पान मसाला पैकेजिंग में प्लास्टिक पर प्रस्तावित रोक, कंपनियों को बदलना पड़ सकता है पैकिंग सिस्टम

afad694b-d449-4637-ad77-6e66bcdb15f4

Digital Up News Desk

नई दिल्ली: पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नए बदलाव का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित नियमों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली कुछ प्लास्टिक और सिंथेटिक पॉलिमर आधारित सामग्रियों के उपयोग को प्रतिबंधित करने की तैयारी है। इसके साथ ही एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल को लेकर भी नए प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। FSSAI की आधिकारिक अधिसूचना सूची के अनुसार, अप्रैल 2026 में पान मसाला के लिए पैकेजिंग सामग्री की सूची शामिल करने संबंधी ड्राफ्ट संशोधन जारी किया गया था।

प्रस्तावित बदलाव लागू होने की स्थिति में पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को अपनी पैकेजिंग सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़ सकते हैं। वर्तमान में छोटे पैकेट से लेकर बड़े पैक तक कई उत्पादों में अलग-अलग प्रकार की बहुस्तरीय पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में नए मानकों के अनुरूप पैकेजिंग तैयार करना कंपनियों के लिए तकनीकी और व्यावसायिक चुनौती भी हो सकता है।

पान मसाला पैकेजिंग को लेकर नया प्रस्ताव

FSSAI की ओर से अप्रैल 2026 में जारी ड्राफ्ट का उद्देश्य पान मसाला के लिए स्वीकार्य पैकेजिंग सामग्रियों से संबंधित प्रावधानों को Food Safety and Standards (Packaging) Regulations में शामिल करना है। आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे Draft Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026 के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।

ड्राफ्ट नियम को लेकर संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए गए थे। इसका अर्थ है कि प्रस्तावित व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित हितधारकों की राय पर विचार किया जा सकता है। इसलिए वर्तमान स्थिति में इसे अंतिम और लागू नियम के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।

हालांकि, प्रस्तावित बदलाव से यह संकेत जरूर मिलता है कि पान मसाला उत्पादों की पैकेजिंग के लिए नियामकीय स्तर पर सामग्री संबंधी मानकों को अधिक स्पष्ट किया जा रहा है।

किन पैकेजिंग सामग्रियों पर है फोकस?

प्रस्तावित व्यवस्था में पान मसाला की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर स्पष्ट सूची तैयार करने की दिशा में कदम उठाया गया है। इसमें पॉलीथिन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर और पीवीसी जैसे सिंथेटिक पॉलिमर के इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंधात्मक प्रावधानों की बात सामने आई है। इसके अलावा एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर को लेकर भी प्रस्तावित नियमों में बदलाव का उल्लेख है।

वहीं, वैकल्पिक पैकेजिंग के रूप में कागज, पेपर बोर्ड, सेलूलोज, टिन और कांच जैसी सामग्रियों का विकल्प प्रस्तावित व्यवस्था में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, किसी सामग्री के इस्तेमाल की अनुमति उसके विशिष्ट मानकों, खाद्य संपर्क सुरक्षा और अंतिम अधिसूचना में तय शर्तों पर निर्भर करेगी। इसलिए कंपनियों के लिए अंतिम नियम और तकनीकी विनिर्देश सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

कंपनियों की पैकेजिंग प्रक्रिया में हो सकता है बदलाव

यदि प्रस्तावित नियम अंतिम रूप से लागू होते हैं, तो पान मसाला कंपनियों को अपनी पैकेजिंग प्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है। इसका असर केवल पैकेट की बाहरी सामग्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पैकेजिंग डिजाइन, प्रिंटिंग, सीलिंग, उत्पादन मशीनरी और सप्लाई चेन तक दिखाई दे सकता है।

वर्तमान पैकेजिंग व्यवस्था में उत्पाद की सुरक्षा, नमी से बचाव, शेल्फ लाइफ और परिवहन के दौरान मजबूती जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए वैकल्पिक सामग्री अपनाने से कंपनियों को इन सभी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा।

इसके अलावा, नई सामग्री के अनुरूप पैकेजिंग मशीनों में बदलाव या नए उपकरणों की आवश्यकता भी हो सकती है। छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए यह बदलाव अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कागज और अन्य विकल्पों की भूमिका बढ़ सकती है

