जूही में वाटर लाइन से आ रहा दूषित पानी, पार्षद ने गड्ढे में उतरकर किया प्रदर्शन

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी 

कानपुर। जूही क्षेत्र में लंबे समय से दूषित पेयजल की समस्या से परेशान स्थानीय लोगों का सोमवार को गुस्सा फूट पड़ा। वार्ड 14 की पार्षद शालू सुनील कनौजिया ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर जूही बारा देवी चौराहे पर अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। पार्षद और स्थानीय लोग गंदे व काले पानी की समस्या को लेकर सड़क किनारे बने गड्ढे में उतर गए और जल निगम तथा नगर निगम के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से जल्द से जल्द समस्या का समाधान कराने की मांग की।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पिछले करीब एक वर्ष से वाटर लाइन के जरिए साफ पानी की जगह गंदा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इसके चलते लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूषित पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वहीं, पेयजल के लिए कई परिवारों को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है।

करीब 15 इलाकों में दूषित पानी की शिकायत

पार्षद शालू सुनील कनौजिया के मुताबिक, जूही क्षेत्र के करीब 15 इलाकों में लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 10 हजार लोगों की आबादी रहती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पानी कभी-कभी इतना गंदा होता है कि उसका रंग काला दिखाई देता है और उसमें दुर्गंध भी आती है।

प्रभावित क्षेत्रों में संत रविदास नगर, बाथम का अड्डा, राखी मंडी, विनोबा नगर, बारा देवी और लक्ष्मणपुरवा समेत आसपास के कई मोहल्ले बताए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, समस्या किसी एक-दो घर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई गलियों और बस्तियों में वाटर लाइन से दूषित पानी पहुंच रहा है।

पार्षद ने कहा कि समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई। इसके बावजूद अब तक ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों को स्थायी राहत मिल सके। उन्होंने मांग की कि पानी की पाइपलाइन की तकनीकी जांच कराई जाए और जहां भी सीवर लाइन या क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण पानी दूषित होने की आशंका है, वहां तत्काल मरम्मत की जाए।

प्रदर्शन में बोतलों में भरकर लाया गया गंदा पानी

सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान स्थानीय महिलाओं और अन्य लोगों ने बोतलों में भरा दूषित पानी भी दिखाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि घरों में नल खोलने पर कई बार साफ पानी की जगह गंदा पानी आता है। लोगों के मुताबिक, पानी में दुर्गंध होने के कारण उसका इस्तेमाल करने में भी परेशानी होती है।

स्थानीय निवासियों ने कहा कि पीने के पानी की समस्या का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, पानी की गुणवत्ता और उससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा पानी के नमूनों की जांच कराया जाना जरूरी है।

यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित इलाकों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाए। साथ ही, पाइपलाइन और सीवर नेटवर्क की भी संयुक्त रूप से जांच की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर वाटर लाइन में दूषित पानी पहुंचने की वजह क्या है।

पार्षद ने जल निगम और नगर निगम पर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान पार्षद शालू सुनील कनौजिया ने जल निगम और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो संबंधित विभागों को इसका स्थायी समाधान तलाशना चाहिए।

पार्षद का कहना है कि लोगों की शिकायतों को केवल अस्थायी स्तर पर सुनने के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचना जरूरी है। यदि वाटर लाइन क्षतिग्रस्त है या कहीं सीवर का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल रहा है तो उसकी पहचान कर तत्काल सुधार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। इसलिए प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

जल निगम कार्यालय के घेराव की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्षद ने कहा कि समस्या का समाधान नहीं होने की स्थिति में क्षेत्रवासी जल निगम कार्यालय का घेराव कर सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने भी कहा कि वे लंबे समय से समस्या का सामना कर रहे हैं और अब उन्हें ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उनका कहना है कि केवल शिकायत दर्ज करने या अधिकारियों के निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की पहचान, मरम्मत और जरूरत पड़ने पर पाइपलाइन बदलने की कार्रवाई करनी होगी।

पाइपलाइन की जांच और स्थायी समाधान की मांग

जूही क्षेत्र के लोगों की मुख्य मांग है कि जलापूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच कराई जाए। विशेष रूप से उन स्थानों की जांच की जाए जहां वाटर लाइन और सीवर लाइन आसपास से गुजर रही हैं। यदि कहीं पाइपलाइन में लीकेज या टूट-फूट है तो उसे तत्काल ठीक कराया जाए।

इसके अलावा, प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से पानी के नमूनों की जांच कराने और लोगों को जांच की रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी सामने आई है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पानी में किस प्रकार की समस्या है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाने की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल उनकी बुनियादी जरूरत है। इसलिए इस समस्या को केवल स्थानीय शिकायत मानकर टालने के बजाय संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

शिकायतों के बाद अब समाधान का इंतजार

जूही क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या को लेकर सोमवार का प्रदर्शन यह बताता है कि स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। करीब एक वर्ष से समस्या बने रहने के दावे के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है।

फिलहाल स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि प्रभावित मोहल्लों में जलापूर्ति व्यवस्था की तत्काल जांच कराई जाए और दूषित पानी आने के कारणों का पता लगाया जाए। साथ ही, आवश्यकतानुसार पाइपलाइन की मरम्मत या उसे बदलने का काम कराया जाए।

यदि अधिकारियों की ओर से जल्द प्रभावी कदम उठाए जाते हैं तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। वहीं, समस्या बनी रहने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर आंदोलन आगे बढ़ने की चेतावनी दी गई है। अब देखना होगा कि जल निगम और नगर निगम इस शिकायत पर किस तरह की कार्रवाई करते हैं और जूही के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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