RSS Gen Z संवाद: युवाओं के सवालों को समझने के लिए संघ चलाएगा देशभर में विशेष अभियान

24da4333-ece2-4c61-bd38-e61f9627ec52

Digital UP News Desk

नई दिल्ली: सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के दौर में जेन जी यानी नई युवा पीढ़ी की सोच और उसके सवाल अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रणनीति में भी महत्वपूर्ण स्थान बना रहे हैं। पुरानी व्यवस्थाओं को तर्क की कसौटी पर परखने और सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने वाली इस पीढ़ी से सीधे संवाद की तैयारी संघ ने शुरू कर दी है।

संघ की योजना है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद देश के अलग-अलग प्रांतों में युवा सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन कार्यक्रमों में विशेष तौर पर जेन जी के युवाओं से बातचीत की जाएगी। इस दौरान उनसे केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों, शासन व्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और देश के मौजूदा माहौल को लेकर उनके सवाल और अपेक्षाएं समझने की कोशिश होगी।

खास बात यह है कि इस अभियान में संघ की प्राथमिकता युवाओं को अपनी विचारधारा समझाने से पहले उनकी बात सुनने की बताई जा रही है। संवाद के दौरान मिलने वाले फीडबैक के आधार पर संघ अपनी सामाजिक गतिविधियों और युवा संपर्क रणनीति को आगे के लिए आकार देने की तैयारी में है।

जेन जी तक सीधे पहुंचने की रणनीति

आज की जेन जी का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए समाचार, विचार और सामाजिक मुद्दों से जुड़ता है। यह पीढ़ी किसी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने में भी पहले की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई देती है। ऐसे में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लिए इस वर्ग को समझना लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

इसी बदलते माहौल को देखते हुए संघ अब ऐसे युवाओं तक पहुंच बनाने पर जोर दे रहा है, जो किसी संगठन या राजनीतिक दल से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सामाजिक और राजनीतिक विषयों को लेकर सक्रिय रहते हैं।

संघ के प्रस्तावित युवा सम्मेलनों में ऐसे युवाओं से भी संवाद किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल संगठन से जोड़ना नहीं, बल्कि उनकी प्राथमिकताओं और बदलती सोच को समझना भी बताया जा रहा है।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद बढ़ा ध्यान

जेन जी के मुद्दों पर संघ का ध्यान बढ़ने के पीछे हाल के युवा आंदोलनों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून-जुलाई के दौरान हुए जेन जी के प्रदर्शन और उसे मिले व्यापक समर्थन ने राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का ध्यान इस वर्ग की ओर आकर्षित किया।

इन प्रदर्शनों के दौरान युवाओं ने शासन व्यवस्था, नीतियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। सोशल मीडिया के माध्यम से इन मुद्दों की पहुंच देश के अलग-अलग हिस्सों तक हुई।

परिणामस्वरूप, युवाओं की राजनीतिक और सामाजिक प्राथमिकताओं को समझने की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है। आने वाले वर्षों में युवा मतदाताओं की भूमिका चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की नजर भी इस वर्ग पर है।

मोहन भागवत के संवाद को माना जा रहा महत्वपूर्ण

छह अगस्त को मुंबई में संघ प्रमुख मोहन भागवत का जेन जी और जेन अल्फा के युवाओं के साथ संवाद भी इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस संवाद के दौरान युवाओं की शिकायतों और सवालों को सुने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके बाद अब प्रांत स्तर पर इसी तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संघ युवा पीढ़ी के साथ संवाद को एकतरफा कार्यक्रम के बजाय बातचीत की प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है। यानी युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के साथ-साथ उनकी प्राथमिकताओं और चिंताओं को समझने पर भी ध्यान रहेगा।

उत्तर प्रदेश के कई प्रांतों में होंगे युवा सम्मेलन

संघ के गुरु दक्षिणा कार्यक्रम के बाद 15 अगस्त से विभिन्न क्षेत्रों में युवा सम्मेलन आयोजित किए जाने की योजना है। उत्तर प्रदेश में कानपुर, काशी, गोरक्ष और अवध प्रांत के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और ब्रज प्रांत में भी युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

इन सम्मेलनों में जेन जी को विशेष रूप से संवाद के केंद्र में रखने की तैयारी है। संघ ऐसे युवाओं तक भी पहुंचना चाहता है, जो शाखाओं या किसी संगठनात्मक गतिविधि का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहते हैं।

इस तरह इन कार्यक्रमों का दायरा पारंपरिक संगठनात्मक गतिविधियों से आगे बढ़कर डिजिटल और गैर-संगठनात्मक युवा वर्ग तक पहुंच बनाने का होगा।

