आरक्षित भूमि पर भवन निर्माण का आरोप, डीएम से जांच और कब्जामुक्त कराने की मांग
रिपोर्ट – अशोक सिंह
खागा। तहसील क्षेत्र के हिसामपुर मजरे मंड़वा गांव में आरक्षित श्रेणी की भूमि पर कथित कब्जे और भवन निर्माण का मामला सामने आया है। गांव निवासी फूल सिंह ने इस संबंध में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की स्थलीय जांच कराने, सार्वजनिक रास्ता खुलवाने और आरक्षित भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरक्षित भूमि पर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी हो रही है।
शिकायतकर्ता फूल सिंह के अनुसार, गांव में गाटा संख्या 1791 में कुल 1152 रकबा भूमि दर्ज है, जिसे आरक्षित श्रेणी की भूमि बताया गया है। उन्होंने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उनकी आराजी गाटा संख्या 1788 उक्त भूमि से सटी हुई है। उनके मुताबिक, उनके पूर्वजों ने गाटा संख्या 1788 में आवासीय निर्माण कराया था और लंबे समय से परिवार का आवागमन आसपास के रास्ते से होता रहा है।
फूल सिंह का कहना है कि आरक्षित भूमि के एक हिस्से से गांव सभा का रास्ता निकलता है। वहीं, शेष भूमि का उपयोग ग्रामीणों द्वारा खलिहान के तौर पर सार्वजनिक हित में किया जाता रहा है। ऐसे में यदि इस भूमि पर स्थायी निर्माण या कब्जा होता है तो इससे न केवल सार्वजनिक उपयोग प्रभावित होगा, बल्कि ग्रामीणों के आवागमन की समस्या भी बढ़ सकती है।
रास्ता बंद करने और दीवार खड़ी करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि गांव निवासी धनराज पुत्र राजबहादुर ने कथित तौर पर सार्वजनिक रास्ते को बंद करते हुए आरक्षित भूमि के हिस्से में दीवार खड़ी कर दी और उसके ऊपर टीन डालकर कब्जा कर लिया। फूल सिंह के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद उपजिलाधिकारी खागा के आदेश पर कथित अतिक्रमण हटाया गया था।
हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारी के स्थानांतरण के बाद दोबारा उसी स्थान पर दीवार खड़ी कर भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य जारी रहा तो आरक्षित भूमि का स्वरूप प्रभावित होने के साथ-साथ गांव के सार्वजनिक रास्ते पर भी स्थायी रूप से अवरोध उत्पन्न हो सकता है।
आवागमन प्रभावित होने का दावा
फूल सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि कथित निर्माण के कारण उनके आवागमन का रास्ता बंद हो गया है। उनका कहना है कि संबंधित स्थान से निकलने के लिए उनके पास दूसरा कोई उपयुक्त रास्ता भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कथित निर्माण का विरोध किया तो उन्हें जान-माल की धमकी दी गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस में शिकायत पर सुनवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में पुलिस स्तर पर भी सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कथित कब्जेदार का पुत्र पुलिस विभाग में कार्यरत है। इसी वजह से थाने में शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्या पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
फूल सिंह का कहना है कि उन्होंने अब जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग इसलिए की है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और भूमि की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट की जा सके। उन्होंने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने तथा यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
स्थलीय जांच और सार्वजनिक रास्ता खुलवाने की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों की टीम भेजकर मौके की स्थलीय जांच कराई जाए। साथ ही गाटा संख्या 1791 की भूमि का अभिलेखीय सत्यापन कर यह देखा जाए कि भूमि किस श्रेणी में दर्ज है और मौके पर उसका वास्तविक उपयोग किस प्रकार हो रहा है।
फूल सिंह ने मांग की है कि यदि जांच में आरक्षित भूमि पर अवैध कब्जा या अनधिकृत निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाकर भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए। इसके अलावा, गांव सभा के सार्वजनिक रास्ते को भी पूर्व स्थिति में बहाल कराने की मांग की गई है, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने कथित धमकी के आरोपों को देखते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाती है तो विवाद का समाधान नियमानुसार किया जा सकता है।
फिलहाल मामला जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत के रूप में पहुंचा है। अब प्रशासनिक जांच और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरक्षित भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण हुआ है अथवा नहीं। मामले में दूसरे पक्ष और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

