरा की धार्मिक पहचान
मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में देश-दुनिया में विशेष धार्मिक पहचान प्राप्त है। यहां वर्षभर अलग-अलग धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन सावन मास में होने वाले घटा और हिंडोला उत्सव की अपनी अलग विशेषता है।
द्वारकाधीश मंदिर की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। समय के साथ मंदिर की सजावट और व्यवस्थाओं में बदलाव जरूर आया है, लेकिन ठाकुर जी को विभिन्न घटाओं और हिंडोलों में विराजमान कराने की धार्मिक परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ जारी है।
वर्तमान समय में जब मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सावन के ये आयोजन ब्रज की धार्मिक संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्रद्धालु इन आयोजनों में शामिल होकर न केवल ठाकुर जी के दर्शन करते हैं, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से अनुभव करते हैं।
भक्तिमय वातावरण में जारी रहेगा आयोजन
सावन मास के शेष दिनों में भी ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में विभिन्न घटाओं और हिंडोलों के आयोजन जारी रहेंगे। प्रत्येक दिन अलग रंग, सजावट और धार्मिक स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भी मंदिर में भक्तों की भीड़ और धार्मिक उत्साह देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर, केसरी घटा के अवसर पर ठाकुर द्वारकाधीश महाराज के दर्शन ने मथुरा के धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। केसरी रंग से सजे मंदिर परिसर में राजाधिराज के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। वहीं, अब अगले दिन स्वर्ण एवं रजत हिंडोले में होने वाले दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्सुकता बनी हुई है।
मुख्य तथ्य:
- अवसर: सावन मास की केसरी घटा
- स्थान: ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा
- आयोजन: ठाकुर जी का केसरी घटा में विराजमान होना
- अगला आयोजन: स्वर्ण एवं रजत हिंडोला
- दर्शन का समय: शाम 5:10 बजे से 5:40 बजे तक
- परंपरा: पुष्टिमार्गीय घटा एवं हिंडोला उत्सव
- विशेषता: सावन में प्रतिदिन अलग-अलग रंगों और सजावट में ठाकुर जी के दर्शन

