रांची में विधानसभा घेराव पर अड़े JPSC-JSSC अभ्यर्थी, पुलिस ने किया वाटर कैनन और लाठीचार्ज

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Digital UP News Desk

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को 17वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी छात्रों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव का ऐलान किया था। इसी क्रम में बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा की ओर मार्च करने के लिए आगे बढ़े। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें रास्ते में रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।

सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ छात्रों का विधानसभा मार्च दोपहर तक जारी रहा। छात्र विधानसभा की ओर जाने पर अड़े रहे, जबकि पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों की संख्या अधिक होने के कारण कई स्थानों पर पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग को पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की तेज बौछार के बावजूद कई छात्र मौके से हटने को तैयार नहीं हुए।

इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल का प्रयोग किया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति भी बनी। पुलिस की कार्रवाई के जवाब में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा चप्पल और पानी की खाली बोतलें फेंके जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, प्रदर्शन के दौरान एक अलग तस्वीर भी देखने को मिली। वाटर कैनन से पानी की बौछार किए जाने के बीच कुछ छात्र नाचते और प्रदर्शन करते नजर आए। इससे आंदोलनकारी छात्रों के उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है।

17वें दिन भी जारी है छात्रों का आंदोलन

JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले 16 दिनों से जारी है। सोमवार को आंदोलन का 17वां दिन था। छात्रों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग शामिल है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष और व्यापक तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।

छात्रों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

कई जिलों से रांची पहुंचे छात्र

विधानसभा घेराव में शामिल होने के लिए झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे। कई छात्र ट्रेन, बस और दूसरे वाहनों के जरिए राजधानी पहुंचे। इसके चलते शहर में प्रदर्शन को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क रहा।

रांची के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। प्रशासन की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित न हो।

अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो भी मार्च में शामिल

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। बताया गया कि वे अनशन पर बैठे थे और एंबुलेंस के जरिए मार्च में पहुंचे। छात्रों के बीच उनकी मौजूदगी आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार से छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे छात्रों को न्याय का भरोसा मिले और झारखंड की परीक्षा व्यवस्था में लोगों का विश्वास मजबूत हो।

उन्होंने अपने बयान में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि अगर शिबू सोरेन जीवित होते तो वह छात्रों के साथ खड़े होते। उन्होंने मुख्यमंत्री के जन्मदिन का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों को ऐसा तोहफा मिलना चाहिए जिससे बच्चे खुश हों और राज्य का सम्मान बना रहे।

वाटर कैनन के इस्तेमाल पर छात्रों की प्रतिक्रिया

पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ छात्रों ने कहा कि वाटर कैनन का पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं निकला। प्रदर्शनकारियों ने व्यंग्य करते हुए इसे भी व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार से जोड़ दिया।

हालांकि, प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का उद्देश्य भीड़ को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकना और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना रहा।

इस दौरान छात्रों ने नारेबाजी जारी रखी और अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने से इनकार किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

सरकार से समाधान की मांग

छात्र आंदोलन के बीच अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शनकारियों की मांगों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ छात्र परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन विधानसभा और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर है। छात्रों ने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग भी की है।

वहीं, विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

आगे क्या होगा?

17वें दिन विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच बनी स्थिति ने आंदोलन को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला दिया है। छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।

ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत होती है या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंचते हैं, तो लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल छात्रों की मुख्य मांग JSSC-CGL परीक्षा को लेकर उठे सवालों का समाधान और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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