मायावती का युवाओं से आह्वान: आंदोलन करें, लेकिन राजनीतिक दलों के हाथों का मोहरा न बनें
Digital UP News Desk
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने देश में चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों और Gen Z से जुड़ी समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा, रोजगार, भर्ती, पेपर लीक और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज जरूर उठाएं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल के हाथों का मोहरा न बनें। मायावती ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही छात्र-युवाओं की वास्तविक समस्याओं की आड़ में अपने राजनीतिक हित साधने में लगे हुए हैं।
मायावती ने कहा कि देश का युवा वर्ग इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की चिंता, सरकारी भर्तियों में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर युवाओं में असंतोष है। ऐसे माहौल में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता दें और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग करें।
संसद में हंगामे पर मायावती का सवाल
बसपा प्रमुख ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से भाजपा, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर संसद में हंगामा और विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। इसके कारण जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
मायावती ने आशंका जताई कि केंद्र और राज्यों में अपनी-अपनी सरकारों की कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच किसी तरह का अंदरूनी समझौता भी हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इस संदर्भ में राजनीतिक दलों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर रखा जाना चाहिए।
उनके मुताबिक, संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। इसलिए वहां जनता की समस्याओं, बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। केवल हंगामे और राजनीतिक बयानबाजी से आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता।
Gen Z की समस्याओं पर बोलीं मायावती
मायावती ने विशेष रूप से Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी की समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने करियर और भविष्य को लेकर काफी चिंतित है। बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद रोजगार की तलाश में हैं। वहीं सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं को भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा व्यवस्था और परिणामों को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती से जुड़ी समस्याएं केवल किसी एक परीक्षा या राज्य तक सीमित नहीं हैं। इनका सीधा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ता है, जो वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में युवाओं की आवाज को राजनीतिक मंच बनाने के बजाय उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने की जरूरत है।
मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर हुए छात्र-युवा आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने युवाओं के आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। बसपा प्रमुख ने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि किसी भी आंदोलन की सफलता का वास्तविक पैमाना उनकी समस्याओं का समाधान है, न कि किसी राजनीतिक दल को मिलने वाला लाभ।
‘बसपा हमेशा छात्रों और युवाओं के साथ’
मायावती ने कहा कि बसपा छात्र और युवा वर्ग की वास्तविक समस्याओं के साथ खड़ी रही है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने अधिकारों और मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करें। साथ ही, उन्होंने राजनीतिक दलों से भी अपील की कि वे युवाओं के आंदोलनों का इस्तेमाल अपने चुनावी या राजनीतिक हितों के लिए न करें।
उन्होंने कहा कि छात्र और युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। इसलिए उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने की जरूरत है। शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बहाल करना सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
मायावती के अनुसार, युवाओं को किसी दल विशेष के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनने के बजाय अपने मुद्दों पर केंद्रित रहना चाहिए। इससे आंदोलन की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी और सरकारों पर समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी दबाव भी बनाया जा सकेगा।
रांची के छात्र आंदोलन का भी किया जिक्र
बसपा प्रमुख ने झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां कांग्रेस और उसके सहयोगी दल छात्रों की समस्याओं को लेकर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि भाजपा और उसके समर्थक दल आंदोलन के समर्थन में आगे आते दिखाई दे रहे हैं।
मायावती ने दिल्ली और रांची के छात्र-युवा आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ही जगह युवाओं की वास्तविक समस्याओं से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को यह समझना चाहिए कि युवाओं की समस्याएं किसी पार्टी की राजनीति से बड़ी हैं।
इसके अलावा, उन्होंने सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। मायावती ने आरोप लगाया कि सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर सीमित होने और सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर किए जाने का असर आरक्षण व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के युवाओं के सामने रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं।
निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग
मायावती ने सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बसपा निजी क्षेत्र के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस प्रकार सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, उसी प्रकार निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटने और निजी क्षेत्र के विस्तार के बीच सामाजिक न्याय के सिद्धांत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
मायावती ने बड़े पूंजीपतियों की बढ़ती आर्थिक ताकत का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ बड़े कारोबारी और पूंजीपति मजबूत हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गरीब, बेरोजगार और वंचित वर्ग रोजगार तथा आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकारों को विकास के साथ सामाजिक संतुलन पर भी ध्यान देना चाहिए।
यूपी में अपनी सरकारों का किया जिक्र
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में अपनी चार सरकारों के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकारों के दौरान सर्वसमाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखा गया और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया।
मायावती ने कहा कि उनकी सरकारों में छात्रों की समस्याओं के समाधान के साथ युवाओं की ‘रोटी-रोजी’ यानी रोजगार के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने अपने शासनकाल को सामाजिक न्याय और सर्वसमाज के हितों से जोड़ते हुए कहा कि बसपा की नीतियों में कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी गई।
आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बसपा की अपील
मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए सर्वसमाज से बसपा को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम, किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी, छात्र, युवा और अन्य मेहनतकश वर्गों से पार्टी के पक्ष में एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के हितों की रक्षा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए बसपा को सत्ता में लाना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रहें और किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में आने के बजाय अपने मुद्दों पर केंद्रित रहें।
राजनीतिक फायदे के लिए नहीं करने की अपील
कुल मिलाकर, मायावती का यह बयान छात्र-युवा आंदोलनों, बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक, आरक्षण और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने जहां युवाओं को अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की सलाह दी, वहीं राजनीतिक दलों से उनके आंदोलनों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं करने की अपील की।
मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, रोजगार के पर्याप्त अवसर और सामाजिक न्याय को मजबूत करने वाली नीतियों से संभव है। ऐसे में छात्र और युवा आंदोलनों को लेकर उनका यह बयान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकता है।