जेन अल्फा पर भी संघ की नजर

जेन जी के साथ-साथ जेन अल्फा को भी इस अभियान में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेन अल्फा से सामान्य तौर पर उन बच्चों और किशोरों की पीढ़ी को समझा जाता है, जिनका बचपन डिजिटल तकनीक, स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बीत रहा है।

संघ की दीर्घकालिक रणनीति में इस पीढ़ी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके पीछे तर्क यह है कि आने वाले वर्षों में यही पीढ़ी सामाजिक विमर्श, शिक्षा, रोजगार, तकनीक और सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करेगी।

इसलिए संघ की कोशिश केवल वर्तमान युवा पीढ़ी तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के साथ भी संवाद की जमीन तैयार करने की है। इसके तहत युवाओं को संघ की विचारधारा और कार्यपद्धति से परिचित कराने के साथ उनकी सोच को समझने पर भी जोर दिया जाएगा।

करीब तीन साल पहले तैयार हुआ था युवा सम्मेलन का खाका

संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के अनुसार, किशोर गण और तरुण गण जैसी शाखाओं के माध्यम से किशोरों और युवाओं के बीच संगठन की पहुंच पहले से रही है। वहीं, संघ के शताब्दी वर्ष को ध्यान में रखते हुए युवा सम्मेलनों की कार्ययोजना करीब तीन वर्ष पहले तैयार की गई थी।

हालांकि, बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल में इन कार्यक्रमों का महत्व अब और बढ़ गया है। तकनीक और सोशल मीडिया ने युवाओं के संवाद करने, जानकारी हासिल करने और किसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव किया है।

पहले किसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने के लिए पारंपरिक माध्यमों पर निर्भरता अधिक थी। अब युवा सोशल मीडिया के माध्यम से तत्काल अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। इसके अलावा, विभिन्न विचारों और सूचनाओं तक उनकी पहुंच भी पहले की तुलना में काफी अधिक है।

युवाओं के सवालों को समझना होगी बड़ी चुनौती

संघ के लिए जेन जी से संवाद की सबसे बड़ी चुनौती केवल युवाओं को अपने साथ जोड़ना नहीं, बल्कि उनकी बदलती प्राथमिकताओं को समझना भी होगी।

नई पीढ़ी रोजगार, शिक्षा, तकनीक, सामाजिक समानता, अवसर, प्रशासनिक पारदर्शिता और भविष्य की संभावनाओं जैसे विषयों पर अपनी राय रखती है। इसके अलावा, सोशल मीडिया ने युवाओं के बीच सवाल पूछने और सार्वजनिक बहस में भाग लेने की प्रवृत्ति को भी मजबूत किया है।

ऐसे में युवाओं से संवाद करते समय उनकी बात सुनना और उनके सवालों पर गंभीरता से विचार करना महत्वपूर्ण होगा। यही कारण है कि प्रस्तावित युवा सम्मेलन संघ के लिए केवल संपर्क अभियान नहीं, बल्कि बदलती युवा मानसिकता को समझने का माध्यम भी बन सकते हैं।

2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ेगा युवा फोकस

वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में युवा मतदाताओं की भूमिका स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि, संघ राजनीतिक दल नहीं है और उसके युवा संवाद कार्यक्रमों को सीधे चुनावी अभियान के रूप में देखना उचित नहीं होगा। फिर भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय युवा वर्ग की सोच आने वाले वर्षों के सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।

इसीलिए संघ की ओर से जेन जी और जेन अल्फा के साथ संवाद की पहल को दीर्घकालिक सामाजिक संपर्क रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

संवाद से क्या बदलेगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन संवाद कार्यक्रमों से संघ की रणनीति में किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। युवाओं से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर संगठन अपनी सामाजिक गतिविधियों, युवा संपर्क कार्यक्रमों और संवाद के तरीकों में बदलाव कर सकता है।

विशेष रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय युवाओं तक पहुंच बढ़ाना भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। इसके साथ ही युवाओं के सवालों और अपेक्षाओं को समझकर उनके अनुरूप संवाद की भाषा और माध्यम विकसित करने पर भी जोर दिया जा सकता है।

कुल मिलाकर, संघ का जेन जी के साथ प्रस्तावित संवाद अभियान बदलते सामाजिक परिवेश में युवा पीढ़ी को समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले युवा सम्मेलन यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि संघ और नई पीढ़ी के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

फिलहाल संघ की प्राथमिकता युवाओं के बीच पहुंच बनाने के साथ-साथ उनकी बात सुनने और उनके सवालों को समझने की दिखाई दे रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में होने वाले युवा संवाद कार्यक्रम इस बात का संकेत देंगे कि नई पीढ़ी और संघ के बीच बातचीत का यह नया चरण किस रूप में आगे बढ़ता है।

You may have missed