मथुरा में बारिश के बाद जलमग्न हुआ भूतेश्वर और नया बस स्टैंड अंडरपास, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: गुरुवार देर शाम हुई तेज बारिश ने मथुरा-वृंदावन शहर की जल निकासी व्यवस्था की एक बार फिर परीक्षा ले ली। बारिश के कुछ ही समय बाद भूतेश्वर रेलवे पुल और नया बस स्टैंड अंडरपास के नीचे बड़ी मात्रा में पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। कई वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए, जबकि प्रशासन को सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए आवागमन रोकना पड़ा। घटना के बाद नगर निगम की तैयारियों और जलभराव रोकने के लिए चल रही योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान इन स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनती है, जिससे आम नागरिकों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

बारिश के बाद अंडरपास में भरा कई फीट पानी

गुरुवार देर शाम हुई बारिश के बाद भूतेश्वर अंडरपास और नए बस स्टैंड के नीचे स्थित अंडरपास में लगभग चार से पांच फीट तक पानी भर गया। पानी का स्तर बढ़ने के कारण छोटे वाहन आगे नहीं बढ़ सके और कई दोपहिया तथा चारपहिया वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए।

स्थिति को देखते हुए नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर कुछ समय के लिए आवागमन रोक दिया, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। इसके चलते शहर के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना पड़ा।

पानी में फंसी कार, पुलिसकर्मी ने सुरक्षित निकाले लोग

बारिश के दौरान नया बस स्टैंड अंडरपास में एक वैगनआर कार पानी में फंस गई। कार के भीतर मौजूद दो लोग बाहर नहीं निकल पा रहे थे।

सूचना मिलने पर यातायात पुलिस के हेड कांस्टेबल कुलदीप मौके पर पहुंचे। उन्होंने लगभग साढ़े चार फीट पानी में उतरकर दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद क्रेन की सहायता से कार को भी बाहर निकाला गया।

स्थानीय लोगों ने समय पर किए गए इस बचाव कार्य की सराहना की। प्रशासन ने भी राहत कार्य के दौरान सतर्कता बरतने की अपील की।

हर वर्ष दोहराई जाती है जलभराव की समस्या

भूतेश्वर तिराहा और नया बस स्टैंड अंडरपास लंबे समय से जलभराव की समस्या से प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, मानसून के दौरान लगभग हर वर्ष यहां पानी भर जाता है, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क प्रभावित होता है।

बारिश के समय इन अंडरपासों से होकर गुजरना कठिन हो जाता है। कई बार श्रद्धालुओं, स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की जा रही है।

नगर निगम की पाइपलाइन योजना पर टिकी उम्मीदें

जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से नगर निगम ने भूतेश्वर से मसानी नाले तक लगभग 1800 मीटर लंबी और 27 इंच चौड़ी भूमिगत पाइपलाइन बिछाने की योजना तैयार की है।

इस परियोजना पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। प्रशासन के अनुसार, परियोजना की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कार्य प्रारंभ भी किया जा चुका है।

नगर निगम का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद वर्षा जल की निकासी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी और अंडरपास में जलभराव की समस्या काफी हद तक कम होगी। हालांकि, वर्तमान बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति ने यह संकेत दिया है कि परियोजना का लाभ अभी लोगों तक नहीं पहुंच पाया है।

पूर्व की योजनाओं पर भी उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई थी।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान भी नालों के निर्माण और जल निकासी सुधार से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की बात सामने आई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि अधिकांश योजनाओं का अपेक्षित लाभ अभी तक दिखाई नहीं दिया।

हालांकि, इन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति की आधिकारिक जानकारी संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर जारी की जाती रही है।

व्यापार और यातायात पर पड़ा असर

बारिश के बाद बने जलभराव का असर स्थानीय व्यापार पर भी देखने को मिला। कई दुकानदारों ने बताया कि ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे कारोबार पर असर पड़ा।

वहीं, शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यातायात पुलिस को ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।

विशेष रूप से धार्मिक नगरी होने के कारण मथुरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में जलभराव की स्थिति से बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी लंबे समय तक जमा रहने से स्वच्छता संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलभराव लंबे समय तक बना रहे, तो मच्छरों के पनपने और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय पर जल निकासी, सफाई और संक्रमण रोकने के उपाय आवश्यक होते हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था और जल निकासी पर निगरानी रखी जा रही है।

विशेषज्ञों ने दी दीर्घकालिक समाधान की सलाह

शहरी विकास विशेषज्ञों के अनुसार, जलभराव जैसी समस्याओं का समाधान केवल अस्थायी पंपिंग व्यवस्था से संभव नहीं है।

इसके लिए वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम, नियमित नालों की सफाई, वर्षा जल प्रबंधन, भूमिगत जल निकासी नेटवर्क और निर्माण कार्यों की समुचित योजना आवश्यक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप जल निकासी व्यवस्था विकसित करना समय की जरूरत है।

प्रशासन ने स्थिति पर रखी नजर

बारिश के बाद नगर निगम, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी करती रहीं। जलभराव वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई और लोगों से अनावश्यक रूप से पानी भरे क्षेत्रों में प्रवेश न करने की अपील की गई।

प्रशासन का कहना है कि बारिश की स्थिति को देखते हुए आवश्यकतानुसार राहत और जल निकासी कार्य जारी रहेंगे।

मथुरा में हुई तेज बारिश के बाद भूतेश्वर रेलवे पुल और नया बस स्टैंड अंडरपास में जलभराव की स्थिति ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से यातायात को नियंत्रित किया गया और पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

हालांकि, वर्षों से चली आ रही इस समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चल रही परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने से भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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