प्रस्तावित बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्रियों की ओर बढ़ना है। कागज और पेपर बोर्ड जैसी सामग्री पहले से ही कई खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होती है। हालांकि, पान मसाला जैसे उत्पादों के लिए पैकेजिंग को नमी, हवा और बाहरी प्रभावों से बचाने की जरूरत होती है।

ऐसे में केवल सामग्री बदलना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को ऐसी पैकेजिंग विकसित करनी होगी जो नियामकीय मानकों के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को भी पूरा करे।

सेलूलोज, टिन और कांच जैसे विकल्प भी अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। हालांकि, इन सामग्रियों की लागत, वजन, परिवहन और उत्पादन प्रक्रिया प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग से अलग हो सकती है।

पर्यावरणीय पहलू भी महत्वपूर्ण

पैकेजिंग में प्लास्टिक और सिंथेटिक पॉलिमर के इस्तेमाल को लेकर दुनियाभर में पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ी हैं। इसी संदर्भ में खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग में वैकल्पिक सामग्रियों को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है।

हालांकि, किसी भी नई पैकेजिंग व्यवस्था का मूल्यांकन केवल सामग्री के आधार पर नहीं किया जा सकता। उसके उत्पादन, परिवहन, उपयोग और निपटान के पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

इसलिए यदि पान मसाला पैकेजिंग के लिए नए मानक लागू किए जाते हैं, तो कंपनियों के सामने ऐसी सामग्री चुनने की चुनौती होगी जो खाद्य सुरक्षा, उत्पाद संरक्षण और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ व्यावहारिक भी हो।

अंतिम नियम आने के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

FSSAI की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पान मसाला पैकेजिंग से संबंधित संशोधन अप्रैल 2026 में ड्राफ्ट के रूप में प्रकाशित किया गया था। इसमें संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।

इसलिए फिलहाल पान मसाला कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रस्तावित व्यवस्था और अंतिम अधिसूचित नियम में अंतर हो सकता है। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी पैकेजिंग सामग्री किस शर्त के साथ स्वीकार्य होगी और कंपनियों को अनुपालन के लिए कितना समय दिया जाएगा।

FSSAI अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और संशोधनों को प्रकाशित करता है। प्राधिकरण यह भी स्पष्ट करता है कि उसकी संकलित नियम पुस्तिका संदर्भ के लिए है और कानूनी स्थिति के लिए मूल राजपत्र अधिसूचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उद्योग पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव

पान मसाला उद्योग के लिए पैकेजिंग में बदलाव एक बड़ा परिचालन परिवर्तन हो सकता है। कंपनियों को नई सामग्री की खरीद, पैकेजिंग डिजाइन, मशीनरी और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव के साथ-साथ उत्पाद की कीमत और सप्लाई चेन पर भी विचार करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, पैकेजिंग सामग्री उपलब्ध कराने वाले सप्लायर्स पर भी इसका असर पड़ सकता है। यदि अंतिम नियमों में मौजूदा सामग्री के स्थान पर वैकल्पिक विकल्पों को प्राथमिकता दी जाती है, तो पैकेजिंग उद्योग को नई सामग्री और तकनीक में निवेश करना पड़ सकता है।

वहीं, उपभोक्ताओं के लिए पैकेजिंग का स्वरूप बदल सकता है। हालांकि, उत्पाद की उपलब्धता और कीमत पर इसका वास्तविक प्रभाव अंतिम नियम, अनुपालन की समयसीमा और कंपनियों की रणनीति पर निर्भर करेगा।

ड्राफ्ट नियम पर नजर

कुल मिलाकर, पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर FSSAI का प्रस्ताव खाद्य पैकेजिंग के नियामकीय ढांचे में संभावित बदलाव की ओर संकेत करता है। प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ सिंथेटिक पॉलिमर और मेटलाइज्ड पैकेजिंग सामग्रियों को लेकर प्रतिबंधात्मक प्रावधानों तथा वैकल्पिक सामग्रियों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।

हालांकि, अभी इसे अंतिम लागू नियम के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। FSSAI के आधिकारिक रिकॉर्ड में यह अप्रैल 2026 का ड्राफ्ट संशोधन है।

आगे अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पान मसाला कंपनियों को किस प्रकार की पैकेजिंग अपनानी होगी, बदलाव के लिए कितना समय मिलेगा और नए मानकों का उद्योग पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा। फिलहाल कंपनियों के लिए प्रस्तावित नियमों का अध्ययन करना और संभावित बदलावों के लिए तकनीकी तैयारी शुरू करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

You may have missed